फतेहपुर सीकरी/आगरा: ताजनगरी को प्रदूषण से बचाने के लिए फतेहपुर सीकरी में एक बड़ा रक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधिमंडल ने फतेहपुर सीकरी के प्रबुद्धजनों से मुलाकात कर क्षेत्र की पर्यावरणीय चुनौतियों पर मंथन किया। फतेहपुर सीकरी नगर पालिका सीमा में ‘वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र’ (AQI Station) की स्थापना के बाद, अब इसके डेटा का उपयोग धूल कणों (PM2.5 और PM10) को नियंत्रित करने के लिए किया जाएगा।
रेगिस्तानी धूल का ‘गेटवे’ है फतेहपुर सीकरी
गर्मी शुरू होते ही थार मरुस्थल से आने वाली धूल भरी हवाएं फतेहपुर सीकरी के रास्ते आगरा महानगर और पूरे ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) को अपनी चपेट में ले लेती हैं। नगर पालिका परिषद की श्रीमती शबनम इस्लाम के अनुसार, फतेहपुर सीकरी इन हवाओं का प्रवेश द्वार है। यदि यहीं पर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर धूल को रोकने के उपाय किए जाएं, तो पूरे आगरा मंडल को ‘गंभीर’ श्रेणी के प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
तेरह मोरी बांध: प्रदूषण और जल संकट का समाधान
बैठक में ‘तेरह मोरी बांध’ की मरम्मत और इसे पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया गया। पूर्व चेयरमैन और स्थानीय नेताओं का मानना है कि यदि मानसून के पानी को इस बांध और क्षेत्र के तालाबों में सहेज लिया जाए, तो हवा में नमी बढ़ेगी और धूल के कण अपने आप कम हो जाएंगे। इसके लिए TTZ अथॉरिटी के अध्यक्ष को पत्र भी भेजा गया है।
सिर्फ गंगाजल ही काफी नहीं, भूजल सुधारना होगा
भाजपा नेता धर्म सिंह महुरा और सिविल सोसाइटी के सचिव अनिल शर्मा ने स्पष्ट किया कि पीने के लिए पाइपलाइन से गंगाजल तो आ रहा है, लेकिन खेती और पशुपालन के लिए भूजल का स्तर सुधारना अनिवार्य है। इसके लिए पुराने जलाशयों और बांधों को सुचारू करना एकमात्र समाधान है। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शुक्ला ने भी तकनीकी और संसाधनों के सही नियोजन की वकालत की।
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