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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. आगरा की मस्जिद नहर वाली, सिकंदरा के इमाम मुहम्मद इक़बाल ने जुमा के ख़ुत्बे में वर्तमान हालात को युद्ध जैसे बताया और इस संकट की घड़ी में लोगों को संयम और समझदारी से पेश आने की सलाह दी। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि भारत की 140 करोड़ आबादी में 25 करोड़ मुसलमान हैं, जो पूरी तरह देश के साथ खड़े हैं।
निर्दोषों की हत्या किसी धर्म में स्वीकार्य नहीं
इमाम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी निर्दोष की हत्या को इस्लाम समेत कोई भी धर्म जायज़ नहीं ठहराता। इस्लाम में तो एक बेगुनाह की हत्या को पूरी मानवता की हत्या माना गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो कुछ निर्दोषों के साथ हुआ है, उसका जवाब अवश्य दिया जाएगा, लेकिन यह जवाब व्यवस्था और परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए।
युद्ध की कामना नहीं, पर आवश्यकता होने पर दृढ़ प्रतिकार
Muhammad इक़बाल साहब ने कहा कि युद्ध की इच्छा नहीं की जानी चाहिए, लेकिन अगर युद्ध अनिवार्य हो जाए, तो फिर पूरी ताक़त से जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी कीमत पर हिम्मत न हारें और अपनी एकता व साहस का परिचय दें।
अफवाहों से बचना और सूचना की जांच अनिवार्य
इस संवेदनशील समय में अफ़वाहों के खतरे को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी संदेश बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएं। क़ुरआन की शिक्षाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना अनिवार्य है। यह समय अत्यधिक सतर्क रहने का है।
सरकारी निर्देशों का पालन और सामाजिक ज़िम्मेदारी
इमाम ने कहा कि सरकार की ओर से जो भी निर्देश जारी किए जा रहे हैं, उनका पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। डर और खौफ का वातावरण न बनाएं, और किसी भी गैर-ज़रूरी विषय पर प्रतिक्रिया देने से बचें। यह समय समझदारी और शांति बनाए रखने का है।
धैर्य, संयम और दुआ का रास्ता
उन्होंने अंत में कहा कि हमें कोई ऐसा क़दम नहीं उठाना चाहिए जिससे समाज या देश को नुकसान पहुंचे। सबसे ज़रूरी है कि हम धैर्य, संयम और अपनी धार्मिक शिक्षाओं के साथ आगे बढ़ें। अपने देश की शांति और सुरक्षा के लिए दुआ करें और अल्लाह से सभी के लिए हिफाज़त की कामना करें। उन्होंने अपनी बात “आमीन” कहकर पूरी की।
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