Agra, Uttar Pradesh, India. किन्नर (हिजड़ा) को देखकर हमारे चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती है। किन्नर हमें मांगलिक कार्यों के मौके पर नाच-गाना करते दिखाई देते हैं। चौराहों पर भीख मांगते दिखाई देते हैं। ट्रेनों में जबरन वसूली करते भी नजर आते हैं। वास्तविक तौर पर किन्नर ऐसे नहीं थे। किन्नर तो तलवारबाज थे। योद्धा थे। स्मारक प्रेमी थे। किन्नरों का यह रूप मुगल काल में दिखाई दिया।
आगरा के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भानु प्रताप सिंह ने किन्नरों को लेकर एक पुस्तक लिखी है। इसका नाम है- भारत के तलवारबाज और स्मारक प्रेमी किन्नर (Bharat ke talwarbaj aur smarak premi kinnar) । निखिल प्रकाशन आगरा (Nikhil prakashan agra) ने पुस्तक का प्रकाशन किया है। इस पुस्तक की खास बात यह है कि यह पुस्तक किन्नरों के बारे में प्रचलित धारणा को दूर रकती है। पुस्तक में बताया गया कि किन्नरों ने कैसे कारनामे किए हैं। उदाहरण के तौर पर गुरुद्वारा के सामने पत्थर घोड़ा स्मारक का निर्माण किन्नर ने कराया था। आगरा-फिरोजाबाद रोड पर एत्मादपुर से पहले बुढ़िया का ताल स्मारक भी किन्नर की देन है। यहां तक कि आगरा किला की छोटी दीवार भी किन्नर ने ही बनाई है। वास्तव में किन्नरों की गौरव गाथा विशाल है।
भारत के तलवारबाज और स्मारक प्रेमी किन्नर पुस्तक के बारे में इतिहासकार राज किशोर राजे कहते हैं- लोगों को पहली बार किन्नरों के बारे में अद्भुत जानकारी मिलेगी। कम ही लोगों को पता है कि किन्नरों ने मुगल शासकों के लिए युद्ध किया है। अब तक तो लोग यही जानते हैं कि किन्नर मुगल बादशाहों के हरम के संरक्षक थे या बेगमों के लिए जासूसी किया करते थे। आगरा में किन्नरों ने अनेक स्मारक बनवाए हैं। हर किसी को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए।
प्रकाशकः निखिल प्रकाशन, आगरा
लेखकः डॉ. भानु प्रताप सिंह (पत्रकार)
मूल्यः 60 रुपये
पुस्तक अमेजन पर भी उपलब्ध है।
कैसे प्राप्त कर सकते हैं पुस्तक
पुस्तक प्राप्त करने के लिए निखिल प्रकाशन के मोबाइल नम्बर 9458009531 पर 60 रुपये (डाक खर्च फ्री) पेटीएम, फोन पे या गूगल पे के माध्यम से भेजें। साथ में स्क्रीन शॉट, पुस्तक का नाम और अपना पता पिन कोड के साथ भेजें। 10 पुस्तकें एक साथ मंगाने पर 500 रुपये भेजने होंगे।
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