आगरा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को अपने आगरा प्रवास के दौरान खेल और राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने जहाँ एक ओर उत्तर प्रदेश टी-20 लीग की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं दूसरी ओर नीट (NEET-NTA) विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे सियासी हमले किए।
यूपी टी-20 लीग: प्रतिभाओं के लिए आईपीएल का प्रवेश द्वार
राजीव शुक्ला ने जोर देकर कहा कि यूपी टी-20 लीग प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस लीग के माध्यम से अब तक 18 खिलाड़ी आईपीएल तक का सफर तय कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि आगामी सीजन के ऑक्शन में करीब 250 खिलाड़ियों पर फ्रेंचाइजियों की नजरें होंगी। प्रशांत वीर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 14.5 करोड़ रुपये की बोली यह साबित करती है कि यह मंच खिलाड़ियों की किस्मत बदलने की ताकत रखता है।
तेज गेंदबाजी को बढ़ावा और महिला क्रिकेट पर ध्यान
बीसीसीआई और यूपी क्रिकेट एसोसिएशन के साझा प्रयासों का जिक्र करते हुए शुक्ला ने ‘स्पीड हंट’ कार्यक्रम के बारे में बताया। इसके तहत 134 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार वाले 34 गेंदबाजों को लीग ऑक्शन सूची में जगह दी गई है। लॉजिस्टिक कारणों से वर्तमान में लीग लखनऊ और कानपुर तक सीमित है, लेकिन भविष्य में विस्तार की संभावनाओं से इनकार नहीं किया गया। महिला क्रिकेट के सवाल पर उन्होंने कहा कि जय शाह के नेतृत्व में बीसीसीआई महिला टी-20 लीग शुरू करने की दिशा में भी सक्रियता से विचार कर रहा है।
रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों पर विराम
भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा के संन्यास संबंधी चर्चाओं को राजीव शुक्ला ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह निराधार और अफवाह बताते हुए स्पष्ट किया कि रोहित शर्मा टीम की अहम कड़ी हैं।
नीट-एनटीए विवाद: सरकार पर बरसे राजीव शुक्ला
खेलों के इतर, शुक्ला ने नीट-एनटीए प्रकरण पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह अब महज छात्रों का मसला नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी आक्रोश बन चुका है। शुक्ला ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार केवल संसद में चर्चा का ढोंग कर रही है, लेकिन समाधान के प्रति गंभीर नहीं है।”
”केवल चेहरा बदलने से नहीं, व्यवस्था सुधारने से हल होगा भ्रष्टाचार”
शिक्षा सचिव के फेरबदल पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केवल नियुक्तियां बदलने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक भ्रष्टाचार में लिप्त जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार के ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
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