क्या ज्ञानवापी की तरह धार भोजशाला में भी स्वतंत्रतापूर्वक पूजा हो सकेगी! इस पर चर्चा फिर तेज हो गई है। दरअसल, धार मामले में इंदौर हाईकोर्ट में कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। कोर्ट में हिंदू पक्ष ने धार भोजशाला का सर्वे कराने की मांग की है जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। हालांकि मामले में कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया है।
हाईकोर्ट में इस मामले में करीब सात याचिकाएं हैं। इंदौर हाईकोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट में चल रह केस की लिखित और विस्तारपूर्वक जानकारी देने को भी कहा है।
इंदौर हाईकोर्ट में धार भोजशाला के सर्वे की मांग वाली याचिका पर सोमवार को बहस पूरी हो गई। अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है। कोर्ट में सोमवार को इस केस पर एक घंटे तक सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष ने याचिका में धार भोजशाला की पुरातत्व विभाग से सर्वे कराने की मांग की है।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की जोरदार बहस हुई। बहस में अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना पर इस केस में आदेश सुरक्षित रख लिया।
पुरातत्व विभाग ने करीब सवा सौ पहले धार भोजशाला का सर्वे किया था। इस आधार पर विभाग नए सर्वे को नकार रहा है। मुस्लिम पक्ष भी नए सर्वे का विरोध कर रहा है। दरअसल 1902-03 के पुरातत्व विभाग के सर्वे के आधार पर ही यहां 2003 में मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज करने की मंजूरी दी गई है।
धार भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से कई अलग-अलग याचिकाएं अलग-अलग कोर्ट में लगाई जा चुकी हैं जिनके संबंध में कई आदेश भी जारी किए गए हैं। सोमवार को हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष से धार भोजशाला के संबंध में कोर्ट द्वारा जारी किए सभी आदेशों की जानकारी देने को कहा।
धार भोजशाला को हिंदू पक्ष मंदिर बताता है जबकि मुस्लिम भी इस पर अपना अधिकार जताते हैं। पुरातत्व विभाग के पुराने सर्वे के आधार पर 2003 में एक आदेश जारी किया गया जिसमें शुक्रवार को यहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। अभी तक यह आदेश प्रभावी है।
हिंदू पक्ष ने धार भोजशाला पर अपना अधिकार जताते हुए कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की हैं। अब इंदौर हाईकोर्ट में ज्ञानवापी की ही तरह धार भोजशाला का भी नए सिरे से सर्वे कराने की मांग की गई है।
-एजेंसी
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