आगरा। ताजनगरी आगरा में नकली और अवैध दवाओं के काले कारोबार से जुड़े माफियाओं की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। थाना मलपुरा क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध दवाओं के अवैध भंडारण और संदिग्ध कारोबार से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में आगरा अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायालय से राहत पाने की कोशिश कर रहे आरोपी सलूआ उर्फ मुकीम, शामिन उर्फ छोटू और इकरार को झटका लगा है। अदालत के इस कड़े फैसले से नकली दवाओं के अवैध धंधे में लिप्त पूरे सिंडिकेट में खलबली मच गई है।
यह पूरा मामला मलपुरा थाना क्षेत्र के धनौली में औषधि विभाग (Drug Department) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त छापेमारी से जुड़ा हुआ है। सटीक सूचना के आधार पर की गई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान टीम ने एक ठिकाने पर छापा मारकर अवैध रूप से भंडारित दवाओं का भारी जखीरा बरामद किया था। मौके से जब्त की गई दवाओं की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और वैधता का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के लिए 14 विभिन्न प्रकार की दवाओं के नमूने (सैंपल) सील कर राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए थे।
‘हे मां मेडिकोज’ के संचालक से जुड़े हैं तार
जांच के दौरान इस अवैध दवा भंडारण के तार ‘हे मां मेडिकोज’ के संचालक हिमांशु अग्रवाल से भी जुड़े पाए गए। इसके बाद थाना मलपुरा में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा पंजीकृत किया गया था। पुलिस और ड्रग विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई के बाद आरोपी पक्ष ने कानूनी राहत के लिए न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल की थी, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और जनस्वास्थ्य के खतरे को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
आगरा में पहले भी हो चुकी है 3.63 करोड़ की दवाओं पर बड़ी स्ट्राइक
आगरा शहर में नकली और प्रतिबंधित दवाओं का अवैध नेटवर्क लंबे समय से पुलिस और औषधि प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इससे पहले भी जिले में दवा व्यापार की आड़ में चल रही भारी अनियमितताओं पर व्यापक कार्रवाई की जा चुकी है। ड्रग विभाग की सघन जांच में 58 दवा लाइसेंसों में गंभीर धांधली उजागर हुई थी, जिसके आधार पर कुल 9 मुकदमे दर्ज कराए गए थे। उस दौरान करीब 3.63 करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाओं को जब्त करने की ऐतिहासिक कार्रवाई की गई थी।
लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं सबकी निगाहें
मलपुरा का यह ताजा मामला भी दवाओं के अवैध भंडारण, फर्जी रैपिंग और अमानक गुणवत्ता को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। लैब भेजी गईं 14 प्रकार की दवाओं की जांच रिपोर्ट आते ही यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि दवाओं में कौन-कौन से रासायनिक तत्व मौजूद थे और वे मरीजों की जान के लिए कितनी खतरनाक थीं।
चूंकि नकली दवाओं का यह काला धंधा सीधे तौर पर बेकसूर मरीजों की जिंदगी और सेहत से जुड़ा हुआ है, इसलिए ऐसी फर्जी दवाओं के इस्तेमाल से गंभीर बीमारियों के इलाज पर जानलेवा असर पड़ने का अंदेशा रहता है। यही वजह है कि न्यायालय द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद अब इस मामले में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए पुलिस की विवेचना और तेज हो गई है।
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