एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की नवीन ‘हॉलो-एंट्री’ तकनीक पर कार्यशाला, अमेरिकी विशेषज्ञ ने साझा किए अनुभव

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आगरा: ताजनगरी के ऐतिहासिक सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) में चिकित्सा शिक्षा के स्तर को उन्नत करने और आधुनिक शल्य चिकित्सा (सर्जरी) तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक विशेष शैक्षणिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी की अत्यंत नवीन और सुरक्षित ‘हॉलो-एंट्री’ (Hollow-Entry) तकनीक पर गहन मंथन हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए अमेरिका के सेवानिवृत्त वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. स्टैन चाओ ने संकाय सदस्यों, वरिष्ठ चिकित्सकों और रेजीडेंट डॉक्टरों को इस तकनीक की कार्यप्रणाली, व्यावहारिक प्रयोग और प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया।

​डॉ. स्टैन चाओ पिछले एक दशक (10 वर्षों) से ‘हॉलो-एंट्री’ तकनीक के अनुसंधान, तकनीकी विकास और इसके वैज्ञानिक मूल्यांकन पर काम कर रहे हैं। कार्यशाला के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान मरीज के पेट की गुहा (Abdominal Cavity) में शुरुआत में प्रवेश करना सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण चरण होता है। इस नई हॉलो-एंट्री तकनीक में ट्रोकार डालने से पहले एक विशेष ‘हॉलो-पंच’ विधि के जरिए प्रवेश का मार्ग तैयार किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सर्जरी की शुरुआती प्रक्रिया को पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक वैकल्पिक, सटीक और सुरक्षित बनाना है।

मरीजों की सुरक्षा और सर्जिकल सटीकता पर जोर

​कार्यशाला के तकनीकी सत्रों के दौरान इस नई प्रक्रिया के संभावित उपयोगों, जोखिम प्रबंधन और मरीज की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से विचार-विमर्श हुआ। अमेरिकी विशेषज्ञ ने चिकित्सकों को लाइव डेमो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया। उल्लेखनीय है कि दूरबीन विधि से होने वाली लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में बड़े चीरे के बजाय बेहद छोटे छेदों से ऑपरेशन संपन्न किया जाता है। ऐसे में शुरुआती प्रवेश की प्रक्रिया का सही होना पूरे ऑपरेशन की सफलता तय करता है। इस दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे नवाचारों का अध्ययन सर्जिकल क्षेत्र में बेहद अहम माना जा रहा है।

प्राचार्य बोले— नवाचारों का निरंतर ज्ञान ही बेहतर इलाज का आधार

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्त ने इस आयोजन को संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में हर दिन नई तकनीकों और नवाचारों का समावेश हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ इस प्रकार की शैक्षणिक कार्यशालाओं के आयोजन से हमारे युवा रेजीडेंट्स और चिकित्सकों को वैश्विक स्तर के सर्जिकल कौशलों को सीखने व समझने का सीधा अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान का निरंतर उन्नयन (Upgradation) बेहद जरूरी है, जिससे चिकित्सकों की कार्यक्षमता बढ़ती है और अंततः इसका प्रत्यक्ष लाभ मरीजों को बेहतर व सुरक्षित उपचार के रूप में मिलता है।

​चार विभागों के डॉक्टरों ने लिया बढ़-चढ़कर भाग

इस विशेष शैक्षणिक कार्यशाला में एसएन मेडिकल कॉलेज के चार प्रमुख विभागों— जनरल सर्जरी, यूरोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग (Gynecology), तथा सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के विभागाध्यक्षों, वरिष्ठ चिकित्सकों, प्रोफेसरों और रेजीडेंट डॉक्टरों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अमेरिका से आए विशेषज्ञ से तकनीक से जुड़े सुरक्षात्मक सवाल भी पूछे।

एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल क्षेत्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा और शोध को बल मिलेगा, बल्कि ताजनगरी और आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को भी आधुनिक सर्जिकल सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh