संघ की भारत माता के हाथ में भगवा ध्वज… तिरंगा क्यों नहीं?

हाल ही में आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा घर–घर भारत माता की तस्वीरें और पंपलेट बांटे जा रहे हैं। इन चित्रों में भारत माता के हाथ में भगवा ध्वज दर्शाया गया है, जबकि राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा होना चाहिए। इसको लेकर कई लोगों में सवाल और नाराजगी पैदा हो रही है। मेरा मानना है कि […]

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लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुचिता का प्रश्न और एसआईआर की अनिवार्यता

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार भारत में चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सबसे जीवंत उत्सव है। मतदान जनता को अपनी आवाज़ सुनाने और नीतिगत दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान प्रशासन निष्पक्षता, सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ करता है—मतदान केंद्रों की तैयारी […]

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फेक ब्रेकिंग की दौड़ में मीडिया की गिरती साख…

बृजेश सिंह तोमर(वरिष्ठ पत्रकार एवं आध्यात्मिक चिंतक) कभी समाचार माध्यमों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, क्योंकि वे समाज को दिशा देते थे, सत्ता से सवाल करते थे और जनता तक सत्य पहुंचाते थे। लेकिन टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के विस्तार के बाद “सबसे पहले खबर दिखाने” की अंधी होड़ ने मीडिया […]

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युगदृष्टा पंडित जवाहरलाल नेहरू : आधुनिक भारत के शिल्पकार

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित पंडित जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माणकर्ताओं में अग्रणी माने जाते हैं। वे न केवल स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे, बल्कि स्वतंत्र भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना को दिशा देने वाले विश्वमान्य नेता भी थे। उनका जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद के […]

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अख़बारों में बच्चों के लिए जगह कहाँ?—खाली पन्नों पर बचपन की उपेक्षा का सवाल…

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार रविवार की सुबह बेटे प्रज्ञान को गोद में लेकर अख़बार से कोई रोचक बाल-कहानी पढ़ाने की इच्छा अधूरी रह गई। किसी भी प्रमुख अख़बार में बच्चों के लिए एक भी रचना नहीं थी। समाज बच्चों को पढ़ने के लिए कहता है, पर उन्हें पढ़ने को क्या देता है? […]

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मुस्कुरा रही है स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी: नफरत के खिलाफ जनता का फैसला

संजय पराते न्यूयॉर्क बंदरगाह के सामने खड़ी स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी ट्रंपियन अमेरिका की हार की घोषणा कर रही है। न्यूयॉर्क मेयर के चुनाव में जोहरान ममदानी की जीत मोदीयन इंडिया की हार की भी घोषणा है, क्योंकि ममदानी के चुनाव प्रचार में ट्रंप के लंगोटिया मित्र मोदी की आलोचना भी शामिल थी। अब मोदी और […]

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वंदे मातरम के 150 साल: डॉ देवी सिंह नरवार का यह आलेख आपके हृदय को रोमांचित कर देगा

  वंदे मातरम् : राष्ट्रभक्ति का अमर गीत मानव भावनाओं की असीम दुनिया मनुष्य की विचार-शक्ति जहाँ थक जाती है, कल्पना और तर्क-शक्ति जहाँ मार्ग नहीं खोज पाती, बुद्धि असहाय हो जाती है, हृदयगत भावों की दुनिया वहाँ से प्रारंभ होती है। मानव-मस्तिष्क की उड़ान सीमित है, परन्तु सहानुभूति, ममता, त्याग, दया, करुणा, प्रेम, श्रद्धा, […]

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विदेश की चाह में बर्बादी का रास्ता: कैसे ‘डंकी रूट’ निगल रहा है भारतीय युवाओं का भविष्य

डॉ सत्यवान सौरभ विदेश में सुनहरे भविष्य के लालच में, भारतीय युवा अवैध रास्तों के शिकार बन रहे हैं। एजेंटों का यह नेटवर्क न केवल कानून तोड़ रहा है, बल्कि परिवारों की उम्मीदों और देश के भविष्य को भी चुरा रहा है। ‘डंकी रूट’ एक अवैध प्रवासन मार्ग है, जिसके ज़रिए भारतीय युवा बिना वीज़ा […]

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लेखक गाँव: शब्दों की साधना और सृजन का हिमालय

3 से 5 नवम्बर 2025 को थानो (देहरादून) में होगा “स्पर्श हिमालय महोत्सव” — जहाँ साहित्य, संस्कृति और प्रकृति का संगम रचेगा नई सृजनगाथा डॉ सत्यवान सौरभ उत्तराखंड की वादियों में बसा थानो गाँव आज साहित्य और संस्कृति की नई पहचान बन चुका है। यह वही भूमि है जहाँ शब्दों की साधना और सृजन की […]

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मासूम चेहरे, संगठित शोषण: भीख मंगवाने की अंधेरी दुनिया…

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार मासूम बच्चों का शोषण समाज की गंभीर समस्या बन चुका है। भीख मंगवाना केवल गरीबी का नतीजा नहीं, बल्कि बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाने वाला व्यवस्थित व्यवसाय है। लोग दया के भाव में पैसा देते हैं, जबकि बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होते हैं। समाज, […]

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