ब्रज का सितारा अब लंदन में चमकेगा: जीएलए मथुरा के रौनक उपमन्यु करेंगे बैरिस्टर की पढ़ाई
जीएलए के प्रतिभाशाली विधि छात्र रौनक उपमन्यु गुरुवार को बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए लंदन रवाना होंगे
क्यून मैरी लॉ यूनिवर्सिटी में मिला अध्ययन का अवसर
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय संस्थान के विधि संकाय के प्रतिभाशाली छात्र रहे रौनक उपमन्यु की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें लंदन की क्यून मैरी लॉ यूनिवर्सिटी में बैरिस्टर (एलएमएम) की शिक्षा अर्जित करने का अवसर मिला है, जहां उनकी पढ़ाई एवं अन्य खर्चे जीएलए यूनिवर्सिटी संस्थान वहन करेगा। छात्र बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए गुरुवार को लंदन के लिए रवाना होंगे।
596 डिबेट में भागीदारी, 312 प्रथम पुरस्कार
विदित रहे कि जीएलए के विधि छात्र रहे एडवोकेट रौनक उपमन्यु ने मून एवं यूथ पार्लियामेंट की 596 डिबेटो में भाग लिया और 312 प्रथम पुरस्कार हासिल कर देश भर में इतिहास रचा है तथा इस वर्ष ऑल इंडिया बार काउंसिल का भी पहली बार में ही टेस्ट पास कर लिया है।
राष्ट्रीय स्तर पर जीएलए की विधि शिक्षा की छाप
राष्ट्रीय स्तर पर भी जीएलए की श्रेष्ठ विधि शिक्षा, प्रशिक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता की ऐसी छाप छोड़ी है, जो एक मिसाल बनी है। छात्र ने अब तक देशभर के प्रतिष्ठित आईआईटी दिल्ली में पांचवीं बार लगातार एमयूएन जीत कर श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की युवा संसद में भी शानदार जीत
विदित रहे कि इसी सप्ताह रौनक ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज में भी युवा संसद को जीतकर ब्रज का नाम रोशन किया, आईआईएम और शीर्ष विश्वविद्यालयों में आयोजित 596 बहस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। इनमें वे 235 प्रमुख डिबेट प्रतियोगिताओं में जज भी रहे तथा 21 प्रतियोगिताओं को खुद रौनक उपमन्यु ने ऑर्गेनाइजेशन किया और सैकड़ो प्रतियोगिताओं में बहस करते हुए 312 बार प्रथम स्थान हासिल कर वे देश के पहले ऐसे छात्र-डिबेटर बन गए हैं, जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि न केवल जीएलए विश्वविद्यालय, बल्कि संपूर्ण ब्रज क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
340 प्रतियोगिताओं में भागीदारी, 312 में प्रथम पुरस्कार
छात्र ने 340 प्रतियोगिताओं में भाग लेकर 312 में प्रथम पुरस्कार जीतकर यह सिद्ध किया कि कठिन परिश्रम, तर्कशक्ति और वक्तृत्व कौशल का समन्वय सफलता का वास्तविक आधार है। रौनक उपमन्यु ने देश की कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका भी निभाई।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया सम्मानित
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में आयोजित एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया। इसके अलावा इंदौर इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ, आईआईटी दिल्ली तथा इंडियन नेशनल कांग्रेस द्वारा आयोजित युवा संसद प्रतियोगिता में भी वे प्रथम स्थान पर रहे, जहां उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला एवं सांसद राजीव शुक्ला द्वारा सम्मानित किया गया।
आठ महीने में 58 प्रथम पुरस्कार जीतकर रचा नया कीर्तिमान
इस वर्ष रौनक ने दिल्ली आईआईटी संस्थान, इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय), एमिटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की, दौलत राम कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय), स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय), यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (दिल्ली विश्वविद्यालय), पंजाब विश्वविद्यालय में एबीवीपी के अध्यक्ष गौरव वीर सोहल ने श्री उपमन्यु को विजेता शील्ड प्रदान की, आठ महीने में 58 प्रथम पुरस्कार जीतकर अपनी असाधारण क्षमता सिद्ध की है। इन प्रतियोगिताओं में जीएलए विधि के छात्र की इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि जीएलए विश्वविद्यालय का विधि संकाय न केवल पाठ्यक्रम-आधारित शिक्षा देता है, बल्कि विद्यार्थियों में विश्लेषण क्षमता, तार्किक सोच, बहस-कौशल, संविधानिक समझ और न्यायिक दृष्टि विकसित करने पर विशेष ध्यान देता है। विश्वविद्यालय में नियमित मूट कोर्ट, शोध-आधारित विधि अध्ययन, व्यावहारिक प्रैक्टिस सत्र तथा अनुभवी प्राध्यापकों के मार्गदर्शन ने रौनक जैसे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर चमकने की मजबूत नींव दी है।
कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने बताया प्रतिभा और परिश्रम का परिणाम
जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक विद्यार्थी की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, परिश्रम और जीएलए विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है। रौनक उपमन्यु ने जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तर्कशक्ति, वक्तृत्व कौशल और विधिक समझ का प्रदर्शन किया है, वह निश्चित रूप से अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए जीएलए द्वारा सहयोग प्रदान करना विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए हरसंभव अवसर उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। हमें विश्वास है कि रौनक भविष्य में विधि के क्षेत्र में देश और ब्रज का नाम और अधिक गौरवान्वित करेंगे।
वैश्विक मंच पर प्रतिभा दिखाने का अवसर : कुलपति
कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि रौनक उपमन्यु की उपलब्धियां उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और अद्भुत वक्तृत्व कौशल का परिणाम हैं। लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई का अवसर उनकी प्रतिभा को वैश्विक मंच प्रदान करेगा।
उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : सीएफओ
सीएफओ डॉ. विवेक अग्रवाल ने कहा कि रौनक की उपलब्धि जीएलए के विद्यार्थियों की प्रतिभा और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। लंदन में उनकी उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय का सहयोग उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विधि संकाय के डीन ने दी बधाई
वहीं विधि संकाय के डीन प्रो. सोमेश धमीजा ने रौनक उपमन्यु को बधाई दी।
पत्रकार एवं अधिवक्ता डॉ. कमलकांत उपमन्यु के सुपुत्र हैं रौनक
रौनक उपमन्यु, एनयूजेआई के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट के सुपुत्र हैं।
संपादकीय : प्रतिभा को पंख मिले तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है
रौनक उपमन्यु की उपलब्धि केवल एक छात्र की व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रतिभा, परिश्रम, संस्कार और सही संस्थागत सहयोग के अद्भुत संगम का उदाहरण है। सैकड़ों प्रतियोगिताओं में भाग लेना और उनमें लगातार प्रथम स्थान प्राप्त करना सामान्य उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अध्ययन, आत्मविश्वास, तर्कशक्ति और निरंतर सीखने की भूख दिखाई देती है।
सबसे प्रशंसनीय बात यह है कि रौनक उपमन्यु के पिता डॉ. कमलकांत उपमन्यु ने अपने बेटे की प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर दिया। माता-पिता जब बच्चों की रुचि और क्षमता को समझते हुए उन्हें सही दिशा देते हैं, तो वही प्रतिभा आगे चलकर परिवार, समाज और राष्ट्र की पहचान बनती है। रौनक की उपलब्धियों में उनके परिवार के संस्कार और मार्गदर्शन की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
दूसरी ओर जीएलए विश्वविद्यालय का प्रयास भी विशेष रूप से सराहनीय है। किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को केवल डिग्री देकर विदा कर देना आसान है, लेकिन उसकी क्षमता को पहचानना, उसे राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना और फिर लंदन में उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करना एक दूरदर्शी शैक्षणिक सोच का परिचायक है।
आज शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कर नौकरी प्राप्त करना नहीं रह गया है। आवश्यकता ऐसे युवाओं को तैयार करने की है, जो तर्क कर सकें, प्रश्न पूछ सकें, नेतृत्व कर सकें और वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। रौनक उपमन्यु की यात्रा इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल है।
ब्रज की धरती ने सदैव प्रतिभाओं को जन्म दिया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं को पहचान, प्रोत्साहन और अवसर मिले। रौनक उपमन्यु को लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए जीएलए का सहयोग इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण और अनुकरणीय कदम है।
रौनक अभिमन्यु की बदौलत ब्रज का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हो रहा है। हमारी शुभकामना है कि लंदन की शिक्षा उनके व्यक्तित्व और विधिक ज्ञान को नई ऊंचाइयां दे तथा वे भविष्य में देश, समाज और न्याय व्यवस्था के लिए उल्लेखनीय योगदान करें।
डॉक्टर भानु प्रताप सिंह, संपादक
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