मुंबई। बॉलीवुड से एक बुरी खबर सामने आ रही है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज निर्देशक श्याम बेनेगल का निधन हो गया है। उन्होंने 90 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। उन्होंने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और लीक से हटकर फिल्मों के लिए जाने गए। उन्होंने इंडस्ट्री में 50 साल से भी ज्यादा लंबा सफर तय किया।
जानकारी के मुताबिक, श्याम बेनेगल ने मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल में शाम 6.30 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा।
फिल्मों में आने से पहले करते थे फोटोग्राफी
श्याम सुंदर बेनेगल का जन्म 14 दिसंबर 1934 में हैदराबाद में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। फिल्मों की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने अर्थशास्त्र में पढ़ाई की, लेकिन आगे उन्होंने फोटोग्राफी शुरू कर दी। बॉलीवुड की दुनिया में उन्हें आर्ट सिनेमा का जनक भी माना जाता है। जब वे बारह साल के थे, तब उन्होंने अपने फोटोग्राफर पिता श्रीधर बी. बेनेगल के दिए गए कैमरे पर अपनी पहली फिल्म बनाई थी।
‘अंकुर’ फिल्म से की थी शुरुआत
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख करने से पहले उन्होंने कई ऐड एजेंसियों के लिए काम किया। बॉलीवुड में बतौर निर्देशक श्याम ने अपनी शुरुआत ‘अंकुर’ से की थी। उनकी पहली फिल्म ने 43 अवॉर्ड जीते थे। इसके बाद ‘मंथन’, ‘कलयुग’, ‘निशांत’, ‘आरोहण’ और ‘जुनून’ जैसी कई यादगार फिल्में बनाईं।
इंदिरा गांधी ने की थी तारीफ
बताया जाता है कि इंदिरा गांधी ने एक बार उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि उनकी फिल्में इंसानियत को अपने मूल स्वरूप में तलाशती हैं। सत्यजीत रे के गुजरने के बाद श्याम ने उनकी विरासत को संभाला।
पद्म भूषण से नवाजा गया
कला के क्षेत्र में उन्होंने अद्भुत योगदान दिया और साल 1991 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, साल 2007 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। श्याम बेनेगल की फ़िल्मों को सात बार बेस्ट हिन्दी फीचर फ़िल्म के लिए नैशनल अवॉर्ड मिला है, जिनमें अंकुर (1974), निशांत (1975), मंथन (1976), भूमिका (1977), मम्मो (1994), सरदारी बेगम (1996), जुबैदा (2001) शामिल हैं।
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