आगरा में सर्जन्स ने दिया हरित भविष्य का संदेश, इलेक्ट्रिक वाहनों की रैली निकालकर प्रदूषण नियंत्रण का किया आह्वान

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सर्जन्स ने दिया हरित भविष्य का संदेश, इलेक्ट्रिक वाहनों की रैली निकालकर प्रदूषण नियंत्रण का किया आह्वान

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आगरा।

स्वास्थ्य के प्रहरी बने पर्यावरण के भी प्रहरी

समाज को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले चिकित्सकों ने अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रेरणादायी पहल की है।
एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ आगरा (एएसए) द्वारा आयोजित
सर्जन्स वीक के अंतर्गत सोमवार को
इलेक्ट्रिक वाहनों की जागरूकता रैली (ईवीथान) निकाली गई।
इस रैली के माध्यम से शहरवासियों को बढ़ते प्रदूषण के प्रति सचेत करते हुए पर्यावरण हितैषी जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

कृष्णा इंद्रप्रस्थ से शुरू होकर पांच किलोमीटर तक गूंजा संदेश

इलेक्ट्रिक वाहनों की यह रैली
कृष्णा इंद्रप्रस्थ से उत्साहपूर्ण वातावरण में प्रारंभ हुई। चिकित्सकों और प्रतिभागियों का काफिला लगभग
पांच किलोमीटर की दूरी तय करते हुए विभिन्न मार्गों से होकर पुनः कृष्णा इंद्रप्रस्थ पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। रैली के दौरान पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से जुड़े संदेशों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

इलेक्ट्रिक वाहन बन सकते हैं बदलाव की मजबूत शुरुआत

एएसए के अध्यक्ष डा. अमित श्रीवास्तव एवं
ईसी मेंबर डा. समीर ने कहा कि प्रदूषण आज केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों की बढ़ती संख्या वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। ऐसे में लोगों को यथासंभव इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना चाहिए, जिससे प्रदूषण में कमी लाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

पौधारोपण के साथ जीवनशैली में भी बदलाव जरूरी

एएसए के पूर्व अध्यक्ष डा. सुनील शर्मा तथा
सचिव डा. जगत पाल सिंह ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें अपने दैनिक व्यवहार में भी बदलाव लाना होगा। अनावश्यक वाहन उपयोग से बचना, छोटी दूरी के लिए पैदल चलना और साझा परिवहन को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जिस गति से प्रदूषण बढ़ रहा है, यदि अभी से सजग नहीं हुए तो आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और गंभीर हो जाएंगी।

चिकित्सकों की सहभागिता ने बढ़ाया अभियान का उत्साह

इस जागरूकता अभियान में
डा. एच.एल. राजपूत, डा. विनीत वर्मा, डा. संदीप गुप्ता, डा. भुवनेश शर्मा, डा. उत्कर्ष, ऋषि श्रीवास्तव तथा सोनू सहित अनेक चिकित्सकों और सहयोगियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प दोहराया कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वच्छ पर्यावरण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी।

प्रदूषण रोकना केवल सरकार नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी

रैली में मौजूद चिकित्सकों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब तक आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक अपेक्षित बदलाव संभव नहीं होगा।
ऊर्जा की बचत, पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उपयोग और जागरूक नागरिक व्यवहार ही स्वच्छ भारत की मजबूत नींव बन सकते हैं।

संपादकीय

आज दुनिया जिस तेजी से विकास की दौड़ में आगे बढ़ रही है, उसी गति से पर्यावरणीय संकट भी गहराता जा रहा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक वायु प्रदूषण लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग और फेफड़ों से जुड़ी अनेक बीमारियों का बढ़ना इस खतरे की गंभीरता को स्पष्ट करता है। विडंबना यह है कि हम विकास के साधनों का उपयोग तो कर रहे हैं, लेकिन उसके दुष्परिणामों को कम करने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं कर रहे।

ऐसे समय में जब चिकित्सक स्वयं समाज को जागरूक करने के लिए आगे आते हैं तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। जो लोग प्रतिदिन प्रदूषण से उत्पन्न बीमारियों का उपचार करते हैं, यदि वही प्रदूषण के कारणों को कम करने का संदेश दें, तो समाज उस संदेश को अधिक गंभीरता से ग्रहण करता है।
एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ आगरा की यह पहल केवल एक रैली नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का अभियान है।

इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य की आवश्यकता बनते जा रहे हैं। हालांकि केवल तकनीक बदल देना ही पर्याप्त नहीं होगा। हमें अपनी सोच भी बदलनी होगी। छोटी दूरी के लिए पैदल चलना, साइकिल का उपयोग बढ़ाना, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना और अनावश्यक ईंधन खपत से बचना भी उतना ही आवश्यक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे बदलाव करे तो उसका सामूहिक प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है।

हमें यह समझना होगा कि स्वच्छ हवा कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन का मूल अधिकार है। आने वाली पीढ़ियों को यदि सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देना है तो आज ही पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनाना होगा।
धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh