नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके द्वारा सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में आज शाम 5 बजे ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकाले जाने के ऐलान के बाद दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन को आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ-साथ वामपंथी छात्र संगठनों—AISA और SFI का भी समर्थन प्राप्त है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस तिरंगा मार्च के आयोजन की अनुमति नहीं दी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से आयोजकों को किसी अन्य निर्धारित स्थान पर मार्च निकालने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने ठुकरा दिया। इसके बाद नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने एहतियात के तौर पर कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया। मार्च के ऐलान को देखते हुए दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस और उसके आसपास के इलाकों की किलेबंदी कर दी गई है।
6 हजार से अधिक पुलिसकर्मी और CAPF की 220 कंपनियां तैनात
कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे सेंट्रल दिल्ली क्षेत्र में दिल्ली पुलिस के 6,000 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। इसके अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की करीब 220 कंपनियों को मुस्तैद रखा गया है। सेंट्रल पार्क, राजीव चौक, जंतर-मंतर, पालिका बाजार और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा निगरानी बढ़ाने के लिए 10 से अधिक नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हर प्रमुख रास्ते पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की गई है, जिससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर कनॉट प्लेस की ओर आने वाले तमाम रास्तों का ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया है। जहां एक ओर मुंबई के आज़ाद मैदान में पुलिस ने तिरंगा मार्च की अनुमति दे दी है, वहीं दिल्ली में प्रशासनिक सख्ती के चलते माहौल काफी गर्म बना हुआ है।
प्रदर्शन पर तुरंत रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
दूसरी ओर, इस हाई-प्रोफाइल मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में भी सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में होने वाले इस प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने उम्मीद जताई कि इस प्रदर्शन में शामिल सभी पक्ष पूरी समझदारी और संयम से काम लेंगे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे आयोजनों के दौरान शहर में छोटी दुकानें चलाने वाले आम दुकानदारों को अपनी रोजी-रोटी कमाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और कोर्ट ऐसी परिस्थितियों से भली-भांति वाकिफ है।
न्यायमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापार और कारोबार को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो अदालत अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए उचित कदम उठाएगी।
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