प्रयागराज माघ मेला: इटली की लुक्रेजिया पर चढ़ा ‘सनातन’ का रंग; संगम तट पर लगाए ‘जय श्रीराम’ के जयकारे, भारत को बताया “जादुई देश”

RELIGION/ CULTURE

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। शुक्रवार, 9 जनवरी को इटली से आई महिला पर्यटक लुक्रेजिया ने त्रिवेणी संगम के दर्शन किए और भारत को एक “जादुई देश” बताया। यह उनकी तीसरी भारत यात्रा है, जिसका उद्देश्य यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन संस्कृति का अनुभव करना है।

मीडिया से बातचीत में लुक्रेजिया ने कहा कि वह अपने पिता के साथ दुनिया के कई देशों की यात्रा कर चुकी हैं, लेकिन भारत के लिए उनके दिल में विशेष स्थान है। उन्होंने कहा, “यहां के लोग, भोजन, संस्कृति और हिंदू धर्म वास्तव में अद्भुत हैं।”

अध्यात्म से जुड़ाव और संतों के सान्निध्य में समय

लुक्रेजिया ने बताया कि वह पहली बार 2024 में भारत आई थीं। इसके बाद 2025 के कुंभ और अब 2026 के माघ मेले में शामिल होने के लिए दोबारा प्रयागराज पहुंचीं। उन्होंने एक आध्यात्मिक गुरु से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनसे करुणा, त्याग और सरल जीवन के मूल्य सीखने को मिल रहे हैं। गुरु के साथ उनका संवाद भारत में ही नहीं, बल्कि विदेश में रहते हुए भी डिजिटल माध्यम से बना रहता है। माघ मेले के बाद वह वाराणसी जाने की योजना भी बना रही हैं।

साधु-संतों के शिविरों में खोजती रहीं जीवन का अर्थ

इटली निवासी लुक्रेजिया अपने पिता के साथ संगम तट पर लगे मेले में न केवल आस्था की डुबकी लगाने पहुंचीं, बल्कि सनातन धर्म को गहराई से समझने की जिज्ञासा भी लेकर आईं। पिता–पुत्री की यह जोड़ी अलग-अलग साधु-संतों के शिविरों में जाती दिखी—कहीं ध्यान की विधि सीखी, तो कहीं जीवन के उद्देश्य पर संवाद किया। एक शिविर में वे पूरे मनोयोग से प्रवचन सुनती रहीं, ध्यान लगाया और “जय श्रीराम” के जयकारे भी लगाए।

लुक्रेजिया का कहना है कि सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। योग, ध्यान और आत्मचिंतन उन्हें विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं, इसलिए वे प्रतिदिन किसी न किसी संत से आध्यात्मिक मार्गदर्शन ले रही हैं।

विदेशी श्रद्धालु ले जा रहे भारत की आध्यात्मिक विरासत

संतों के अनुसार, हर वर्ष माघ मेला और कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और सनातन धर्म के सिद्धांतों, साधना पद्धतियों तथा जीवन मूल्यों को समझते हैं। लौटते समय वे अपने देशों में भारत की आध्यात्मिक परंपराओं का संदेश लेकर जाते हैं।

लुक्रेजिया और उनके पिता के लिए यह यात्रा धार्मिक भ्रमण के साथ आत्मिक अनुभव भी है। उनका कहना है कि यहां उन्हें शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण मिला है। इटली लौटकर वे अपने मित्रों और परिवार को सनातन धर्म की आध्यात्मिकता और मूल्यों से अवगत कराएंगे। मेले में जब विदेशी युवती “जय श्रीराम” और “सनातन धर्म की जय” का उद्घोष करती दिखीं, तो आसपास मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते नजर आए।

माघ मेला 2026: प्रमुख तिथियां

संगम तट पर 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले की शुरुआत 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा से हुई। प्रशासन के अनुसार अब तक लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके हैं। आगामी प्रमुख स्नान तिथियां—

मकर संक्रांति: 14 जनवरी
मौनी अमावस्या: 18 जनवरी
बसंत पंचमी: 23 जनवरी
माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी
महाशिवरात्रि (समापन): 15 फरवरी

सुरक्षा और व्यवस्थाएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेला क्षेत्र में सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार 1,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। भीड़ प्रबंधन के लिए जल पुलिस, वॉच टावर और आधुनिक उपकरण तैनात हैं।

भजन-कीर्तन और शंखनाद से गूंजते मेला क्षेत्र में अखाड़ों के साधु-संतों और कल्पवासियों की मौजूदगी ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया है। पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर करीब 22 लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बाद मकर संक्रांति पर इससे भी अधिक भीड़ की संभावना जताई जा रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh