आगरा। ताजनगरी में यमुना व्यू प्वाइंट पर आयोजित हो रही ‘यमुना महाआरती’ विवादों के घेरे में आ गई है। बनारस की तर्ज पर शुरू किए गए इस आयोजन पर अब विपक्षी दलों और स्थानीय अधिवक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया जा रहा है कि नगर निगम जिस स्थान पर आरती करा रहा है, वहां यमुना का शुद्ध जल नहीं बल्कि पास के नाले का गंदा पानी बह रहा है। इसे छिपाने के लिए प्रशासन ने मिट्टी के टीले बनाकर उन्हें टेंट से कवर कर दिया है।
सदन के फैसले की अनदेखी और बसपा का हमला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने इस प्रोजेक्ट को सरकारी धन की बर्बादी करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले साल सदन में सर्वसम्मति से ‘हाथी घाट’ को स्थाई आरती स्थल के रूप में चुना गया था, तो यमुना की तलहटी में अस्थाई निर्माण पर लाखों रुपये क्यों खर्च किए जा रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए फंड की कमी बताने वाला निगम प्रशासन एनजीटी के नियमों को ताक पर रखकर नदी की जमीन पर अवैध खर्च कर रहा है।
महापौर की चिट्ठी और एनजीटी का डर
विवाद बढ़ता देख महापौर हेमलता दिवाकर ने नगर आयुक्त को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यमुना की तलहटी में किसी भी गतिविधि के लिए एनजीटी (NGT) के कड़े दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए और सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अनिवार्य रूप से लिया जाए। महापौर की इस चिट्ठी ने खुद निगम अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अधिवक्ता की चेतावनी: बुधवार को दाखिल होगी याचिका
इस मामले की मंडलायुक्त से शिकायत करने वाले अधिवक्ता अपूर्व शर्मा ने अब सीधे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। शर्मा ने कहा, “यमुना का नाम लेकर लोगों से नाले की आरती कराई जा रही है, जो आस्था के साथ भद्दा मजाक है। हम बुधवार को नगर निगम के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर करेंगे।”
नाले की बदबू और टीलों का पर्दा
धरातल पर स्थिति यह है कि आरती स्थल पर पानी न के बराबर है और नाले का गंदा पानी वहां जमा हो रहा है, जिससे तीखी बदबू आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जेसीबी से मिट्टी डालकर नाले को ढकने की कोशिश महज एक दिखावा है। 6 दिन और चलने वाले इस कार्यक्रम को लेकर अब लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
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