Agra News: जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन, मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय बोले- संस्कारविहीन शिक्षा मानवता के लिए खतरा

PRESS RELEASE

आगरा। जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया (जीएसआई) की 38वीं वार्षिक तीन दिवसीय कार्यशाला आगरा में न केवल वृद्धावस्था चिकित्सा का अंतरराष्ट्रीय मंच बनी, बल्कि शिक्षा, संस्कार और मानवता पर गहन आत्ममंथन का सशक्त स्वर भी उभरा। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि संस्कारविहीन शिक्षा समाज और मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है।

संस्कारविहीन शिक्षा मानवता के लिए खतरा: योगेन्द्र उपाध्याय

होटल क्लार्क्स-शिराज में आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि धरती पर भगवान का रूप माने जाने वाले डॉक्टरों को हिंसक और संवेदनहीन बना देने वाली शिक्षा प्रणाली पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कलम थामने की उम्र में हाथों में पत्थर थमाने वाली शिक्षा सम्पूर्ण मानवता को नुकसान पहुंचा रही है। राष्ट्रीय संस्कार ही हर चुनौती का समाधान हैं और समाज व देशहित में किया गया कार्य ही सच्ची भक्ति है।

देश-विदेश के 500 से अधिक विशेषज्ञों की सहभागिता

तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और यूके से आए 500 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों, उनके कारणों, आधुनिक उपचार पद्धतियों, सामाजिक दायित्वों और मानवीय मूल्यों पर वैज्ञानिक सत्रों के साथ-साथ प्रैक्टीकल प्रशिक्षण भी आयोजित किए जा रहे हैं।

जीएसआई के कार्यक्रमों और संगठन की जानकारी साझा

उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्ज्वलन के बाद जीएसआई के राष्ट्रीय सचिव डॉ. वीके हांडा ने संस्था के वार्षिक कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी। जीएसआई के मार्गदर्शक डॉ. वीके अरोरा ने सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने मुख्य अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। राष्ट्रीय सचिव डॉ. ओपी शर्मा ने बताया कि वर्ष 1982 में स्थापित जीएसआई के वर्तमान में 1600 से अधिक सदस्य हैं।

कन्वोकेशन में आठ डॉक्टरों को मिली फैलोशिप

कार्यशाला के कन्वोकेशन सत्र में जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की फैलोशिप आठ डॉक्टरों को प्रदान की गई। इनमें आगरा के डॉ. कैलाश विश्वानी और डॉ. प्रभात अग्रवाल भी शामिल रहे। इस अवसर पर जीएसआई के पदाधिकारियों और वरिष्ठ चिकित्सकों की उपस्थिति में चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।

वैज्ञानिक सत्रों में वृद्धावस्था से जुड़े विषयों पर मंथन

साइंटिफिक सेशंस में डॉ. पद्मा मलिक खन्ना ने ‘कैमिस्ट्री ऑफ एजिंग’, डॉ. विनोद कुमार ने वृद्धावस्था में डिमेंशिया, डॉ. कैलाश रंजन दास ने वृद्धावस्था में वैक्सीनेशन, डॉ. धमीजा ने स्ट्रोक और डॉ. पीसी डेश ने वातावरण के बुढ़ापे पर प्रभाव विषय पर व्याख्यान दिए। इसके अलावा मोटापा, इंसुलिन, जीवनशैली और उम्र से संबंधित अन्य रोगों पर भी विशेषज्ञों ने विचार रखे।

100 डॉक्टरों ने ली जेरिएट्रिक केयर की प्रैक्टीकल ट्रेनिंग

कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आए जेरिएट्रिक कोर्स की ऑनलाइन कक्षाएं कर रहे 100 डॉक्टरों ने प्रैक्टीकल ट्रेनिंग प्राप्त की। प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। डॉ. पंकज अग्रवाल ने इंसुलिन लगाने की तकनीकों पर वर्कशॉप कराई, जबकि डॉ. अश्विन, डॉ. बालकृष्णन और डॉ. साजेश अशोकन ने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया।

धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कैलाश विश्वानी ने किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष गौतम, डॉ. अजीत चाहर, डॉ. एके वर्मा और डॉ. सुमित लवानिया ने संयुक्त रूप से किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh