गीता के पुरोधा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर गीता जयन्ती महोत्सव

गीता के पुरोधा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर गीता जयन्ती महोत्सव

RELIGION/ CULTURE

वृन्दावन शोध संस्थान में गीता जंयती मनाई गई 89 विद्यार्थियों ने किया गीता के श्लोकों का सस्वर वाचन

 

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Mathura, Uttar Pradesh, India. गीता जयन्ती महोत्सव के अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान, व उत्तर प्रदेश ब्रजतीर्थ विकास परिषद् एवं गीता शोध संस्थान, वृन्दावन के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गीता के पुरोधा भगवान श्रीकृष्ण की पुण्य जन्मभूमि पर आयोजित किया गया।

 

कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वस्ति वाचन, दीप प्रज्जवलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाग गीता के मूर्धन्य विद्वान श्री धीरेन्द्र शास्त्री जी ने श्रीमद्भगवत गीता के तत्व ज्ञान पर सुन्दर व्यख्यान प्रस्तुत किए। उन्होंने वर्तमान परिस्थतियों में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य अमृतवाणी श्रीमद्भागवत गीता की उपयोगिता को परिभाषित करते हुए कहा कि कर्म का फल वैराग्य होता है। यदि जीवन में धर्म का आकर्षण कम हो तो गीता में 700 श्लोक और 18 अध्याय हैं। गीता के पहले छः अध्याय कर्म की प्रधानता को परिभाषित करते हैं।

दूसरे छः अध्याय में भक्ति को परिभाषित करते हुए शेष छः अध्याय को ज्ञान में परिभाषित करते हैं। उन्होंने कहा कि गीता में कहा गया है कि कर्म और विचार भक्ति से प्रेरित होनी चाहिए। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान की अपनी एक महिमा है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने इस धराधाम में जन्म लेकर मनुष्य को महाभारत के युद्ध में गीता का सार समझाया था। गीता एक योग शास्त्र है, योग का मतलब योगा नहीं, योग का उद्देश्य चरम लक्ष्य की प्राप्ति है। मन को ईश्वर से जोड़ने का काम भी योग है। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में यही चेतना जागृत की है। गीता की संस्कृत कोई ज्यादा कठिन नहीं है। यदि अशुद्ध भी उच्चारण होगा तो भी धर्म का प्रयोजन सफल होगा।

श्रीमद् गीता के व्याख्यान के उपरान्त ब्रज के सुप्रसिद्ध ख्याल-लावनी गायक वीरेन्द्र कश्यप और सम्पतलाल श्रीमद्भगवत गीता के ऊपर विशिष्टिता से तैयार की गयी लावनी का गायन प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश खण्डेलवाल, सुप्रसिद्ध व्रज भाषा के कवि अशोक अज्ञ, जिला पर्यटन अधिकारी डी. के. शर्मा, उत्तर प्रदेश ब्रजतीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेशचन्द्र शर्मा, पत्रकार सुनील शर्मा, गीता शोध संस्थान के चन्द्रप्रताप सिंह सिकरवार, उप मुख्य अधिशाषी अनुराग पाठक, प्रभारी जनसंपर्क विजय बहादुर सिंह एवं पी0 के0 वार्ष्णेय आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

वृन्दावन शोध संस्थान में गीता जंयती मनाई गई
गीता के माध्यम से हम आध्यात्मिक ज्ञान तो अर्जित करते ही हैं, इसके साथ ही हमारे जीवन में आने वाले प्रत्येक उतार चढ़ावों को सरलता से सहने का आत्मबल भी प्राप्त करते हैं। गीता न केवल प्रौढ़ मनुष्यों में सात्विक ऊर्जा का संचार करती है, बल्कि यह बच्चों के लिए भी उतनी ही उपयोगी है। विद्यार्थियों के लिए गीता का ज्ञान किसी शिक्षक से कम नहीं है जो उन्हें उनके वांछित क्षेत्र में सरलता के साथ पदार्पण करने की राह दिखलाता है। ये विचार संत श्री गोविन्दानन्द तीर्थ ने वृन्दावन शोध संस्थान द्वारा गीता जयंती पर आयोजित ‘सस्वर श्लोक वाचन प्रतियोगिता’ में प्रतिभागी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए व्यक्त किए।

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वृन्दावन शोध संस्थान द्वारा गीता जयंती पर आयोजित ‘सस्वर श्लोक वाचन प्रतियोगिता’ में प्रतिभागी

डॉ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने कहा कि गीता एक सार्वभौम ग्रन्थ है जो सभी वर्गों के लिए अनुकरणीय है, गीता मानव मात्र को जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीकृष्ण ने गीता के अन्तर्गत भक्ति, ज्ञान एवं कर्मयोग की विशद विवेचना करते हुए कर्म योग को सर्वोपरि बताया है। संस्थान के उप-निदेशक डॉ0 एस0पी0सिंह ने कहा कि गीता के ज्ञान में जो गहराई है वह विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त लाभप्रद है और उनके लिए सदैव मार्गदर्शन का काम करती है।
प्रतियोगिता में श्रीमद्भगवद गीता के श्लोकों का सस्वर वाचन हेतु स्थानीय 09 विद्यालयों के 89 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रत्येक विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार संस्थान के प्रशासनाधिकारी रजत शुक्ला द्वारा प्रदान किया गया। परमेश्वरी देवी धानुका विद्या मंदिर के भारत गहलौत ने प्रथम, लवकुश शर्मा ने द्वितीय एवं बालमुकुन्द शुक्ल ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। हनुमान प्रसाद धानुका बालिका विद्यामंदिर की कृष्णप्रिया वर्मा ने प्रथम, वृन्दा मंजरी ने द्वितीय एवं किशोरी शर्मा ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। श्रीरामकृष्ण विवेकानंद जूनियर हाईस्कूल के अविष्कार माने ने प्रथम, ज्योति मण्डल ने द्वितीय एवं प्रियंका सैनी ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। ज्ञान दर्शन आदर्श विद्या मंदिर की इन्दु गौतम प्रथम, मुस्कान द्विवेदी द्वितीय एवं ध्रुव रस्तोगी तृतीय रहे। शान्ता पद्म शिक्षा मंदिर के एल0के0जी0 के छात्र भरत शुक्ल  प्रथम, अफजल अब्बासी द्वितीय एवं राघव शर्मा तृतीय रहे। सी0के0 पब्लिक स्कूल की अविका शर्मा प्रथम, निशान्त द्वितीय एवं नूतन कृष्ण तृतीय रहे। सुखदा शिक्षा मंदिर स्कूल की प्राची शर्मा प्रथम, गीतांजलि द्वितीय एवं खुशी सारस्वत तृतीय रहीं। सत्यादेवी गर्ग सरस्वती शिशु मंदिर, कैलाश नगर, वृन्दावन की ताशी प्रथम, राधिका उपाध्याय द्वितीय एवं राघव कटारा तृतीय रहे। भक्ति वेदान्त गुरूकुल इण्टरनेशनल स्कूल के ओजस गर्ग ने विशिष्ट स्थान प्राप्त किया। शेष सभी विद्यार्थियों को सान्त्वना पुरस्कार दिया गया।
इस अवसर पर दादरी के श्री पीयूष गोयल ने दर्पण छवि में स्वलिखित गीता संस्थान को भेंट की जिसे सभी विद्यार्थियों को अवलोकित कराया गया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती ममता गौतम ने श्रीमद्भगवद गीता को एक आदर्श ग्रन्थ बताते हुए सभी विद्यार्थियों का आहवाहन किया कि गीता के श्लोकों का पाठ प्रतिदिन अवश्य करें। कार्यक्रम का संचालन करवेन्द्र सिंह ने किया।

कार्यक्रम में गोपाल शरण शर्मा, विनीत द्विवेदी, संगीता तनेजा, प्रभाकर ठाकुर, किरन गर्ग आदि के साथ ही संस्थान कर्मी उमाशंकर पुरोहित, हेमंत कुमार, शिवम शुक्ला, डॉ. राजेश शर्मा, कृष्ण कुमार मिश्रा, भगवती प्रसाद, ब्रजेश कुमार, श्रीकृष्ण गौतम, जुगल शर्मा, राजकुमार शुक्ला, विनोद झा, रमेश चन्द्र, गोपाल शर्मा, अशोक दीक्षित, गोपनन्दन झा आदि उपस्थित रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh

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