​’सिया राममय’ हुआ आगरा का महाकालेश्वर धाम: श्रीराम-जानकी विवाह महोत्सव में झूमे श्रद्धालु, पुष्प वाटिका और धनुष यज्ञ प्रसंग ने बांधा समां

PRESS RELEASE

आगरा। यमुना तट स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में आयोजित नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, महारुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव के सप्तम दिवस मंदिर परिसर पूर्णतः मिथिलामय हो गया। प्रातःकाल प्रतिदिन की भांति वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान भोलेनाथ का महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल का रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं विश्व कल्याण की कामना की।

संध्या में आयोजित श्रीराम कथा के सप्तम दिवस चित्रकूट धाम से पधारे कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने पुष्प वाटिका प्रसंग, धनुष यज्ञ एवं भगवान श्रीराम-जानकी विवाह का अत्यंत मनोहारी एवं भावपूर्ण वर्णन किया। विवाह महोत्सव के उपलक्ष्य में श्रद्धालु भी उत्सव के अनुरूप विशेष श्रृंगार कर पहुंचे। महिलाओं ने हाथों में मेहंदी रचाकर मंगलगीत गाए, जबकि पुरुष भगवान श्रीराम की बारात के स्वरूप में पारंपरिक वेशभूषा धारण कर उत्सव में शामिल हुए। पूरा मंदिर परिसर “सीताराम”, “जय श्रीराम” और मंगल गीतों से गुंजायमान हो उठा।

कथा व्यास पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, प्रेम, त्याग और आदर्शों का दिव्य संगम है। पुष्प वाटिका में श्रीराम और माता जानकी का प्रथम मिलन तथा धनुष यज्ञ में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करना यह संदेश देता है कि ईश्वर की इच्छा के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता। उन्होंने कहा कि श्रीराम-जानकी का दांपत्य जीवन आज भी भारतीय संस्कृति में आदर्श गृहस्थ जीवन की सर्वोच्च प्रेरणा है और प्रत्येक परिवार को उनके आदर्शों को अपनाना चाहिए।

यज्ञाचार्य आचार्य पंडित सुनील कुमार वशिष्ठ ने बताया कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना और श्रीराम कथा का यह दिव्य संगम श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है। उन्होंने बताया कि शनिवार को श्रीराम कथा में कोप भवन लीला एवं वनवास लीला का मार्मिक प्रसंग सुनाया जाएगा, जिसमें भगवान श्रीराम के त्याग, आज्ञापालन और आदर्श जीवन का संदेश मिलेगा। उन्होंने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा में उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित करने का आग्रह किया।

कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम, माता जानकी के स्वरूप एवं भगवान महाकाल की सामूहिक आरती कर मंगलकामनाएं कीं। विवाह महोत्सव के उल्लासपूर्ण वातावरण में भक्त देर तक भक्ति गीतों पर झूमते रहे।

इस अवसर पर मोहन लाला, प्रशांत मित्तल, राहुल अग्रवाल, हर्ष गोयल, नवदीप अग्रवाल, विजय अग्रवाल, डॉ. आशुतोष सक्सेना आदि श्रद्धालुओं ने श्रीरामचरितमानस की आरती कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh