​”शिक्षक से गुरु बनने की जरूरत, सही दिशा देकर जीवन की दशा बदलता है गुरु”: कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय

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385 शिक्षकों का सम्मान, छह पुस्तकों का लोकार्पण और ‘शिक्षा और संस्कार’ पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

आयुष राज्यमंत्री बोले— आने वाला कल भारत का, शिक्षक हैं नए भारत की नीति और आवश्यकता

आगरा। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र का निर्माता होता है। शिक्षक से आगे बढ़कर गुरु बनने की आवश्यकता है, क्योंकि गुरु वह होता है जो अपने शिष्य को सही दिशा देकर उसके जीवन की दशा बदल देता है। आज जब भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक तकनीक एवं रोजगार के नए अवसरों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे समय में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह विचार जेपी सभागार, खंदारी परिसर में तारक सेवा संस्था और बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला, पुस्तक लोकार्पण, शिक्षक सम्मान एवं ‘शिक्षा और संस्कार’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, आयुष राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय कवि प्रो. ओमपाल सिंह ‘निडर’, चीन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी, पद्मश्री डॉ. आर.एस. पारिख, पद्मश्री डॉ. उषा यादव, विधायक भगवान सिंह कुशवाहा, अनिता कुशवाहा, डायट प्रवक्ता डॉ. मनोज वार्ष्णेय, तारक सेवा संस्था वाराणसी के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित एवं बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में प्राथमिक विद्यालय मथुरा के बच्चों ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुति से अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रो. उमापति दीक्षित ने शिव स्तुति का पाठ किया।

शिक्षक से अधिक गुरु बनने की आवश्यकता : योगेंद्र उपाध्याय

मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने ‘शिक्षा और संस्कार’ विषय पर कहा कि स्वामी विवेकानंद की सोच थी कि शिक्षा संस्कारयुक्त हो। शिक्षक होना आसान है, लेकिन गुरु बनना बेहद कठिन है। वर्तमान समय में प्रत्येक शिक्षक को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है कि वह केवल विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है या उनके जीवन का मार्गदर्शन भी कर रहा है। गुरु वह है, जो दिशा देकर जीवन की दशा बदल देता है।

उन्होंने कहा कि भारत की नई शिक्षा नीति शिक्षा को संस्कार के साथ रोजगार और तकनीक से जोड़ने का काम कर रही है। आज आवश्यकता ऐसी शिक्षा की है, जो विद्यार्थी को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ संस्कारवान, आत्मनिर्भर और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक भी बनाए।

आने वाला कल भारत का है, शिक्षक नए भारत की नीति और आवश्यकता’

आयुष राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को शून्य दिया और इसी शून्य के माध्यम से दुनिया गणित और विज्ञान की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकी। जब विश्व में अराजकता का दौर था, तब भारत अपनी समृद्ध सभ्यता और ज्ञान परंपरा के साथ आगे बढ़ रहा था।

उन्होंने कहा कि महर्षि अगस्त, महर्षि भारद्वाज और महर्षि सुश्रुत जैसे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व विज्ञान, चिकित्सा और ज्ञान के क्षेत्र में ऐसे कार्य किए, जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाला कल भारत का है और शिक्षक इस नए भारत की नीति भी हैं और आवश्यकता भी। नई पीढ़ी को भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा से परिचित कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है।

‘भारतीय संस्कृति पर गौरवान्वित होना सीखें’

पद्मश्री डॉ. आर.एस. पारिख ने यजुर्वेद के महत्वपूर्ण सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वरणीय और गौरवशाली है। दुर्भाग्य यह है कि हम अपनी ही ज्ञान परंपरा और उपलब्धियों पर गर्व करना नहीं सीख पाए। मैकाले के आने के बाद भारत की शिक्षा और संस्कार नीति में बड़ा परिवर्तन हुआ। अब आवश्यकता है कि हम अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को पुनः स्मरण करें और उस पर गौरवान्वित होना सीखें।

पद्मश्री डॉ. उषा यादव ने कहा कि रामायण और महाभारत जैसे हमारे प्राचीन एवं ऐतिहासिक ग्रंथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। इन ग्रंथों में जीवन जीने की कला, कर्तव्य, त्याग, मर्यादा और मानवीय मूल्यों का संदेश मिलता है। शिक्षक का दायित्व बहुत बड़ा है।

आधुनिकता के दौर में अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और इसमें शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद तथा राष्ट्रीय कवि प्रो. ओमपाल सिंह ‘निडर’ ने अपने चिर-परिचित साहित्यिक अंदाज में युवाओं का आह्वान करते हुए कहा— “देश के जवानों जागो, भारतीय पुकारती है। अब राजनीति को भी नया रूप दीजिए।” उन्होंने शिक्षा, साहित्य और संस्कृति को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए युवाओं से अपनी जिम्मेदारी पहचानने का आह्वान किया।

डायट प्रवक्ता डॉ. मनोज वार्ष्णेय ने प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में हुए सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ आधुनिक शिक्षण व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।

आगरा जनपद में 500 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे विद्यार्थियों को तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

छह पुस्तकों का हुआ लोकार्पण

बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में शिक्षकों एवं शिक्षा से जुड़े विषयों पर लिखी गई छह पुस्तकों का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।

लोकार्पित पुस्तकों में डॉ. राजेश शर्मा एवं डॉ. पुष्पेंद्र सिंह की ‘स्मार्ट टीचर स्मार्ट स्कूल’, डॉ. अशोक कुमार एवं डॉ. सतीश कुमार की ‘मेरा विद्यालय मेरी पहचान’, डॉ. रश्मि सिंघल एवं डॉ. प्रेमलता शर्मा की ‘हमारा विद्यालय हमारी पहचान’, डॉ. बहोरन सिंह एवं डॉ. सत्यपाल सिंह की ‘पर्यावरण संरक्षण में शिक्षकों की भूमिका’, मुकेश शर्मा एवं ज्योति जैन की ‘इको क्लब में शिक्षकों की भूमिका’ तथा डॉ. राजेश शर्मा की ‘शिक्षा और संस्कृति’ शामिल हैं।

385 शिक्षकों को किया सम्मानित

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 385 शिक्षकों को उनके शैक्षिक योगदान एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों के सम्मान को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की परंपरा का सम्मान बताया गया।
तारक सेवा संस्था के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की और कहा कि शिक्षक सम्मान का उद्देश्य उन शिक्षकों के योगदान को समाज के सामने लाना है, जो निरंतर भावी पीढ़ी के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर प्रो. लवकुश मिश्रा, निर्मला दीक्षित, प्रो. हरिवंश पांडे, हेमंत द्विवेदी, डॉ. भोजराज शर्मा, बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय यादव, जिला अध्यक्ष डॉ. आलोक जैन आदि उपस्थित रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh