पूज्य मातृस्मृति में अन्न सेवा का आयोजन
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat
आगरा। वैदिक सूत्रम संस्थापिका योग-गुरु श्रीमती दिनेशवती गौतम की पुण्यतिथि
पर पितृ पक्ष की त्रयोदशी (19 सितम्बर 2025) को जिला न्यायालय परिसर में विशेष आयोजन सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर ‘दीवानी अन्न सेवा’ का आयोजन वैदिक सूत्रम चेयरमैन व ज्योतिषाचार्य
पं. प्रमोद गौतम द्वारा उनकी माताजी की स्मृति में किया गया।
निःशुल्क अन्न सेवा – मातृ श्रद्धांजलि
पं. प्रमोद गौतम ने बताया कि यह अन्न सेवा उनकी माताजी की पुण्यतिथि पर
समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण की सच्ची अभिव्यक्ति है।
इस सेवा में छोले-भटूरे, चावल, सूजी का हलवा और मिर्च का अचार परोसा गया।
दोपहर 1 बजे से ढाई बजे तक लगभग 300 से अधिक लोगों ने इस अन्न सेवा का लाभ उठाया,
जिनमें जिला न्यायालय के अधिवक्ता, पूर्व न्यायाधीश, कर्मचारी तथा आम नागरिक शामिल रहे।
मानवीय पहल का प्रेरक इतिहास
पं. प्रमोद गौतम ने अवगत कराया कि आगरा के दीवानी न्यायालय परिसर में
1 सितम्बर 2025 से आरंभ हुई यह अन्न सेवा एक अनोखी मानवीय पहल है।
यह पहल दिवंगत श्री प्रीतम चंद जैन जी की पुण्य स्मृति में उनकी धर्मपत्नी
श्रीमती सुदेश कुमारी जैन जी की प्रेरणा से प्रारंभ हुई।
इस सेवा को सफल बनाने में उनके पुत्र विवेक कुमार जैन (वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता) की सक्रिय भूमिका रही।
सहयोग और समर्पण की मिसाल
इस सेवा को साकार रूप देने में प्रसादम संस्था, ओसवाल फाउंडेशन और नवकार फाउंडेशन का विशेष योगदान रहा।
दीवानी परिसर के गेट नंबर चार स्थित विमल कॉम्प्लेक्स (पुराना नटराज टॉकीज) पर प्रतिदिन
दोपहर 1:00 से 2:30 बजे तक लगभग 250 से 300 व्यक्ति अन्न सेवा का लाभ उठा रहे हैं।
सिर्फ 5 रुपये सुविधा शुल्क पर दी जा रही यह सेवा न्याय की चौखट पर
मानवता और सहयोग का अद्भुत संगम बनकर उभरी है।
संपादकीय
पं. प्रमोद गौतम का यह प्रयास केवल एक धार्मिक या सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि
जीवित समाज-चेतना का प्रमाण है।
उन्होंने मातृ स्मृति को केवल पूजा और अनुष्ठान तक सीमित न रखकर उसे
मानवता की सेवा में परिणत किया।
आज जब समाज में स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा का शोर अधिक है, ऐसे में न्यायालय जैसी गंभीर जगह पर
निःशुल्क अन्न सेवा का आयोजन ‘न्याय और करुणा’ के अद्भुत संगम की झलक देता है।
पं. प्रमोद गौतम न केवल समाजसेवा की परंपरा को जीवित रख रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी दे रहे हैं कि पुण्य स्मृति का सबसे बड़ा उत्सव ‘सेवा’ है।
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