चार दिन मेला चले भीड़ भौत आई है, दीनदयाल के नाम पर खूब होय कमाई है
14 अक्टूबर तक चलेगा मेला, समिति ने सभी को किया सपरिवार आमंत्रित
डॉ. भानु प्रताप सिंह
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Mathura, Uttar Pradesh, Bharat, India. विशालकाय झूले और जादू। बच्चों के साथ झूल रहे दादू। अम्मा भी खाय रही चाट और भल्ला, चाऊमिन मांग रहा छोटा सा लल्ला। जलेबी लाल रंग की सबकूँ बुलाय रई, लै लै कें स्वाद पब्लिक खाय रही। आगरा ते उर्मिला सैंया संग आई है, ननद देवरानी ने फैंसी चप्पल मंगाई है। सिल बट्टा और चक्की भी यहां तो मिल रहे, कड़ाही और तवा भी सस्ते में बिक रहे। 100 के चार 100 के चार आवाजें आती हैं, सामान लेने को जिया ललचाती हैं। चार दिन मेला चले भीड़ भौत आई है, दीनदयाल के नाम पर खूब होय कमाई है। अंत्योदय का मंत्र पंडित जी लाए हैं, ऐसे मेला अंत्योदय उत्थान में भूमिका निभाए है। तभी तो समिति साल में एक बार मेला लगाती है, छोटे-छोटे लोगों की कमाई हो जाती है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव मेला समिति और पं. दीनदयाल उपाध्याय जन्मभूमि स्मारक समिति द्वारा आयोजित महोत्सव मेला की। दीनदयाल धाम (फरह, मथुरा) में यह मेला चल रहा है। 14 अक्टूबर, 2023 तक चलेगा। सुबह से मेला शुरू हो जाता है और देर रात्रि तक चलता है। आसपास के गांवों के नहीं, आगरा, भरतपुर, पलवल, फरीदाबाद, अलीगढ़, हाथरस तक से लोग सिर्फ मेला देखने आते हैं। चार दिन के लिए बहनें अपने मायके मथुरा आ जाती हैं इसलिए कि मेला देखना है।

हम सब जानते हैं कि हमारा देश भारत मेलो-तमाशों का देश भी है। मेले हमें उल्लसित करते हैं। मनोरंजन करते हैं। बच्चों को तो मेलों में मजा आ जाता है। पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव मेला कई मायनों में अनूठा है। वह इसलिए कि यहां संस्कार दिए जा रहे हैं। बृज की लोक कला और लोक संस्कृति से भरपूर कार्यक्रम है। ठेठ ग्रामीण से लेकर उच्च पदासीन व्यक्ति के लिए भी मेला महोत्सव है। अगर आपको मंच पर कार्यक्रम नहीं देखना है तो मेला घूमिए। आपको उपयोग की कोई न कोई वस्तु अवश्य मिल जाएगी। फिर चाहे वह बच्चों की पीपनी हो या घर वाली के लिए श्रृंगार। बहन के लिए कपड़े तो भाई के लिए बहुत कुछ।
अच्छी बात यह है कि मेला बहुत व्यवस्थित ढंग से चल रहा है। यहां मनोरंजन तो है लेकिन कोई फूहड़ता या अश्लीलता नहीं है। आग्रह है कि मेला में कई चीजें खरीदकर पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के मंत्र को साकार करने में योगदान कीजिए।
जन्मभूमि स्मारक समिति के मंत्री केशव कुमार शर्मा और मेला मंत्री मनीष अग्रवाल ने बताया कि इस तरह के मेला लगाने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। उन्होंने मेला महोत्सव में सभी को सपरिवार आमंत्रित किया है।
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