अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह व पुस्तक लोकार्पण
ब्रजभाषा काव्य मंच के वार्षिकोत्सव पर बही काव्य की रसधार
अखिल भारतीय साहित्यकार समागम में हिन्दी और ब्रजभाषा को विश्वपटल पर स्थापित करने का लिया संकल्प
100 से अधिक साहित्यकार हुए ‘सरस्वती सम्मान’ से अलंकृत
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषाविज्ञान विद्यापीठ डॉ.भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के तत्वावधान में हिंदी साहित्य व ब्रजभाषा को समर्पित संस्था ‘ब्रजभाषा काव्य मंच’ के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर आयोजित अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह,पुस्तक लोकार्पण एवं कवि सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित ‘डायमंड जुबली हॉल’ में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण एवं वाणी वंदना से हुआ।
ब्रजभाषा काव्य मंच के अध्यक्ष डाॅ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि संस्था हिन्दी साहित्य व ब्रजभाषा के प्रचार-प्रसार को समर्पित रहते हुए नवोदित कवियों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पण भाव से काम कर रही है और इसी क्रम में यह द्वितीय वार्षिकोत्सव मनाया जा रहा है जिसमें पूरे देश के विभिन्न प्रान्तों व शहरों से करीब 150 साहित्यकार भाग ले रहे हैं, जो हिंदी एवं ब्रजभाषा को वैश्विक साहित्य पटल पर स्थापित करने हेतु कृत संकल्पित हैं।
समारोह के विशेष सत्र में डाॅ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि‘ द्वारा संपादित ‘काव्य मंजरी‘ (साझा संकलन) एवं उनके गीत संग्रह ‘सतरंगी गीत’ के साथ कुमार दत्त ‘कुमर’ (पलवल) की कृति ‘दहाड़ 1857 की’ तथा राजकुमारी उपाध्याय के उपन्यास ‘फर्ज-एक प्रेम कहानी’ का भी लोकार्पण हुआ।
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक डाॅ. सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने लोकार्पण करते हुए कहा कि रचना वही अमर होती है जो समाज व देश को जाग्रत करे और जन-जन के मन में बस जाए। उन्होंने जोड़ा कि ‘काव्य मंजरी’ न केवल साझा काव्य संकलन है वरन् यह ब्रजभाषा काव्य मंच के सदस्यों का एक परिचय ग्रंथ भी है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा की पूर्व निदेशक डॉ बीना शर्मा ने ‘सतरंगी गीत’ के संदर्भ में बताया कि 90 गीतों से सजा यह गीत संग्रह डाॅ रामेंद्र शर्मा ‘रवि’ की अनुपम कृति है जिसमें उन्होंने सभी विषयों पर गीत लिखे हैं।

लोकार्पण समारोह में आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह, फिरोजाबाद के गीतकार डॉ रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’, बृज बिहारी लाल बिरजू बीकानेर से मानिक चंद्र सुथार गाजियाबाद से गीता रस्तोगी, प्रतापगढ़ से प्रेम कुमार त्रिपाठी आदि मंचस्थ रहे।
पूरे दिन चला सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन नौ सत्रों में पूर्ण हुआ, प्रत्येक सत्र में 12-12 साहित्यकारों को मंचस्थ कर उनका सम्मान किया गया जिन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए काव्य पाठ किया।
विशिष्ट अतिथियों में विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ लवकुश मिश्रा, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के उप-निदेशक डॉ मुकेश शर्मा, आगरा पब्लिक ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट्स के अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा, ब्राह्मण महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मधु भारद्वाज आदि रहे।
बाहर से पधारने वाले सम्मानित साहित्यकारों में प्रतापगढ़ से प्रेम कुमार त्रिपाठी, गाजियाबाद से गीता रस्तोगी व बाल कवयित्री सानवी त्रिपाठी, बीकानेर से मानिकचंद सुथार, एटा से राजबाला पुंडीर और डॉ. उदयवीर सिंह, कासगंज से रेनू सोलंकी, सादाबाद से जयप्रकाश पचौरी, हाथरस से बीरेंद्र पाठक, कानपुर से डॉ कुसुम सिंह ‘अविचल’, मथुरा से रामेंद्र सिंह ‘बृजवासी’, आचार्य निर्मल, नीरज शास्त्री और रेणु उपाध्याय, शिकोहाबाद से अमर सिंह, फरीदाबाद से कुमार दत्त ‘कुमर’, कुशीनगर से अजय सिंह ‘अजेय’, मैनपुरी से डॉ. ए सी तिवारी, डॉ. संतोष द्विवेदी, बाह से देवनारायण शर्मा, टूंडला से प्रणव कुलश्रेष्ठ आदि प्रमुख रहे।
आगरा के सम्मानित साहित्यकारों में
यादराम सिंह ‘कवि किंकर’, चंद्रशेखर शर्मा, डॉ.असीम आनंद, डॉ. रमेश आनंद, हरीश भदौरिया, आचार्य उमाशंकर, राजकुमार शास्त्री, डॉ.राजीव शर्मा ‘निस्पृह’, अवधेश उपाध्याय, संजय शर्मा, योगेश शर्मा ‘योगी’, हृदयेश कुलश्रेष्ठ, डॉ. अनार सिंह ‘अग्र’, विजय चतुर्वेदी, रामअवतार शर्मा, डॉ.रेखा गौतम, डॉ.अनिता गौतम, रमा वर्मा ‘श्याम’, अलका शर्मा, डॉ. यशोधरा ‘यशो’, डाॅ.केशव शर्मा, डॉ.राजेंद्र दवे, राज फौजदार, राकेश निर्मल, रामकथा मर्मज्ञ योगेश चंद्र शर्मा, अशोक गोयल, संजय कुमार, राजकुमारी उपाध्याय, प्रभुदत्त उपाध्याय, विजया तिवारी, वंदना तिवारी, मोहिनी भटनागर, वीणा अब्राहम, प्रवेश अकेला, शरद गुप्ता ‘शरद’, संजय गुप्ता, कामेश मिश्रा ‘सनसनी’, प्रकाश गुप्ता ‘बेवाक’, परमानंद शर्मा, सुनीता चौहान, आदि प्रमुख रहे।
अन्य गणमान्य लोगों में सुनील शर्मा (एसबीआई), निष्कर्ष शर्मा (एचडीएफसी), शैलेंद्र शर्मा (सी टीवी), राजेंद्र शर्मा (सेंट जाॅन्स कॉलेज) मंजू शर्मा, अनीता शर्मा, अनु शर्मा, डाॅ.महिमा उपाध्याय, रूपम राजौरिया(फैशन डिजाइनर) उदित, आद्यान,अनंत आदि की उपस्थिति विशेष रही।
शहर के प्रख्यात रेडियोलॉजिस्ट एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ.निखिल शर्मा ने अपने संबोधन में ब्रजभाषा काव्य मंच द्वारा आयोजित इस वृहद एवं सुव्यवस्थित साहित्यकार समागम और सम्मान समारोह को आगरा के साहित्यक इतिहास में मील का पत्थर बताते हुए सभी का हृदय से आभार व्यक्त कर धन्यवाद दिया।
संपादकीय: रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’—ब्रजभाषा और हिन्दी के सशक्त हस्ताक्षर
आगरा के डायमंड जुबली हॉल में आयोजित अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हिन्दी और ब्रजभाषा की जीवंत चेतना का उत्सव था। इस विराट साहित्यिक समागम के केंद्र में यदि कोई व्यक्तित्व सबसे अधिक प्रभावशाली रूप में उभरकर सामने आया, तो वह हैं डाॅ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’। उनका व्यक्तित्व एक ऐसे सृजनशील साहित्यकार का है, जो शब्दों को केवल काग़ज़ तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व से जोड़ता है।
डाॅ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनाते हैं। उनकी कृति ‘सतरंगी गीत’ भावनाओं, संवेदनाओं और जीवन के विविध रंगों का सशक्त दस्तावेज है। वहीं ‘काव्य मंजरी’ जैसे साझा संकलन का संपादन यह प्रमाणित करता है कि वे व्यक्तिगत यश से अधिक सामूहिक साहित्यिक उन्नयन में विश्वास रखते हैं। नवोदित कवियों को मंच देना और वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित करना उनकी दूरदर्शी सोच का परिचायक है।
ब्रजभाषा काव्य मंच के माध्यम से उन्होंने जिस निरंतरता, अनुशासन और गरिमा के साथ साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया है, वह आज के समय में विरल है। उनके प्रयासों से ब्रजभाषा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की सशक्त अभिव्यक्ति और भविष्य की संभावना बनकर सामने आ रही है। यही कारण है कि देश के विभिन्न प्रांतों से साहित्यकार उनके मंच से जुड़कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
निस्संदेह, डाॅ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ जैसे साहित्यकार हिन्दी और ब्रजभाषा के लिए एक धरोहर हैं। उनका सृजन, संगठन और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि साहित्य केवल लेखन नहीं, बल्कि साधना है। ऐसे व्यक्तित्व ही भाषा को जीवित रखते हैं, उसे समय के साथ आगे ले जाते हैं और समाज को आत्मबोध कराते हैं।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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