बिना बोले आंखें बयां करती हैं हर जज्बात: अभिनेत्री शीना चोहान ने बताया अपनी खास अभिनय शैली का राज

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मुंबई: एक कुशल अभिनेता की आंखें कई बार वो अनकहे जज्बात भी बयां कर जाती हैं, जिन्हें शब्दों में बांध पाना बेहद कठिन होता है। आंखों में तैरता गहरा दर्द, एक हल्की-सी मुस्कान या कोई खामोश नजर किसी भी सिनेमाई दृश्य को सदा के लिए यादगार बना सकती है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री शीना चोहान के लिए उनकी बड़ी, आकर्षक और भावनाओं से लबरेज आंखें उनकी सबसे अनमोल संपत्तियों में से एक हैं। अपनी आंखों की इसी अद्भुत अभिव्यक्ति क्षमता के जरिए वह हर किरदार की मूल आत्मा को पर्दे पर साकार करती हैं और सीधे दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाती हैं।

​अपनी इस विशेष ईश्वरप्रदत्त खूबी के बारे में खुलकर चर्चा करते हुए शीना चोहान बताती हैं, “मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि आंखें इंसान की आत्मा का दर्पण होती हैं। मेरी आंखें आकार में बड़ी, सुंदर और हर तरह की भावना को स्पष्ट रूप से उजागर करने वाली हैं। मुझे लगता है कि कई मौकों पर आंखें उन बेहद जटिल भावनाओं को भी बड़ी सहजता से कह देती हैं, जिन्हें भारी-भरकम संवादों में पिरोना नामुमकिन सा लगता है। मेरी आंखें और उनके माध्यम से सूक्ष्म संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने की मेरी कला उन मुख्य कारणों में शामिल रही है, जिनकी वजह से जाने-माने निर्देशकों ने मुझे अपनी प्रतिष्ठित फिल्मों के लिए चुना। यह मेरी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है, जो मुझे हर किरदार की बारीकियों में ढलने और दर्शकों के साथ एक आत्मिक रिश्ता बनाने में मदद करती है।”

अभिनय के अपने व्यापक दृष्टिकोण को साझा करते हुए वह आगे कहती हैं, “मेरे लिए अभिनय का अर्थ केवल लिखे हुए संवादों को बोल देना मात्र नहीं है, बल्कि उन अनदेखी और अनकही भावनाओं को भी दर्शकों तक पहुंचाना है, जो बिना एक शब्द कहे खुद-ब-खुद सामने आ जाती हैं। चेहरे का एक छोटा-सा खिंचाव या एक तीखी नजर प्यार, तड़प, भय या असीम खुशी को बयां करने के लिए काफी होती है। मैं हमेशा यही चाहती हूं कि मेरी प्रस्तुति देखकर दर्शक उन भावनाओं को खुद अपने भीतर महसूस करें।”

​शीना चोहान की इस बहुमुखी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण उनके द्वारा निभाए गए विविध किरदारों में स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित मलयालम फिल्म द ट्रेन में दिग्गज अभिनेता ममूटी के साथ नजर आईं शीना ने उनके किरदार की जीवनसंगिनी की भूमिका को बेहद संजीदगी से जिया था। इस फिल्म में उन्होंने अपने स्वाभाविक हाव-भाव और प्रभावशाली आंखों के सहारे प्यार, समर्पण और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की।

​वहीं दूसरी ओर, देश के प्रसिद्ध और सम्मानित फिल्मकार बुद्धदेव दासगुप्ता की कृतियों मुक्ति और पत्रलेखा में महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर की कालजयी रचनाओं से प्रेरित किरदारों को अभिनीत करते हुए शीना ने अपनी आंखों से किरदार के अंतर्मन की गहराई, उसकी संवेदनशीलता और मानसिक उथल-पुथल को बेहद खूबसूरती से जाहिर किया।

​कॉमेडी-ड्रामा शैली की फिल्म एक्स-मेट्स में अपनी सहज कॉमिक टाइमिंग और चंचलता से दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने से लेकर नेटफ्लिक्स पर सराही गई फिल्म एंट स्टोरी में रहस्य, थ्रिल और मानसिक खिंचाव को जीवंत करने तक, शीना ने यह साबित किया है कि वह हर प्रकार की शैली में खुद को ढाल सकती हैं। उनके आंखों के भाव हर नए किरदार की मांग के अनुसार बदल जाते हैं, जो पूरी कहानी के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।

​शीना का अभिनय क्षेत्र केवल कोमल भावनाओं या प्रेम अभिव्यक्ति तक ही सीमित नहीं है। साहस, अटूट आत्मविश्वास और अंदरूनी वैचारिक संघर्षों से जूझते हुए जटिल किरदारों में भी वह अपनी आंखों के दम पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराती हैं। कभी उनकी पैनी और तीखी नजरें किरदार के चट्टानी हौसले को दर्शाती हैं, तो कभी उनकी खामोश और उदास आंखें उसके भीतर छिपे दर्द व कसमसाहट को उजागर कर देती हैं। यही अनूठी विविधता उनके निभाए गए पात्रों को दर्शकों के दिमाग में लंबे समय तक तरोताजा रखती है।

शीना चोहान के लिए अदाकारी का असली मर्म सिर्फ पर्दे पर किसी चरित्र को प्रस्तुत कर देना भर नहीं, बल्कि दर्शकों को उस चरित्र के सुख-दुख के सफर का हिस्सा बनाना है। उनका स्पष्ट मानना है कि कई बार एक छोटी-सी नजर लंबी और थकाऊ बातचीत से कहीं अधिक गहरी बात कह जाती है। किसी भी दृश्य के दौरान चेहरे पर आया एक छोटा-सा स्वाभाविक भाव भी दर्शक के मन-मस्तिष्क पर स्थायी छाप छोड़ सकता है।

अपनी आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म झाटस्य मरणम् ध्रुवम् के जरिए शीना चोहान एक बार फिर अपने अभिनय के कई नए और अनछुए पहलुओं को दर्शकों के सामने पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह मानती हैं कि कला के क्षेत्र में छोटी से छोटी अभिव्यक्ति भी एक बड़ा मोड़ ला सकती है और किसी भी साधारण किरदार को ऐतिहासिक बना सकती है।

​सिनेमा के इस दौर में जहां आमतौर पर संवादों को ही कहानी आगे बढ़ाने का मुख्य जरिया माना जाता है, वहीं शीना चोहान अपनी आंखों की भाषा को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं। उनके दृष्टिकोण से यह केवल शारीरिक सुंदरता का विषय नहीं है, बल्कि भावों को गहराई से व्यक्त करने, चरित्रों में प्राण फूंकने और बिना कुछ बोले दर्शकों के दिलों तक सीधा संवाद स्थापित करने की एक अद्भुत कला है।

Dr. Bhanu Pratap Singh