देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पेरारिवलन करीब 30 साल से जेल में बंद है और इस दौरान उसका आचरण लगातार संतोषजनक रहा है. सरकार की ओर से देरी होने के कारण उसे हमेशा जेल में नहीं रखा जा सकता. इधर पेरारिवलन ने बताया था कि तमिलनाडु सरकार के आदेश को राज्यपाल और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने से उसकी रिहाई नहीं हो पा रही है.
न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने उन दलीलों का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है कि दोषी पेरारिवलन 30 साल तक जेल में रहा है और उसका व्यवहार संतोषजनक रहा है, चाहे वह जेल के भीतर हो या पैरोल की अवधि के दौरान. सुप्रीम कोर्ट को पेरारिवलन ने बताया कि तमिलनाडु सरकार रिहाई के आदेश दे चुकी है, जिस पर राज्यपाल और केंद्र सरकार की मंजूरी बाकी है. इधर, सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के लिए पेश एडिशनल सॉलिसीटर जनरल के एम नटराज ने पेरारिवलन की रिहाई का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड के लिए फांसी की सजा 1999 में दी गई थी. 2014 में सुप्रीम कोर्ट इस सजा को उम्र कैद में बदल दिया था. इसके पीछे इस बात को आधार बनाया गया था कि राष्ट्रपति उसकी दया याचिका पर फैसला लेने में लंबा समय लगा रहे हैं. इस बात पर जोर दिया गया था कि उसने काफी समय जेल में बिताया है. एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि हत्याकांड के दोषी को जेल में रहने के आधार पर रियायत मिल चुकी है और उसे दूसरी बार इसी आधार पर लाभ नहीं देना चाहिए. उन्होंने बताया कि कानूनन पेरारिवलन की सजा माफ करने का फैसला केंद्र सरकार का काम है, इस लिए कोर्ट को आदेश नहीं देना चाहिए.
गौरतलब है कि 21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हत्या हुई थी और 11 जून 1991 को पेरारिवलन को गिरफ्तार कर लिया गया था. उस हत्याकांड में बम धमाके के लिए उपयोग में आई 8 वोल्ट की बैटरी खरीद कर मास्टरमाइंड शिवरासन को देने का दोष पेरारिवलन पर सिद्ध हुआ था. पेरारिवलन घटना के समय मात्र 19 साल का था, उसने जेल में रहते हुए कई डिग्री हासिल कीं. कोर्ट ने अपने आदेश में इनका उल्लेख किया है.
-एजेंसियां
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