New Delhi, Capital of India. हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करते हैं तो पहला गांव पड़ता है सिंघु गांव (Singhu Village)। इसे सिंधु गांव भी कहते हैं। मूल नाम सिंघु है लेकिन अपभ्रंश होकर सिंधु हो रहा है। कोई इसे Singhu Border तो कोई Sindhu border लिख रहा है। खैर, जिसकी जैसी मर्जी। सिंधु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसान जमे हुए हैं। इनमें अधिसंख्य हरियाणा के हैं। गणतंत्र दिवस पर किसानों ने जो हिंसा की, उसके बाद सिंधु बॉर्डर के किसान आहत हैं। उन्होँने सिंघु बॉर्डर खाली करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। यह किसानों के सामने नई मुसीबत है।
‘तिरंगे का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ नारा लगाते कुछ लोग गुरुवार को सिंघु बॉर्डर पहुंचे। उनके हाथों में भी यही नारा लिखे बैनर थे। गांव के दीपांशु पाल ने कहा, “सारा रास्ता घेर रखा है और खेतों में से भी जा रहे हैं। हमारा ये कहना है कि सिंघु बॉर्डर को खाली करें।” किसान पिछले दो महीने से भी ज्यादा वक्त से सिंघु बॉर्डर समेत दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं। हालांकि मंगलवार की घटना के बाद चिल्ला बॉर्डर से धरना खत्म कर दिया गया है। गाजीपुर बॉर्डर पर भी टेंट लगभग उखड़ चुके हैं। किसान ने कहा- ”हम तिरंगे का अपमान नहीं सहेंगे। काफी वक्त हो गया, अब सिंघु बॉर्डर खाली होना चाहिए, हमें इस दौरान बहुत दिक्कत हुई है।”
भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति ने गुरुवार को अपना धरना खत्म करने की घोषणा की। वह पिछले 58 दिनों से दलित प्रेरणा स्थल पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके अलावा, भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने भी बुधवार को चिल्ला बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन को समाप्त कर दिया था। दोनों किसान संगठनों ने दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद अपने संगठनों को प्रदर्शन से अलग कर लिया है। गाजीपुर बॉर्डर पर जहां पहले सैंकड़ों किसान मौजूद थे, वहीं गुरुवार सुबह यहां न के बराबर किसान दिखाई दिए। किसानों के लगाए गए टेंट उखड़ने लगे हैं। आंदोलनकारी किसान भी ट्रैक्टर लेकर वापस लौट रहे है। किसान 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उपवास रखेंगे।
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