पंचामृत महाअभिषेक, शृंगार दर्शन और मध्यरात्रि महाआरती में उमड़ा वैष्णवजनों का श्रद्धा-सैलाब, शनिवार सायं होगा पारंपरिक नंदोत्सव
आगरा। नाई की मण्डी स्थित प्राचीन वैष्णव पीठ श्री प्रेमनिधि मंदिर में शुक्रवार को ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी महाराज के सम्मुख श्री कृष्ण जन्माष्टमी एवं अलौकिक काली घटा मनोरथ विशुद्ध पुष्टिमार्गीय सेवा-मर्यादा, परंपरा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के इस पावन अवसर पर ठाकुर जी के दिव्य दर्शन और कृपा प्राप्त करने के लिए दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं वैष्णवजन मंदिर पहुंचे।
मंदिर के मुख्य सेवा अधिकारी हरि मोहन गोस्वामी एवं प्रभु के सेवा अधिकारी सुनीत गोस्वामी ने पुष्टिमार्ग में जन्माष्टमी के तात्विक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुष्टिमार्गीय सिद्धांत में जन्माष्टमी केवल एक ऐतिहासिक अवतार प्रसंग नहीं, बल्कि साक्षात् पूर्ण पुरुषोत्तम परब्रह्म के ‘स्वरूपात्मक प्राकट्य’ का महापर्व है।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्वल्लभाचार्य महाप्रभुजी द्वारा श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध की सुबोधिनी टीका में किए गए निरूपण के अनुसार पुष्टि जीवों पर अहैतुक अनुग्रह कर उन्हें ‘स्वरूपानंद’ का दान कराने के लिए प्रभु का आविर्भाव हुआ है। पुष्टिमार्ग में सेवा ऐश्वर्य के भय से नहीं, बल्कि अनन्य वात्सल्य एवं प्रेमभाव से की जाती है, जहां ठाकुर जी को नवजात सुकुमार लालन के रूप में लाड़ लड़ाया जाता है। इसी दिव्य भाव के अनुरूप मंदिर में उपवास, पंचामृत स्नान, शृंगार और जागरण के मनोरथ संपन्न हुए।
प्रातः वेद-मंत्रोच्चार एवं पुष्टिमार्गीय विधि-विधान के साथ ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी महाराज का भव्य पंचामृत महाअभिषेक संपन्न हुआ। इसके उपरांत प्रभु के मनोहारी शृंगार दर्शन कराए गए तथा शृंगार आरती हुई।
सायं काल मंदिर में अलौकिक ‘काली घटा’ मनोरथ के दर्शन खुले। श्याम आभा से सुसज्जित दिव्य वातावरण और घटा के पद-कीर्तन के बीच ठाकुर जी के विशेष साज-शृंगार ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंदिर परिसर में भक्ति, संगीत और पुष्टिमार्गीय परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मध्यरात्रि में प्रभु के पावन प्राकट्य के क्षण पर जयकारों, शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की मंगल ध्वनि के मध्य भव्य जन्मोत्सव महाआरती संपन्न हुई। जैसे ही ठाकुर जी के प्राकट्य का उत्सव मनाया गया, पूरा मंदिर परिसर जय श्री कृष्ण और नंद के आनंद भयो के भक्तिमय उद्घोषों से गूंज उठा।
मंदिर प्रबंधक दिनेश पचौरी ने बताया कि जन्मोत्सव एवं काली घटा मनोरथ के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं की गईं, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं एवं वैष्णवजनों को सुगमता से ठाकुर जी के दर्शन प्राप्त हो सके।
इस अवसर पर आशीष पचौरी, रानू, विशाल, राजेश धाकड़, राहुल, हर्षुल, सागर शिवहरे आदि ने व्यवस्था संभाली। सुरेश पचौरी, महेश, मनीष अग्रवाल सहित आदि उपस्थित रहे।
मंदिर सेवा मंडल ने बताया कि जन्मोत्सव के उपरांत 5 सितम्बर (शनिवार) को सायं 6 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक पारंपरिक ‘नंदोत्सव’ (दधिखांदो) पूर्ण आनंद, उल्लास और पुष्टिमार्गीय परंपरा के साथ मनाया जाएगा।
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