आगरा। उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा के फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जैंगारा गांव में सोमवार को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) द्वारा एक विशाल ‘स्वाभिमान सभा’ का आयोजन किया गया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के मुख्य आतिथ्य में हुई इस सभा का मुख्य केंद्रबिंदु ब्रज की ऐतिहासिक अस्मिता, वीर गोकुला के अमर बलिदान, चौधरी चरण सिंह की किसान-केंद्रित राजनीतिक विरासत और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। इस सभा के जरिए केवल एक सियासी शक्ति प्रदर्शन ही नहीं किया गया, बल्कि जयंत चौधरी ने ब्रज क्षेत्र के साथ अपने गहरे पारिवारिक और राजनीतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए किसानों के विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता खुलकर व्यक्त की।
गले में पारंपरिक गमछा डाले जब जयंत चौधरी सभा स्थल पर पहुंचे, तो वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया। उन्होंने हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया और स्थानीय पदाधिकारियों से संवाद किया। आयोजकों का दावा था कि इस सभा में करीब 50 हजार लोगों के जुटने की संभावना है, जबकि मौके पर लगभग पांच हजार लोगों की भारी भीड़ मौजूद रही।
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए आगरा के अलावा मथुरा, हाथरस, फिरोजाबाद, अलीगढ़ और पड़ोसी राज्य राजस्थान के भरतपुर जिले से भी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सभा में उमड़ी भारी भीड़ और सड़कों पर वाहनों के लंबे काफिलों के चलते किरावली-कागारौल मार्ग पर लगभग दो किलोमीटर लंबा जाम भी लग गया, जिससे इस आयोजन की राजनीतिक चर्चा हर तरफ फैल गई।
‘मैं ब्रज की रज की एक चुटकी के बराबर भी नहीं’
जयंत चौधरी के भाषण का सबसे भावनात्मक हिस्सा ब्रज की मिट्टी और अपने सम्मान को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें एक चवन्नी के बराबर भी नहीं मान रहे और ‘चवन्नी थूक’ जैसी बातें कह रहे हैं। लेकिन वह खुद को ब्रज की रज की एक चुटकी के बराबर भी नहीं समझते। उन्होंने कहा कि ब्रज की रज की महत्ता हर कोई नहीं जानता। यह ऐसी पवित्र मिट्टी है, जहां देश-दुनिया से लोग आते हैं और माथे पर एक चुटकी रज लगाकर प्रसन्न होकर लौटते हैं। उन्होंने ब्रज की रज से जुड़ी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा— ‘ब्रज की रज में मिले यह रज, रज में यमुना नीर। धन्य भाग वो जीव के, जो जामे तजे शरीर।’
जयंत चौधरी ने कहा कि ब्रज की मिट्टी के लाल उनके सामने खड़े हैं। उन्हें विश्वास है कि इस क्षेत्र के लोग उनकी लाज और सम्मान की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग झुकना नहीं जानते। वे देश के लिए शहादत देने वालों और बड़ी कुर्बानी करने वालों के सामने ही सिर झुकाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान जब ब्रज की मिट्टी पर खेती करता है और अपने खेतों को सींचता है, तो वह धरती मां के सम्मान में झुकता है। लेकिन किसी ऐरे-गैरे के सामने झुकना इस क्षेत्र की फितरत नहीं है। इसी स्वाभिमान की भावना को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम का नाम स्वाभिमान सभा रखा गया है।
‘सभा में आने की वजह चुनाव नहीं, पीढ़ियों से चले आ रहे रिश्ते’
जयंत चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनकी जैंगारा यात्रा का उद्देश्य किसी चुनावी समीकरण को साधना नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी चुनाव का समय नहीं है। एमएलसी के चुनाव जरूर चल रहे हैं, लेकिन इस सभा में चुनाव कोई मुद्दा नहीं है। उन्हें यहां तक खींचकर लाने वाली वजह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे रिश्ते हैं। उन्होंने क्षेत्र के एक बुजुर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि मौका मिलने पर वह कुछ ज्यादा बोल गए थे। वह उनकी भावनाएं थीं और वह इसका बुरा नहीं मानेंगे। इस टिप्पणी के जरिए जयंत ने स्थानीय स्तर पर हुए घटनाक्रम को व्यक्तिगत विवाद के बजाय भावनात्मक संबंधों के नजरिये से देखने का संदेश दिया। उनकी इस बात को ब्रज क्षेत्र में अपने राजनीतिक और पारिवारिक जुड़ाव को रेखांकित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। जयंत चौधरी ने यह संदेश दिया कि उनके लिए इस क्षेत्र से संबंध केवल राजनीतिक समर्थन या चुनावी लाभ तक सीमित नहीं हैं।
वीर गोकुला की वीरता को पाठ्यक्रम में स्थान दिलाने का संकल्प
सभा में जयंत चौधरी ने वीर गोकुला की वीरता और बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी गाथा को देश के इतिहास और पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिलाने का संकल्प पूरा हो रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी की कक्षा नौ की किताब में वीर गोकुला की गाथा शामिल करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि करीब दो महीने पहले जब वह इस क्षेत्र में आए थे, तब वीर गोकुला की प्रतिमा का निर्माण हुआ था। उस समय उन्होंने संकल्प लिया था कि जिस वीर ने किसानों की सेना खड़ी की और औरंगजेब के जजिया कर का विरोध किया, उसकी वीरता और बलिदान को देश के इतिहास में उचित स्थान दिलाया जाएगा।
जयंत चौधरी ने वीर गोकुला के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने क्रूर शासक का विरोध किया था और वर्ष 1670 में आगरा कोतवाली में उन्हें शहादत दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस महान योद्धा की गाथा को पाठ्यक्रम में स्थान मिलना गर्व की बात है। सभा के बाद उन्होंने वीर गोकुला की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की बात भी कही। जयंत ने कहा कि ये प्रयास इसलिए संभव हो पाए हैं, क्योंकि लोगों ने एकता बनाए रखी, समय-समय पर अपने स्वाभिमान की रक्षा की और लोकदल को सींचने का काम किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी लोग इसी तरह एकजुट रहेंगे।
आलू बोर्ड के गठन की मांग प्रधानमंत्री के सामने उठाई
जयंत चौधरी ने आगरा और आसपास के क्षेत्रों के आलू किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों ने उनके सामने आलू बोर्ड के गठन की मांग रखी, जो उन्हें उचित लगी। उन्होंने सभा में मौजूद किसानों से पूछा कि क्या वे इस मांग से सहमत हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह भारत सरकार में किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर हैं। यदि वह इस जिम्मेदारी पर रहते हुए आलू किसानों के लिए काम नहीं कर पाए, तो ऐसी कुर्सी का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर प्रधानमंत्री के सामने भी चर्चा की गई है और आलू उत्पादकों को राहत दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा।
जयंत चौधरी ने कहा कि आलू किसानों की समस्या केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। उनकी उपज को मंडी में उचित भाव नहीं मिल पाता। किसानों के सामने कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण, विपणन और अपने उत्पाद का ब्रांड तैयार करने जैसी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि आलू के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की जरूरत है। किसानों को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिससे उनकी उपज का बेहतर इस्तेमाल हो सके और उन्हें उचित मूल्य मिल सके।
‘जब मखाने के लिए बोर्ड बन सकता है, तो आलू के लिए क्यों नहीं?’
जयंत चौधरी ने कृषि क्षेत्र में बदलती बाजार परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में लोग आलू के चिप्स की जगह मखाना खाना पसंद कर रहे हैं। मखाने की खेती करने वाले भी किसान हैं और आलू उगाने वाले भी। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी सभी किसानों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब हल्दी और मखाने जैसे कृषि उत्पादों के लिए संस्थागत व्यवस्था की जा सकती है, तो आलू किसानों के लिए भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। आलू बोर्ड में किसानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें अनुसंधान की व्यवस्था हो और नीतियां बनाने का अधिकार भी मिले।
जयंत के मुताबिक, ऐसी संस्था आलू के उचित मूल्य निर्धारण में मदद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर फंड के जरिए किसानों को सीधे राहत देने की व्यवस्था भी की जा सकती है। उन्होंने आगरा में एक बड़ी अनुसंधान इकाई के निर्माण का भी जिक्र किया। कहा कि क्षेत्र के किसान इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं और उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री के सामने भी यह मुद्दा रखा है। जयंत चौधरी ने कहा कि आलू किसानों को उत्पादन के साथ-साथ विपणन और प्रसंस्करण की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। किसानों को केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनकी उपज से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने, अपना ब्रांड विकसित करने और बाजार तक सीधी पहुंच बनाने की दिशा में भी काम होना चाहिए।
‘36 बिरादरियों को साथ लिए बिना कोई सफल नहीं हो सकता’
जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज में 36 जातियों और बिरादरियों को साथ लिए बिना कोई अकेला सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह के समय पूरे उत्तर भारत में किसान राजनीति का प्रभाव था। आज उस विचारधारा और सामाजिक एकजुटता की भावना को फिर से स्थापित करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी लोग मिलकर 21वीं सदी की भारतीय राजनीति में इस विचार को फिर से स्थापित कर सकते हैं? उनके मुताबिक, यह केवल सवाल नहीं, बल्कि चुनौती और भविष्य के लिए एक मानक भी है।
जयंत ने कहा कि आने वाले वर्षों में जब पीछे मुड़कर देखा जाएगा, तब यह भी देखना होगा कि चौधरी चरण सिंह की विराट विचारधारा और विरासत को कितनी अच्छी तरह संभाला गया। उन्होंने कहा कि शायद उनकी किस्मत में एक बार फिर नए निर्माण और नई रचना का अवसर लिखा हो। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इस बयान में रालोद की भविष्य की रणनीति का संकेत दिखाई दिया। पार्टी अपने पारंपरिक किसान आधार के साथ व्यापक सामाजिक गठजोड़ की जरूरत पर जोर देती रही है। जयंत चौधरी ने भी स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती केवल संख्या से नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को साथ लेकर चलने से आएगी।
‘तीन पीढ़ियों ने संघर्ष किया, लाठियां खाईं, फिर भी डटे रहे’
रालोद के संघर्ष और संगठनात्मक इतिहास पर बात करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि चौधरी अजित सिंह के समय से पार्टी ने राजनीति में काफी संघर्ष किया है। पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें बताते हैं कि उन्होंने तीन पीढ़ियों तक संघर्ष किया, लाठियां खाईं और सत्ता में रही सरकारों के खिलाफ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दशकों में उन्होंने खुद भी इस संघर्ष को करीब से देखा है। विधानसभा में रालोद के विधायकों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन पार्टी के पास ईमानदार नेताओं और कार्यकर्ताओं की ऐसी सेना है, जो जमीन पर प्रभावी ढंग से काम कर सकती है और मतदाताओं का सम्मान करती है।
जयंत ने पार्टी की संसदीय ताकत में आई कमी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब सभी लोग साथ थे, तब रालोद उत्तर प्रदेश में तीन राज्यसभा सांसद जिताने की स्थिति में थी, लेकिन अब पार्टी केवल एक सांसद भेज पा रही है। राजस्थान के पिछले विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस के 99 और रालोद का एक विधायक था। सरकार बनाने के लिए उस एक विधायक की जरूरत पड़ी थी। इन उदाहरणों के जरिए जयंत ने यह समझाने की कोशिश की कि राजनीतिक ताकत का आकलन केवल सीटों की संख्या से नहीं किया जा सकता। सीमित संख्या में प्रतिनिधि होने के बावजूद सही समय पर संगठन और गठबंधन की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
आगरा की धरती और चौधरी अजित सिंह के रिश्ते का किया जिक्र
जयंत चौधरी ने आगरा की धरती से अपने परिवार के पुराने संबंधों को भी याद किया। उन्होंने जैंगारा गांव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह छोटा-सा गांव है, लेकिन इसने बड़े विचारकों को जन्म दिया है। उन्होंने कप्तान भगवान सिंह और पूर्व मंत्री अजय सिंह को नमन करते हुए उन्हें याद किया। उन्होंने एत्मादपुर के पास स्थित बगलघूसा गांव का उदाहरण दिया। जयंत के मुताबिक, वर्ष 1987 में चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद चौधरी अजित सिंह को राजनीति में आगे बढ़ाने की जरूरत थी। उस समय लोगों का हुजूम पैदल लखनऊ की ओर जा रहा था। इसी दौरान बगलघूसा गांव में चौधरी अजित सिंह का स्वागत किया गया। जयंत ने बताया कि गांव के लोगों ने उस समय अपने गांव का नाम अजीतगढ़ रखने की बात कही थी। उन्होंने इसे आगरा की धरती और चौधरी अजित सिंह के बीच गहरे जुड़ाव का उदाहरण बताया। इस प्रसंग के जरिए जयंत ने रालोद के राजनीतिक इतिहास को स्थानीय भावनाओं से जोड़ने की कोशिश की। उनका संदेश था कि पार्टी की जड़ें केवल चुनावी गतिविधियों में नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे सामाजिक संबंधों और किसान आंदोलनों में हैं।
‘इस क्षेत्र के लोगों को विरोधियों से आगे निकलना आता है’
जयंत चौधरी ने संगठन की ताकत और स्थानीय लोगों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लोग जानते हैं कि विरोध करने वालों और अड़ंगा लगाने वालों से कैसे निपटना है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों के नाम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी मिट्टी और धरती से जुड़ाव समान है। उन्होंने विभिन्न सेनाओं में लड़ने वालों और फौजदारों की कहानियों का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में क्रांतिकारियों और बलिदान देने वालों की लंबी परंपरा रही है। जयंत ने कहा कि लोगों ने समय-समय पर अपने स्वाभिमान की रक्षा की है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए रालोद को भी संगठन मजबूत करना है और सामाजिक एकजुटता बनाए रखनी है।
‘चौधरी चरण सिंह की विरासत को संभालना हमारी चुनौती’
जयंत चौधरी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और विरासत को आगे बढ़ाना उनकी पार्टी के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि किसानों और मजदूरों के हितों की राजनीति को मजबूत करना केवल अतीत का गौरव याद करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे वर्तमान की समस्याओं से जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने किसानों की आय, आलू के उचित मूल्य, प्रसंस्करण इकाइयों, अनुसंधान और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों को उठाते हुए संकेत दिया कि रालोद अपनी राजनीतिक पहचान को किसान हितों के साथ जोड़कर आगे बढ़ना चाहता है। सभा में उनकी बातों से यह संदेश भी निकला कि पार्टी को अपने पुराने सामाजिक आधार को फिर से सक्रिय करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी संगठन से जोड़ना होगा। जयंत ने कार्यकर्ताओं की मेहनत और संघर्ष का उल्लेख करते हुए भरोसा जताया कि एकजुटता के बल पर संगठन को और मजबूत किया जा सकता है।
योगेश नौहवार बोले-जयंत की लोकप्रियता से विपक्ष परेशान
रालोद एमएलसी योगेश नौहवार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जयंत चौधरी की बढ़ती लोकप्रियता और ताकत देखकर विपक्षियों के पेट में दर्द होने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता अनर्गल बातें कर रहे हैं। योगेश नौहवार ने कहा कि जिन लोगों ने चौधरी चरण सिंह के कदमों में बैठकर राजनीति सीखी, आज वही उनकी विरासत को नकारने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर चौधरी चरण सिंह को अपना मसीहा मानते हैं। वहीं, रालोद के प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह ने कार्यकर्ताओं से जयंत चौधरी के कंधे मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरा देश चौधरी चरण सिंह का सम्मान करता है। ऐश्वर्य राज सिंह ने कहा कि यदि कार्यकर्ता जयंत चौधरी को मजबूत करेंगे तो रालोद के साथ-साथ एनडीए गठबंधन भी मजबूत होगा। उन्होंने जयंत चौधरी को युवा नेता बताते हुए कहा कि वह युवाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर रहते हैं।
ब्रज में राजनीतिक आधार मजबूत करने का संदेश
जैंगारा की स्वाभिमान सभा में जयंत चौधरी ने भावनात्मक अपील, किसान हितों और पार्टी की वैचारिक विरासत को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। वीर गोकुला के बलिदान और ब्रज की रज का उल्लेख कर उन्होंने क्षेत्रीय अस्मिता को केंद्र में रखा, जबकि आलू बोर्ड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग उठाकर किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया। चौधरी चरण सिंह की विरासत, तीन पीढ़ियों के संघर्ष और 36 बिरादरियों को साथ लेकर चलने की बातों के जरिए उन्होंने संगठन को व्यापक सामाजिक आधार देने का संदेश दिया।
सभा में उमड़ी भीड़ और आसपास के जिलों से आए लोगों की मौजूदगी ने रालोद की सक्रियता को जरूर प्रदर्शित किया, हालांकि वास्तविक राजनीतिक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में संगठन की सक्रियता और जनसमर्थन के आधार पर ही हो सकेगा। अपने संबोधन के अंत में जयंत चौधरी ने सभा में पहुंचे लोगों का आभार जताया और ‘जय हिंद, जय भारत’ के उद्घोष के साथ अपना भाषण समाप्त किया।
इस सभा में रालोद एमएलसी योगेश नौहवार, प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं ने भी अपने विचार रखे और पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत करने का संकल्प लिया। अंत में जयंत चौधरी ने सभी का आभार जताते हुए क्षेत्र के विकास और किसानों के अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने का दृढ़ संकल्प लिया।
- यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 का विस्तृत कार्यक्रम घोषित: 5 फरवरी से शुरू होंगी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षाएं - October 12, 2026
- मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन: राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका, मंगलवार को होगी सुनवाई - October 12, 2026
- 6 राज्यों के बदले राज्यपाल: चार नई नियुक्ति, दुष्यंत गौतम को सिक्किम की कमान - October 12, 2026