नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज वर्शिप (विशेष प्रावधान) एक्ट, 1991 की वैधता से संबंधित मामले में कई नई याचिकाएं दायर किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया और नई याचिकाएं आ रही हैं।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट का कहना है कि लंबित याचिकाओं पर पहले से नोटिस जारी किया जा चुका है और केंद्र के जवाब का इंतेजार है। एडवोकेट विकास सिंह और एडवोकेट निजाम पाशा की आपत्तियों पर कोर्ट ने यह बात कही। दोनों वकीलों ने केंद्र पर सवाल उठाए थे कि आठ तारीखें बीत चुकी हैं और केंद्र की तरफ से कोई काउंटर दाखिल नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने भी सहमति जताई और कहा, ‘हां अब तक काउंटर फाइल नहीं हुआ है और नई आपत्तियों के साथ नई-नई याचिकाएं आ रही हैं।’
एक वादी की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने दिन में सुनवाई के लिए एक नई याचिका का उल्लेख किया तो सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा, ‘हम शायद इस पर सुनवाई नहीं कर पाएं।’ अदालत की कार्यवाही शुरू होने पर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने मामले का उल्लेख किया। हालांकि, कोर्ट इस आधार पर याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है कि नए आवेदनों का कानून आधार अलग होना चाहिए, जो अभी तक सामने न आया हो।
जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, ‘याचिकाएं दायर करने की एक सीमा होती है। बहुत सारे आईए (अंतरिम आवेदन) दायर किए गए हैं। हम शायद इस पर सुनवाई नहीं कर पाएं।’ उन्होंने कहा कि मार्च में एक तारीख दी जा सकती है। सीजेआई ने कहा कि पिछली बार कई हस्तक्षेप आवेदनों को अनुमति दी गई थी। सुनवाई के दौरान पेश हुए एक और सीनियर एडवोकेट दुष्यंत ने कहा कि हां, अब और नई याचिकाओं को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जस्टिस संजीव खन्ना ने यह भी कहा कि एक्ट को चुनौती देने वाली वो याचिकाएं खारिज की जाती हैं, जिनमें अभी तक कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। ये याचिकाकर्चा मौजूदा याचिकाओं में आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, ये आवेदन नए आधार पर हों।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2024 के अपने आदेश के जरिए विभिन्न हिंदू पक्षों की ओर से दायर लगभग 18 मुकदमों में कार्यवाही को प्रभावी ढंग से रोक दिया, जिसमें वाराणसी में ज्ञानवापी, मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और संभल में शाही जामा मस्जिद सहित 10 मस्जिदों के मूल धार्मिक चरित्र का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण का अनुरोध किया गया था। संभल की शाही जामा मस्जिद में झड़पों में चार लोग मारे गए थे। प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के तहत किसी स्थान का धार्मिक चरित्र वैसा ही बनाए रखना अनिवार्य है जैसा वह 15 अगस्त, 1947 को था।
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