आगरा में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन: स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

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आगरा: राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के निर्देशानुसार, उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी एवं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सहयोग से राष्ट्रीय एड्स एवं एस.टी.डी. नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद आगरा में जिला स्वास्थ्य अधिकारियों एवं चिकित्सा अधिकारियों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता की अध्यक्षता में हुई। कार्यक्रम में डिप्टी डीटीओ डॉ.एस.के. राहुल, जिला इम्यूनाइजेशन अधिकारी डॉ. उपेंद्र कुमार, डीसीएमओ डॉ. अमित कुमार, एसीएमओ डॉ. ऋषि गोपाल, डीसीएमओ डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, डीपीसी शशिकांत पोरवाल तथा एचआईवी-टीबी कोऑर्डिनेटर पंकज कुमार उपस्थिति रहे।

कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर एवं सीनियर मेडिकल ऑफिसर, पी-सीओई डॉ. नेहा गौर, पीएचएफआई के एक्सपर्ट उमेश रावतरे, कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफिसर नीरज श्रीवास्तव व दिशा टीम के सीपीएम पुरुषोत्तम तिवारी, सीएसओ रेनू बाला कौशल और डीएमडीओ दीप्ति सिंह ने प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।

डॉ. सुखेश गुप्ता ने कहा “कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा से संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को राष्ट्रीय एड्स एवं एस.टी.डी. नियंत्रण कार्यक्रम के उद्देश्यों, रणनीतिक प्राथमिकताओं तथा जिला स्तर पर कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी अद्यतन जानकारी एवं व्यावहारिक समझ प्रदान करना रहा।“

प्रशिक्षण के दौरान एचआईवी/एड्स की वर्तमान स्थिति, 95-95-95 लक्ष्य, जिला स्तर की एचआईवी महामारी, NACP की संरचना, जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी (DACO), दिशा (DISHA), मास (MAS), एचआईवी एवं एस.टी.आई. स्क्रीनिंग, परामर्श एवं परीक्षण सेवाएं, एस.टी.आई./सिफलिस प्रबंधन, एचआईवी एवं सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संक्रमण की रोकथाम, एआरटी, टीबी एवं एचआईवी-टीबी सह-संक्रमण, वायरल लोड मॉनिटरिंग, U=U अवधारणा, हाई रिस्क ग्रुप्स, टारगेटेड इंटरवेंशन, ओपियॉइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी तथा समुदाय आधारित एचआईवी रोकथाम सेवाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के प्रमुख कानूनी प्रावधानों, एचआईवी से संबंधित भेदभाव की रोकथाम तथा अधिकार-आधारित दृष्टिकोण की जानकारी भी दी गई।

प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी एवं सहभागी बनाने के लिए केस स्टडी, प्रस्तुतीकरण, समूह चर्चा एवं व्यावहारिक गतिविधियों का उपयोग किया गया, जिससे प्रतिभागियों को जिला स्तर पर एचआईवी सेवाओं के प्रबंधन एवं समन्वय की बेहतर समझ विकसित हुई।

कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों की NACP संबंधी जानकारी एवं व्यावहारिक क्षमता को मजबूत किया गया। विशेष रूप से उन्हें एचआईवी की रोकथाम, शीघ्र पहचान, जांच, उपचार, एआरटी से जोड़ने, वायरल लोड मॉनिटरिंग, एचआईवी-टीबी सेवाओं के एकीकरण तथा रेफरल एवं फॉलो-अप के संबंध में बेहतर समझ प्राप्त हुई। साथ ही, जिला स्वास्थ्य प्रणाली के विभिन्न स्तरों के बीच बेहतर समन्वय एवं कन्वर्जेन्स स्थापित करने तथा एचआईवी सेवाओं को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ प्रभावी रूप से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला के अंत में पोस्ट-ट्रेनिंग असेसमेंट एवं प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं व्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें जिला स्तर पर एचआईवी कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को जिला स्तर पर एचआईवी कार्यक्रम की योजना, क्रियान्वयन, निगरानी एवं स्वास्थ्य सेवाओं के साथ प्रभावी कन्वर्जेन्स हेतु आवश्यक जानकारी एवं कौशल प्रदान किया गया। इससे राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के निर्धारित उद्देश्यों तथा 95-95-95 लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में जनपद आगरा के प्रयासों को और गति मिलने की उम्मीद है।

Dr. Bhanu Pratap Singh