लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने गुरुवार को लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन (प्रेस वार्ता) को संबोधित करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में कथित बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार, फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने, मजदूरी भुगतान में गंभीर अनियमितताओं और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कई तीखे सवाल दागे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने तंज कसते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में पहले चंदा चोरी, फिर चढ़ावा चोरी, फिर वोट चोरी की घटनाएं सामने आईं और अब गरीब मजदूरों के पेट पर लात मारकर उनकी खून-पसीने की मजदूरी की चोरी की जा रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने मनरेगा को महज एक आम सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि कानून का दर्जा देकर देश के ग्रामीण गरीबों को रोजगार का एक कानूनी अधिकार दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि ग्रामीण मजदूरों को उनके अपने ही गांव में काम मिल सके, शहरों की ओर होने वाला मजबूरी का पलायन रुके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं विकास को गति मिले। परंतु वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण आज इस ऐतिहासिक योजना की मूल आत्मा और गरीब श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
केंद्र सरकार के पत्र और 9 जिलों की जांच रिपोर्ट का दिया हवाला
उन्होंने बताया कि 8 जुलाई 2025 को स्वयं केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र में क्लोन ऐप (Clone Apps), फर्जी एवं डुप्लीकेट तस्वीरों, गलत जीपीएस (GPS) लोकेशन टैगिंग, बिना धरातलीय कार्य कराए मजदूरी के भुगतान और मूसलाधार बारिश के दौरान भी फर्जी तरीके से पोर्टल पर हाजिरी दर्ज किए जाने जैसी संगीन गड़बड़ियों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई थी। इसके बाद केंद्रीय स्तर पर 12 राज्यों में विशेष निगरानी टीमों को जांच के लिए भेजा गया था। उत्तर प्रदेश के अयोध्या, संभल, रामपुर, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, महराजगंज, चंदौली और जालौन सहित कुल नौ प्रमुख जिलों में की गई जांच का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब अयोध्या में भारी बारिश हो रही थी, तब कागजों और पोर्टल पर एक ही दिन में 1,224 मजदूरों की उपस्थिति कैसे दर्ज कर ली गई?
सरकार से पूछे कड़े सवाल और की श्वेतपत्र की मांग
आराधना मिश्रा मोना ने प्रदेश सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा कि मनरेगा में हुई इन अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? संदिग्ध क्लोन ऐप और फर्जी एपीके (APK) फाइलों के इस्तेमाल की गहन तकनीकी जांच कराने से सरकार पीछे क्यों हट रही है? केंद्र सरकार से गड़बड़ियों के स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद राज्य के सभी जिलों में उन पर क्या कार्रवाई की गई और इसका कितना अनुपालन हुआ?
उन्होंने मांग रखी कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रत्येक विकासखंड और ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत कराए गए सभी कार्यों, श्रमिकों की उपस्थिति और भुगतान के डिजिटल रिकॉर्ड की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करते हुए सरकार पूरे मामले पर जल्द से जल्द एक विस्तृत ‘श्वेतपत्र’ (White Paper) जारी करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा में इस्तेमाल होने वाला धन देश की जनता की गाढ़ी कमाई का है और गरीब मजदूरों के हक पर किसी भी प्रकार का डाका बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 3 महीने के भीतर कराने का आग्रह
मनरेगा के साथ-साथ त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए उन्होंने इस संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें भारतीय लोकतंत्र और ग्रामीण विकास की मूल नींव हैं। समय पर निष्पक्ष पंचायत चुनाव संपन्न कराना किसी सरकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उसका प्राथमिक संवैधानिक दायित्व है।
उन्होंने पंचायत चुनावों में की जा रही अनपेक्षित देरी को लेकर राज्य सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह जताया और मांग की कि उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अगले तीन महीने के भीतर प्रदेश में पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र माहौल में पंचायत चुनाव कराए जाएं।
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