GSTAT की कार्यवाही का सजीव अनुभव: टैक्सेशन बार एसोसिएशन, आगरा के मूट कोर्ट में अधिवक्ताओं ने सीखी प्रभावी पैरवी की बारीकियां
आगरा। टैक्सेशन बार एसोसिएशन, आगरा के 58वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित विशेष GST मूट कोर्ट ने अधिवक्ताओं को GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव कराया। वास्तविक अपीलों पर आधारित बहस, न्यायिक सदस्यों की उपस्थिति और विशेषज्ञ अधिवक्ताओं की प्रभावशाली पैरवी ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं अत्यंत उपयोगी बना दिया।
58वें स्थापना दिवस के अंतर्गत हुआ विशेष आयोजन
टैक्सेशन बार एसोसिएशन, आगरा के 58वें स्थापना दिवस समारोह के द्वितीय तकनीकी सत्र के अंतर्गत रविवार को होटल क्लार्क शिराज में GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के संबंध में विशेष “मूट कोर्ट” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिवक्ताओं को GSTAT के समक्ष अपील की सुनवाई की प्रक्रिया से अवगत कराना तथा उस पर व्यावहारिक चर्चा करना था।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ संघ के अध्यक्ष श्री राज किशोर खंडेलवाल जी, स्वागत अध्यक्ष श्री अनिल वर्मा जी, कार्यक्रम संयोजक श्री राम मोहन सिंह कोटिया जी एवं GSTAT कार्यक्रम के चेयरमैन श्री रजनीकांत वर्मा जी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
गरिमापूर्ण संचालन
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री संजीव वशिष्ठ ने किया।
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में GSTAT के अध्यक्ष श्री रजनीकांत वर्मा जी, न्यायिक सदस्य श्री सुभाष चंद अग्रवाल जी एवं तकनीकी सदस्य श्री राकेश बाबू गर्ग जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वास्तविक अपीलों पर हुई बहस
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रूप किशोर अग्रवाल जी ने अपीलार्थी पक्ष तथा वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता श्री सतीश चंद बंसल जी ने विभागीय पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। धारा 129(3), 125, 73, 74 एवं 74(9) से जुड़े मामलों पर प्रभावशाली बहस हुई।
इन प्रमुख मामलों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में 19 जुलाई 2026 को GSTAT आगरा बेंच के समक्ष सूचीबद्ध प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अपीलार्थी पक्ष से श्री रूप किशोर अग्रवाल, श्री निखिल अग्रवाल, श्री रवि कुमार, श्री मनीष अग्रवाल, श्री अंकित अग्रवाल, श्री संजय भटनागर, श्री पीयूष खंडेलवाल, श्री गगन बघेल एवं श्री यशस्वी अग्रवाल सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।
विभागीय पक्ष से श्री मुकेश खंडेलवाल, श्री मुनील अग्रवाल, श्रीमती कल्पना पांडे, श्रीमती संचिता अग्रवाल, श्री अभिषेक बंसल एवं श्री मनु कुलश्रेष्ठ सहित विभागीय प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

पेश रजिस्टर ने रखा सभी मामलों का विवरण
विभाग की ओर से पेश रजिस्टर श्रीमती मधुर अग्रवाल जी ने सभी मामलों को मूट बेंच के समक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान उठने वाले कानूनी एवं तकनीकी मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया।
अध्यक्ष ने बताई आयोजन की उपयोगिता
इस अवसर पर टैक्सेशन बार के अध्यक्ष श्री राज किशोर खंडेलवाल जी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से अधिवक्ताओं को GSTAT की कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिलेगी तथा वे भविष्य में अपने मामलों की अधिक प्रभावी ढंग से पैरवी कर सकेंगे।
धन्यवाद ज्ञापन
महासचिव श्री अखिलेश भटनागर ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के लिए हाई-टी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के उपरांत धन्यवाद ज्ञापन GST उपाध्यक्ष श्री पी. सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की रही उल्लेखनीय उपस्थिति
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्तागण श्री सतीश चंद गुप्ता जी, श्री राजकुमार गोयल जी, श्री राज रंजन बंसल जी, श्री मनोज शर्मा जी, श्री सुनील शर्मा जी, श्री अभिनव बंसल जी, श्री रोहित अग्रवाल जी, श्री शांतनु बंसल जी, श्री सुनील आनंद जी, श्री आर.पी. दीक्षित जी, श्री सुमेंद्र जैन जी, श्री वैभव जैन जी, श्री अब्दुल अख्तर खान जी, श्री मोहित अग्रवाल जी, श्री राकेश सारस्वत जी, श्री अनुराग गुप्ता जी, श्री कृष्ण मुरारी अग्रवाल जी एवं श्री अक्षय कुलश्रेष्ठ जी सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
संपादकीय
मूट कोर्ट—बेहतर अधिवक्ता और मजबूत न्याय व्यवस्था की प्रयोगशाला
मूट कोर्ट केवल एक अभ्यास कार्यक्रम नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के व्यावसायिक कौशल को निखारने का प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से अधिवक्ता न्यायालय जैसी वास्तविक परिस्थितियों में अपने तर्क प्रस्तुत करने, कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करने तथा न्यायाधीशों के प्रश्नों का उत्तर देने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं। इससे उनकी शोध क्षमता, आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण शैली और न्यायिक प्रक्रिया की समझ में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
विशेष रूप से GST जैसे जटिल कानूनों में इस प्रकार के मूट कोर्ट अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं, क्योंकि बदलते कानूनी प्रावधानों और न्यायिक दृष्टांतों के बीच अधिवक्ताओं को निरंतर अद्यतन रहने की आवश्यकता होती है। ऐसे आयोजन न केवल अधिवक्ताओं को दक्ष बनाते हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने में योगदान देते हैं।
टैक्सेशन बार एसोसिएशन, आगरा इस अभिनव पहल के लिए निश्चित रूप से बधाई का पात्र है। अपने स्थापना दिवस को केवल औपचारिक समारोह तक सीमित न रखकर उसे ज्ञान, प्रशिक्षण और व्यावहारिक विधिक शिक्षा का मंच बनाना संगठन की दूरदर्शिता का परिचायक है। यदि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं तो आगरा के कर अधिवक्ताओं की पेशेवर दक्षता राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान स्थापित कर सकती है।
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