इनफर्टिलिटी के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा ने बताया कि आजकल इनफर्टिलिटी की समस्या बहुत से कारणों से बढ़ रही है जिसमे प्रमुख है : लोगों की बदलती जीवनशैली, खानपान और बढ़ती उम्र। आधुनिक समाज में हर महिला अपने भविष्य और करियर को लेकर बहुत जागरूक हो गयी है ऐसे में कई बार शादियों में देर हो जाती है और फिर उम्र बढ़ने के कारण उन्हें गर्भधारण में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग निरंतर गर्भधारण के प्रयास में लगे रहते हैं लेकिन उनका यह प्रयास विफल हो जाता है। जिनको ट्यूब्स में ब्लॉकेज न हो, एग क्वालिटी में ठीक हो, ओवरी अच्छे से कार्य करती हो, फिर भी अगर वह कन्सीव नहीं कर पाती है तो इसका मतलब आपको अपने फर्टाइल डेज के बारे में पता नहीं है। एक बार जब आप अपने ओवुलेशन के दिनों के बारे में जान जाते हैं तो आपके लिए गर्भधारण आसान हो जाता है।
ओवुलेशन कब होता है?
किसी महिला का ओवुलेशन कब होता है इसका पता चलता है उनके शरीर में फॉलिकल स्टिमुलेटिन हॉर्मोन के स्तर से। यह एक ऐसा हॉर्मोन है जो महिला के एग को मैच्योर होने में सहायता करता है। जब अंडे मैच्योर हो जाते हैं तो शरीर में एलएच का स्तर बढ़ जाता है और यह बढ़ा हुआ स्तर इस बात की ओर संकेत करता है कि अगले 28 से 36 घंटों के बाद आपका ओवुलेशन शुरू हो सकता है।
फर्टाइल डेज ट्रैक करने का तरीका :
फर्टाइल दिनों की जानकारी एकत्रित करने के लिए आपको पहले अपने पीरियड्स साइकिल को समझना होगा। आप एक कैलेंडर पर अपने इस पीरियड्स के पहले दिन से लेकर अगले महिने होने वाले पीरियड्स के पहले दिन को मार्क कर लें और इनके बिच में कितने दिन हैं उसकी गिनती कर लें। ऐसा करने से आप अपने मासिक चक्र को जानने में सक्षम हो पाएंगी। अगर आपका मासिक चक्र 30 दिनों का होता है तो उनका ओवुलेशन पीरियड 15वें दिन के आस पास होता है। ऐसी स्थिति में आप ओवुलेशन से 2-3 दिन पहले से अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाना शुरू कर दें जिससे गर्भधारण की सम्भावना बढ़ जाती है।
एक बार महिला के फॉलोपियन ट्यूब में जाने के बाद स्पर्म 5 दिनों तक जीवित रहता है जबकि महिला का एग एक बार अंडाशय से रिलीज होता है तो उसके बाद 24 घंटे तक जीवित रहता है अगर इस बिच में दोनों आपस में संपर्क में आते हैं और एग फर्टिलाइज़ हो जाता है तो वह महिला माँ बन सकती है।
इसलिए एक्सपर्ट्स यह सलाह देते हैं कि आप ओवुलेशन के दिनों को ट्रैक करें और उसी के अनुसार प्रेगनेंसी प्लान करें। इससे आपके लिए कन्सीव करना आसान हो जायेगा और बार बार के प्रयास से छुटकारा मिल जायेगा। ओवुलेशन के दौरान जो अंडा ओवरी से बाहर आता है वह फर्टिलाइज़ेशन के लिए बिलकुल तैयार होता है। आप अपने फर्टाइल दिनों की जांच के लिए ओवुलेशन किट का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।
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