वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की संदिग्ध हालात में मौत: चौथी मंजिल से गिरने से गई जान, परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

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वृंदावन (मथुरा)। उत्तर प्रदेश के धर्मनगरी वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ‘राधा केली कुंज आश्रम’ से एक बेहद हैरान करने वाली और दुखद घटना सामने आई है। यहां आध्यात्मिक संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, साधक की मौत आश्रम की चौथी मंजिल से नीचे गिरने के कारण हुई है, लेकिन उनके शरीर पर मिले चोट के निशानों और इस पूरी घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, मृतक के परिजनों के बयानों के बाद मामला और ज्यादा विवादित हो गया है, जिसके चलते पुलिस हर एंगल से मामले की गहराई से जांच कर रही है।

अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत

मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे साधक रसिक दुलारी शरण अचानक आश्रम की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए। इस भीषण हादसे में उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद आश्रम से जुड़े लोग उन्हें तुरंत आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मृतक की पहचान मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले दीपक लोधी के रूप में हुई है, जो पिछले करीब दो साल से वृंदावन में ही रह रहे थे और उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। इस हृदयविदारक घटना की सूचना मिलते ही जबलपुर में रह रहे उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे फौरन वृंदावन पहुंचे।

​परिजनों ने लगाए आश्रम प्रबंधन पर गंभीर आरोप

घटना के बाद मृतक के परिजनों ने आश्रम के कामकाज और व्यवस्थाओं पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपक के जीजा सोनू पटेल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जब से दीपक ने गुरु दीक्षा ली थी, तब से आश्रम के लोग उन्हें दीपक से मिलने नहीं देते थे। जब भी परिजन उनसे मिलने वृंदावन आते, तो उन्हें घंटों बाहर इंतजार करवाया जाता था और अंत में बिना मिले ही वापस भेज दिया जाता था।

​इतना ही नहीं, परिजनों का यह भी आरोप है कि दीपक का मोबाइल फोन भी बंद करवा दिया गया था, जिससे परिवार की उनसे कभी कोई सीधी बातचीत नहीं हो पाती थी।

परिजनों का दर्द यहीं नहीं थमा; उनका कहना था कि इतनी बड़ी और गंभीर घटना होने के बावजूद जब वे रात के करीब 3 बजे आश्रम पहुंचे, तो उन्हें सुबह 8 बजे तक बाहर ही बैठाए रखा गया। आश्रम की तरफ से किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ने उनसे बात तक नहीं की और न ही दीपक के अंतिम समय में कोई उनके पास आया।

पुलिस कर रही है हर पहलू की बारिकी से जांच

इस पूरे मामले पर संत रंगीली दास ने बयान दिया है कि दीपक शुरुआत में उनके पास भी आया करता था, लेकिन बाद में वह पूरी तरह आश्रम में ही रहने लगा था। दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 25 सितंबर की सुबह अस्पताल से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में लाया गया है।

​पुलिस के अनुसार, शुरुआती तफ्तीश और बयानों के आधार पर चौथी मंजिल से नीचे गिरने की बात सामने आ रही है। सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम और स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तमाम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो सकेगा कि यह कोई हादसा था, आत्महत्या थी या फिर इस घटना के पीछे कोई और अनसुलझी कहानी छिपी है।

Dr. Bhanu Pratap Singh