राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने कहा- अनुदान के लिए लम्बा संघर्ष किया है
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Agra, Uttar Pradesh, Bharat, India. राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के प्रबन्धकों की माँग पर आपत्ति और चिंता प्रकट की है। प्रबंधकों ने कहा है कि सरकार उनके विद्यालयों की ग्रान्ट (अनुदान) वापिस ले ले ताकि वे अपने विद्यालयों को यू.पी. बोर्ड की बजाय सी.बी.एस.ई. बोर्ड के विद्यालयों में परिवर्तित कर सकें। डॉ. नरवार ने कहा है कि प्रबन्धकों की यह माँग सब तरह से अनुचित व अन्यायपूर्ण है। शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात है। शैक्षिक महासंघ इनकी असंवैधानिक माँग को पूरा नहीं होने देगा। इससे शिक्षकों में गहरा रोष है।
डॉ. नरवार ने बताया है कि माध्यमिक विद्यालयों को अनुदान दिलाने के लिए शिक्षक संगठनों ने एक लम्बा संघर्ष और बलिदान दिया है, तब जाकर सन् 1971 में वेतन वितरण अधिनियम 1971 का प्रावधान लागू कराया गया है। सीबीएसई बोर्ड में परिवर्तित होने से प्रबंधक मनमानी फीस लेंगे। साथ ही हजारों शिक्षकों की नौकरी खत्म हो जाएगी। मनमाने वेतन पर नए शिक्षक रखे जाएंगे। सीबीएसई स्कूलों पर यूपी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
डॉ. नरवार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से माँग की है कि वे शिक्षकों के हितों की रक्षा करें। र कोई भी ऐसा कानून न बनायें जिससे अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का विरोधी हो।
ज्ञात हो कि एडेड माध्यमिक विद्यालयों के प्रबन्धकों द्वारा 10 सितम्बर को एक अधिवेशन करके इस तरह की माँग की है।
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