घर खरीदारों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने माना है कि बिना ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (OC) के बिल्डर, खरीदारों से मेंटीनेंस चार्ज नहीं मांग सकते। इस फैसले के बाद उन घरीदारों को राहत रहेगी, जिन्हें बिना ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के अपने फ्लैट का पजेशन लेने के लिए और उसमें रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इसकी वजह बिल्डरों की ओर से प्राधिकरण से सभी मंजूरी प्राप्त करने में होने वाली देरी होती है।
NCDRC ने कहा कि बिल्डर द्वारा सिविक अथॉरिटी से ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिए जाने के बाद ही होमबायर्स अपने फ्लैटों के लिए रखरखाव शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे। यह भी कहा कि ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के बिना बिल्डरों द्वारा इसकी मांग करना उचित नहीं है, भले ही फ्लैट खरीदार पजेशन लेने के बाद अपने फ्लैटों में रहने लगें। आगे कहा कि यदि बिल्डर ओसी प्राप्त करने में विफल रहता है तो इसका मतलब है कि परियोजना अभी पूरी तरह से पूरी नहीं हुई है और यदि फ्लैट, खरीदारों को सौंप दिया जाता है तो इसे केवल कागजी कब्जा माना जाएगा।
15 होमबायर्स ने डाली थी याचिका
एनसीडीआरसी ने बेंगलुरु के 15 होमबायर्स के एक बैच की याचिका को अनुमति दी थी, जिन्हें एक बिल्डर ने बिना ओसी के अपने फ्लैटों का पजेशन लेने के बाद रखरखाव शुल्क का भुगतान करने के लिए मजबूर किया था। उनके वकील चंद्रचूर भट्टाचार्य ने एसएम कानिटकर और बिनॉय कुमार की पीठ के समक्ष दलील दी कि खरीदारों को उन फ्लैटों का कब्जा लेने के दौरान दो साल का रखरखाव एडवांस में भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया था, जिसके लिए बिल्डर छह साल की देरी के बावजूद ओसी प्राप्त करने में विफल रहा।
बिल्डर ने क्या दिया तर्क
घर खरीदारों की याचिका का विरोध करते हुए बिल्डर वीडीबी व्हाइटफील्ड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने तर्क दिया कि रखरखाव शुल्क इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि वह, अपने फ्लैट में शिफ्ट हो चुके लोगों को सभी सुविधाएं प्रदान कर रहा है। बिल्डर ने कहा कि परियोजना में देरी कोविड -19 महामारी के कारण हुई थी और ये खरीदार ही थे, जिन्होंने बिल्डर को ओसी के बिना अपनी यूनिट्स का फिजिकल पजेशन देने के लिए मजबूर किया था। हालांकि एनसीडीआरसी बिल्डरों के सबमिशन से आश्वस्त नहीं था और हाल ही में जनवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले और आयोग के पहले के फैसले पर भरोसा करके घर खरीदारों की याचिका को अनुमति दी थी।
आयोग ने कहा कि ‘रखरखाव शुल्क के मुद्दे के संबंध में, यह एक तथ्य है कि शिकायतकर्ताओं ने अपनी संबंधित यूनिट्स का भौतिक कब्जा ले लिया है। यह तर्कसंगत होगा कि कुछ सामान्य सेवाओं के रखरखाव पर खर्च होगा। यह भी एक तथ्य है कि अभी तक ओसी प्राप्त नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि परियोजना अभी पूरी तरह से पूरी नहीं हुई है और वादा की गई सभी सेवाएं प्रदान नहीं की जा रही हैं। ओसी प्राप्त करने से पहले कोई रखरखाव शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए।’
-एजेंसियां
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