आगरा। शहर के सिकंदरा स्थित लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (LIC) कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां की लाइब्रेरी में एक ‘एशियन पाम सिवेट’ (Paradoxurus hermaphroditus) घुस आई। ऑफिस के कर्मचारियों ने सतर्कता दिखाते हुए तुरंत लाइब्रेरी का दरवाजा बंद कर वाइल्डलाइफ SOS की हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर सूचना दी।
टीम की सूझबूझ और सफल रेस्क्यू
सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ SOS आगरा-मथुरा रैपिड रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची। टीम ने देखा कि घबराई हुई मादा सिवेट एक टेबल के नीचे छिपी बैठी थी। विशेषज्ञों ने सावधानीपूर्वक उसे सुरक्षित बाहर निकाला। मेडिकल जांच में पता चला कि उसकी नाक पर हल्की चोट थी, जिसके बाद उसे तुरंत ‘वाइल्डलाइफ SOS ट्रांजिट फैसिलिटी’ ले जाया गया।
इलाज के बाद जंगल में वापसी
ट्रांजिट फैसिलिटी में 24 घंटे की सघन निगरानी और ड्रेसिंग के बाद सिवेट की स्थिति स्थिर हो गई। स्वास्थ्य में सुधार की पुष्टि होने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास (जंगल) में वापस छोड़ दिया गया।
पर्यावरण के लिए क्यों खास है सिवेट?
एशियन पाम सिवेट ‘वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972’ की अनुसूची I के तहत संरक्षित हैं। ये जीव पर्यावरण में बीजों के प्रसार (seed dispersal) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जंगलों को पुनर्जीवित होने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आवासों के घटने और शहरीकरण के कारण ये वन्यजीव अब इंसानी इलाकों में भटकने पर मजबूर हैं।
जिम्मेदारी भरी कार्रवाई से बची जान
वाइल्डलाइफ SOS के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने LIC स्टाफ की प्रशंसा करते हुए कहा, “स्टाफ की त्वरित और जिम्मेदार कार्रवाई के बिना यह रेस्क्यू इतना आसान नहीं होता। लाइब्रेरी को सील करना और सही समय पर सूचना देना एक आदर्श उदाहरण है।” कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स डायरेक्टर बैजू राज एम.वी ने भी इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में शांति और समझदारी ही वन्यजीवों और इंसानों दोनों की सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर है।
- आगरा में ‘स्तनपान कॉर्नर’ का कमाल: शिशु स्वास्थ्य के प्रति बदल रही है दादी-नानी की सोच, खत्म हो रही हैं पुरानी भ्रांतियां - July 15, 2026
- हरियाली के साथ पक्षी संरक्षण का संदेश: लायंस क्लब आगरा प्रयास ने लगाए 100 बोगनविलिया के पौधे, पक्षियों के लिए बांटे दाना-पात्र - July 15, 2026
- विश्व शांति और जनकल्याण के संकल्प के साथ नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का शुभारंभ, नौ दिनों में होगा दुर्गा सप्तशती का 100 बार पाठ - July 15, 2026