Hathras (Uttar Pradesh, India)। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किये गये लाक डाउन के दौरान दूसरे राज्यों व जिलों में फंसे प्रवासी कामगारों एवं अन्य लोगों का वापस अपने गांव लौटने का सिलसिला जारी है। इस विषम परिस्थिति में प्रवासी लोगों के साथ ही उनके घर-परिवार को कोरोना वायरस से सुरक्षित करने की बड़ी जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं के कंधे पर आ गयी है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य की देखभाल के साथ परिवार नियोजन के मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने का काम करने वाली आशा कार्यकर्ता इस नई जिम्मेदारी को एक चुनौती के रूप में लेते हुए मैदान में डट गयी हैं। अब जिले भर की आशा दीदी अपने मूल कार्यों के साथ कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। इसके साथ ही बाहर से आने वाले लोगों का ब्यौरा भी एकत्र करने का कार्य घर-घर जाकर कर रही हैं। जिले की कुल 1241 आशाएं कोविड से लड़ाई में कोरोना योध्दा के रूप में कार्य कर रही हैं। शहरी क्षेत्र में 27 आशा और ग्रामीण क्षेत्र में 1214 आशा लगातार कोविड-19 से लड़ाई में जुटी हुई हैं।
कोविड-19 के प्रति कर रहीं जागरुक
जनपद के सासनी ब्लॉक के गांव अमरपुरघना की आशा शिवानी चौहान भी इन्हीं आशाओं में से एक हैं। वह इन दिनों हर रोज सुबह उठकर अपने गांव के हर मोहल्ले में जाकर सर्वे करती हैं। वे यहां पर बाहर से आए हुए लोगों का ब्यौरा जुटाती हैं। इसके साथ ही वे सर्वे के दौरान घर के अन्य सदस्यों के हालचाल भी पता करती हैं। वे लगातार पूछती रहती हैं कि घर में किसी को बुखार, जुकाम या खांसी तो नहीं हैं. इसके साथ ही वे लोगों को याद भी दिलाती रहती हैं कि समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें, मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलें और लोगों से सामाजिक दूरी बनाकर रखें। एक ओर जब सब लोग अपने घरों में रहकर कोरोना से बचाव कर रहे हैं, तब शिवानी घर-घर जाकर न केवल लोगों को कोविड के प्रति जागरुक कर रही हैं, बल्कि बाहर से आए हुए लोगों का ब्यौरा जुटा कर सरकार तक पहुंचा भी रही हैं। शिवानी का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंद की मदद करने का कुछ अलग ही अनुभव होता है। वर्ष 2006 में शिवानी ने आशा के रूप में कार्य कर अपनी पहचान बनाने का निर्णय लिया। प्रशिक्षण के बाद काम पर पहुंची शिवानी को शुरुआती दिनों में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन बचपन के शौक और दृण इच्छा शक्ति से उन्होंने सारी दिक्कतों पर जीत हासिल कर अपनी अलग पहचान बनाई।
कोरोना योद्धा के रूप में आईं सामने
डीसीपीएम धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 27 आशा और ग्रामीण क्षेत्र में 1214 आशा कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि आशा काफी सराहनीय काम कर रही हैं, वे कोविड-19 से लड़ाई में कोरोना योद्धा के रूप में उभर कर सामने आई हैं।
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