बीते कुछ सालों से लोगों के बीच गुलाल और रंग से होली खेलने को लेकर परहेज बढ़ा है, इसलिए अब फूलों की होली ट्रेंड में हैं. वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से लेकर मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर तक सब जगह रोजाना ही फूलों की होली हो रही है और इसके लिए बड़ी मात्रा में फूलों की खपत हो रही है. स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक यहां रोजाना लगभग 2,000 टन फूलों की खपत हो रही है.
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा और वृंदावन में होली की धूम इस समय देखने लायक है. लठमार होली से लेकर लड्डू और अबीर-गुलाल से मथुरा की गलियां पट चुकी हैं. लेकिन हवा में महक है तो सिर्फ गेंदा, गुलाब और मोगरे की, क्योंकि मथुरा की फूलों की होली इन सबसे खास है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां फूलों की होली के चलते करोड़ों का कारोबार भी हो रहा है.
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से लेकर मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर तक सब जगह रोजाना ही फूलों की होली हो रही है और इसके लिए बड़ी मात्रा में फूलों की खपत हो रही है. स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक यहां रोजाना लगभग 2,000 टन फूलों की खपत हो रही है.
फूलों की बढ़ गई डिमांड
मथुरा, गोवर्धन, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल जैसी जगहों पर इन दिनों फूलों की होली के साथ-साथ मंदिर की सजावट और पूजा-पद्धति सभी के लिए फूलों की आवश्यकता पड़ रही है. इसलिए यहां रोजाना करीब 2,000 क्विंटल फूल की खपत हो जा रही है. इसलिए मथुरा के आसपास ही नहीं, पहाड़ों तक के फूल यहां पहुंच रहे हैं.
होली पर ब्रज क्षेत्र में फूलों की मांग को देखते हुए यहां कई दिन पहले से तैयारी शुरू हो जाती है. भरतपुर के तो कई गांव में फूलों की खेती खास इसी मौके के लिए की जाती है. इससे किसानों को फायदा होता है और फूलों की खेती से कुछ ही दिन में अच्छी कमाई हो जाती है.
हो रहा करोड़ों का कारोबार
मथुरा के आसपास इस समय गुलाब की पंखुड़ियों का रेट भी 100 से 150 रुपए किलो तक पहुंच चुका है. वहीं गेंदा की एक पोटली (करीब 1 किलो वजन) भी 70-80 रुपए में मिल रही है. ऐसे में 8 दिन के होली उत्सव के दौरान यहां फूलों का ही करोड़ों का कारोबार होने की उम्मीद है.
गुलाब की पंखुड़ियां ही इस समय 100 रुपए किलो तक मिल रही हैं, जबकि सही-सलामत फूल तो और ज्यादा रुपए के हिसाब से मिल रहे हैं.
– एजेंसी
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