अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे में सेंधमारी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इस प्रकरण को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। जहाँ एक ओर विपक्ष सीधे तौर पर योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कह रहा है कि प्रशासन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि SIT की निष्पक्ष जांच में पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, आरोपी अविनाश शुक्ला के आवास पर हुई पुलिस कार्रवाई का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोशल मीडिया पर 5 जून 2026 की एक वीडियो क्लिप जंगल की आग की तरह फैल रही है। कथित तौर पर सुरक्षा एजेंसियों को चंदा चोरी की भनक बहुत पहले ही लग चुकी थी, जिसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट और पुलिस ने एक संयुक्त और गुप्त ऑपरेशन शुरू किया था।
सूत्रों की मानें तो 4 जून को उस कमरे के बाथरूम में नोटों की गड्डियां बरामद की गई थीं, जहाँ चंदे की गिनती की जाती थी। इसी महत्वपूर्ण सुराग के मिलने के बाद जांच की दिशा तय हुई और टीम सीधे आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुँची।
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो के साथ यह दावा भी किया जा रहा है कि ट्रस्ट को 4 जून को ही चोरी का पता चल गया था, लेकिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया। इसके बाद 5 जून को पुलिस और जांच टीम ने अविनाश शुक्ला के घर पर दबिश दी और वहाँ से रुपयों से भरा एक बैग बरामद किया गया।
5 जून का यह सीसीटीवी फुटेज बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें पुलिस बल और ट्रस्ट के कुछ सदस्य अविनाश शुक्ला के घर से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस फुटेज में एक व्यक्ति के हाथ में काले रंग का बैग साफ देखा जा सकता है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि इसमें वही चोरी की गई रकम है जो आरोपी के घर से बरामद हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस और मंदिर ट्रस्ट की टीम ने वहां गहन तलाशी अभियान चलाया था, और यह वीडियो घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है।
चंपत राय की भूमिका पर उठे सवाल
इस सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं। गौरतलब है कि 7 जून को चंपत राय ने एक बयान जारी कर चंदा चोरी से जुड़ी किसी भी घटना की जानकारी न होने की बात कही थी। अब सार्वजनिक हुए इस फुटेज से ट्रस्ट की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
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