ऐसा काम करें जिससे आपके माता-पिता, गांव, शहर, समाज और देश को गर्व हो
वैभव चाहिए तो निद्रा, आलस्य, क्रोध, तंद्रा, भय और काम टालने की प्रवृत्ति तो परित्याग करो
डॉ. भानु प्रताप सिंह
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
शारदा विश्वविद्यालय आगरा का दीक्षारंभ 2K25 कार्यक्रम कई मायनों में भव्य और दिव्य रहा। सबसे बड़ी बात रही कि शारदा विश्वविद्यालय की अपनी कलम से स्थापना करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र आईएएस मुख्य अतिथि के रूप में आए। उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन में विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्हें ऐसी सीखें दीं, जिनका अनुसरण करके कोई भी विकसित भारत के निर्माण में अप्रतिम योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा काम करें जिससे आपके माता-पिता, गांव, शहर, समाज और देश को गर्व हो।
कठोपनिषद में वर्णित स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध उद्घोष—
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।”
(उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।)
दीक्षारंभ कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा, संकल्प और जिम्मेदारी का संचार किया।
दीक्षारंभ का सही अर्थ
मिश्र ने कहा— “यहां दीक्षारंभ हो रहा है, न कि शिक्षारंभ। शिक्षा केवल ज्ञान और रोजगार तक सीमित होती है, जबकि दीक्षारंभ का अर्थ है नवजीवन का शुभारंभ, कायाकल्प का आरंभ। दीक्षारंभ में पूर्ण मानव बनने की साधना है।”

भारत के स्वर्णिम युग की ओर
उन्होंने कहा— “आप भाग्यशाली हैं कि 2025 में विद्यार्थी हैं। आज हमारा देश दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2022 को भारत के स्वर्णिम युग की शुरुआत की थी और पंचप्रण दिए थे।”
- 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना।
- गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलना।
- अपनी विरासत पर गर्व करना।
- एकता और अखंडता को सुदृढ़ करना।
- कर्तव्य भाव को निभाना।
“आने वाले 22 वर्षों में भारत न केवल विकसित राष्ट्र बनेगा बल्कि आप विद्यार्थी उसके प्रत्यक्ष लाभार्थी होंगे।”

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक सूत्र
नीतिशास्त्र में कहा गया है—
काकचेष्टा बकोध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च।
अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंचलक्षणम्।।
(विद्यार्थी को कौवे की तरह जिज्ञासु, बगुले की तरह ध्यानस्थ, कुत्ते की तरह जागरूक, सीमित भोजन करने वाला और गृह-त्यागी होना चाहिए। यही सच्चे विद्यार्थी के पाँच लक्षण हैं।)
विदुर नीति के अनुसार, वैभव चाहने वाले विद्यार्थियों को छह चीजों का त्याग करना चाहिए—
निद्रा, आलस्य, क्रोध, तंद्रा, भय और काम टालने की प्रवृत्ति।

विद्यार्थियों के लिए 19 जीवनोपयोगी सीखें
- आत्मनिर्भर बनो, अपना स्टार्टअप शुरू करो।
- नशे से दूर रहो – अल्कोहल, धूम्रपान और ड्रग्स से बचो।
- स्वानुशासन अपनाओ – यही कठिनाइयों से बचाता है।
- समय प्रबंधन करो – यही सफलता की कुंजी है।
- नई चीजें सीखते रहो।
- स्वास्थ्य को प्राथमिकता दो – व्यायाम, योग, प्राणायाम और ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाओ।
- पौष्टिक आहार लो।
- सत्यनिष्ठा (Ethics) अपनाओ – “मामा टेस्ट” और “बाबा टेस्ट” को जीवन का आधार बनाओ।
- केवल पढ़ाई नहीं, संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करो।
- स्वयंसेवा और गतिविधियों में भाग लो।
- अपना नेटवर्क (दोस्त) बनाओ।
- बड़े सपने देखो – जैसा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा, “सपना वह है जो आपको सोने न दे।”
- जहाँ हो, वहीं बेस्ट करो।
- कोशिश करते रहो, क्योंकि आपमें अपार क्षमता है।
- संकल्प से सिद्धि होती है।
- टेक्नोलॉजी अपनाओ, वरना निरक्षर माने जाओगे।
- हर क्षेत्र में कौशल विकसित करो।
- पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाओ।
- समाज के लिए उपयोगी बनो। सकारात्मक सोच रखो।
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।।

अन्य विशिष्ट अतिथियों का मार्गदर्शन
कुलपति प्रो. जयंती रंजन
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. (डॉ.) जयंती रंजन ने ब्रज क्षेत्र की पौराणिकता, प्रभु श्रीकृष्ण की लीलाओं तथा संत सूरदास के योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार
उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी का महत्व बताया। कहा कि आने वाला समय पूरी तरह तकनीक-आधारित है और विद्यार्थियों को इसके अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
प्रो-चांसलर वाई.के. गुप्ता
शारदा विश्वविद्यालय आगरा के (Pro-Chancellor) प्रो-चांसलर श्री वाई.के. गुप्ता ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, सेवा कार्य, इंट्राडिसीप्लिनरी शिक्षा तथा भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प पर प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं शारदा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियों में जाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
डीन छात्र कल्याण प्रो. शैलेंद्र सिंह
कार्यक्रम की शुरुआत उनके स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विद्यार्थियों का अभिनंदन करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध परंपरा का परिचय दिया।
चांसलर श्री पी.के. गुप्ता
उन्होंने दीक्षारंभ कार्यक्रम पर शुभकामनाएँ दीं।
रजिस्ट्रार डॉ. प्रवीन तिवारी ने आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

संपादकीय
शारदा विश्वविद्यालय का यह दीक्षारंभ कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए जीवन-दर्शन का मार्गदर्शन था। दुर्गा शंकर मिश्र (IAS) ने अपने अनुभव, श्लोक, दोहे और प्रेरक कथनों से विद्यार्थियों को जो सीखें दीं, वे आजीवन उनके पथप्रदर्शक बनेंगी।
उनका संदेश स्पष्ट था—
“जिंदगी केवल डिग्री नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास है।”
उनके प्रेरक उद्बोधन के लिए हम उन्हें साधुवाद देते हैं। यह अवसर निश्चय ही शारदा विश्वविद्यालय और इसके विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य और गौरव की बात है।
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