आगरा में साइबर ठगी का अनोखा मामला: महज 12 रुपये का बकाया बिल चुकाने का झांसा देकर ठगों ने खाते से उड़ाए 28.19 लाख रुपये

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उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में साइबर ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा मामला सामने आया है, जहां महज 12 रुपये के मामूली बकाया गैस बिल को चुकाने के नाम पर एक व्यक्ति के साथ लाखों रुपये की चपत लग गई। शातिर साइबर ठगों ने खुद को ‘ग्रीन गैस’ कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर पीड़ित को बकाया बिल का झांसा दिया और फिर एक संदिग्ध लिंक तथा एपीके (APK) फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करवा ली। इसके बाद चालाकी से गुप्त कोड डायल करवाकर पीड़ित के फोन की कॉल फॉरवर्डिंग को एक्टिवेट कर दिया गया। परिणामस्वरूप, बैंकिंग ट्रांजेक्शन से जुड़े ओटीपी सीधे ठगों के पास पहुंचने लगे और देखते ही देखते कंपनी के बैंक खाते से तीन अलग-अलग किस्तों में कुल 28 लाख 19 हजार रुपये पार कर दिए गए।

​इस गंभीर घटना के प्रकाश में आने के बाद स्थानीय साइबर क्राइम थाने में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल तमाम डिजिटल साक्ष्यों को खंगालते हुए पूरे मामले की गहराई से तहकीकात कर रही है। शुरुआती जांच-पड़ताल में यह भी सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि आगरा में ग्रीन गैस के नाम का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर लगभग 18 से 20 अन्य लोगों को भी इसी तरह के हथकंडों से निशाना बनाया जा चुका है।

फोन पर बकाया बिल का झांसा देकर बिछाया जाल

​साइबर अपराधियों ने सबसे पहले पीड़ित से संपर्क साधा और खुद को ग्रीन गैस का प्रतिनिधि बताते हुए यह दावा किया कि उनके गैस कनेक्शन का 12 रुपये का बिल बकाया चल रहा है। ठगों ने यह भी डराया कि यदि इसका तत्काल भुगतान नहीं किया गया, तो गैस कनेक्शन काटने जैसी कोई बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है। चूंकि राशि महज 12 रुपये की बहुत छोटी थी, इसलिए पीड़ित को एक पल के लिए भी ठगों की बातों पर कोई शक नहीं हुआ। इसके तुरंत बाद ठगों ने बिल अपडेट करने या भुगतान करने का बहाना बनाकर मोबाइल पर एक लिंक भेज दिया। साथ ही, बातचीत के दौरान ही एक APK फाइल को डाउनलोड कर मोबाइल में इंस्टॉल करने का दबाव बनाया गया। इन शातिर अपराधियों ने पूरी प्रक्रिया को इस तरह से अंजाम दिया मानो यह किसी आधिकारिक कॉर्पोरेट सेवा का अनिवार्य हिस्सा हो।

गुप्त कोड डायल कराकर एक्टिव की कॉल फॉरवर्डिंग

​ठगों का असली और खतरनाक खेल इसके बाद शुरू हुआ। पीड़ित से उसके मोबाइल फोन में एक गुप्त कोड डायल करवाया गया, जिसके माध्यम से उसके नंबर पर इनकमिंग कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इस गुप्त तरकीब का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने पीड़ित के फोन पर आने वाले जरूरी कॉल्स और वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों पर अपनी सीधी पैठ बना ली। कॉल फॉरवर्डिंग ऑन होते ही बैंक से आने वाले तमाम ओटीपी (OTP) सीधे जालसाजों के पास फॉरवर्ड होने लगे। इन ओटीपी की मदद से अपराधियों ने बैंक खाते से रकम निकालने की पूरी प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर लिया।

तीन बार में खाते से उड़ाए 28.19 लाख रुपये

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, ठगों ने एक ही बार में पूरी भारी-भरकम रकम ट्रांसफर नहीं की, बल्कि सुरक्षा तंत्र को चकमा देने के लिए तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कंपनी के खाते से कुल 28,19,000 रुपये साफ कर दिए। जब पीड़ित को बैंक खाते से इतनी बड़ी धनराशि निकाले जाने की भनक लगी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। तत्काल इस घटना की सूचना साइबर पुलिस को दी गई।

शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी गई। पुलिस अब उन सभी डिजिटल कड़ियों की जांच कर रही है जिसमें बैंक ट्रांजेक्शन, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, भेजे गए एपीके लिंक और कॉल फॉरवर्डिंग के टेक्निकल लॉग्स शामिल हैं।

ग्रीन गैस के नाम पर 18-20 लोगों को बनाया गया मोहरा

​इस मामले की त्यों-त्यों जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि इन ठगों ने केवल एक ही व्यक्ति को अपना शिकार नहीं बनाया, बल्कि ग्रीन गैस के नाम पर शहर के 18 से 20 अन्य नागरिकों के साथ भी इसी पैटर्न पर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया गया है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि कोई संगठित साइबर गिरोह सुनियोजित तरीके से गैस उपभोक्ताओं के डेटा का इस्तेमाल कर उन्हें छोटे बिलों का लालच देकर जाल में फंसा रहा है। साइबर सेल अब इन सभी संदिग्ध मामलों और नंबरों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है। इसके लिए संदेहास्पद बैंक खातों और डिजिटल मनी ट्रेल को बारीकी से परखा जा रहा है।

​APK फाइल बन सकती है आपके लिए सबसे बड़ा खतरा

इस पूरी घटना के बाद साइबर पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक सख्त चेतावनी जारी की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान शख्स के कहने पर अपने फोन में थर्ड-पार्टी या अज्ञात APK फाइल कभी भी डाउनलोड न करें। यदि आपके पास किसी गैस कंपनी, बैंक, बिजली विभाग या सरकारी संस्था के नाम से कोई फोन कॉल आती है, तो भी उनके मौखिक निर्देशों पर कोई भी संदिग्ध ऐप या सॉफ्टवेयर अपने डिवाइस में इंस्टॉल न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई सीक्रेट कोड डायल करना, कॉल फॉरवर्डिंग चालू करना, या किसी अनचाहे लिंक को खोलना आपके लिए भारी वित्तीय नुकसान का सबब बन सकता है। यदि वाकई आपका कोई बिल बकाया है, तो उसकी सत्यता जांचने के लिए हमेशा संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप, ऑफिशियल वेबसाइट या उनके प्रमाणित हेल्पलाइन नंबरों का ही उपयोग करना चाहिए।

​छोटी रकम का जाल बन रहा बड़े फ्रॉड का हथियार

​इस सनसनीखेज मामले में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे लोगों को फंसाने के लिए कितनी मनोवैज्ञानिक रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं। शुरुआत महज 12 रुपये के बेहद मामूली बकाया बिल से की गई थी, लेकिन असली निशाना बैंक खाते में जमा पूंजी पर था। यही कारण है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ हमेशा यह हिदायत देते हैं कि छोटे से छोटे भुगतान या मामूली बिल के मामले में भी किसी अनजान कॉलर के निर्देश पर अपने मोबाइल की सेटिंग्स में कोई तकनीकी बदलाव न करें। फिलहाल, आगरा साइबर पुलिस की पूरी तफ्तीश इसी बिंदु पर केंद्रित है कि आखिर ठगों ने किस तकनीक के जरिए कंपनी के बैंक खाते तक सेंध लगाई, कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए ओटीपी किस रिसीवर नंबर पर गए और यह 28.19 लाख रुपये किन-किन बैंक खातों में डायवर्ट किए गए हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh