आगरा: ताजनगरी की पुलिसिंग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शमसाबाद थाने के तत्कालीन एसएसआई (SSI) रमेश चंद माथुर पर एक किसान से जेसीबी मशीन छोड़ने के नाम पर 1.25 लाख रुपये ऐंठने का संगीन आरोप लगा है। पीड़ित का दावा है कि उसने कर्ज लेकर दरोगा की जेब भरी, लेकिन न तो मशीन मिली और न ही पैसे वापस मिले। अब पुलिस कमिश्नर के आदेश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
खेत समतल कर रही मशीन को बनाया ‘कमाई’ का जरिया
मामला शमसाबाद के डबरई गांव का है। पीड़ित विजय सिंह के मुताबिक, 16 जुलाई 2025 को उनके खेत में समतलीकरण का काम चल रहा था। तभी तत्कालीन एसएसआई रमेश चंद माथुर वहां पहुंचे और जेसीबी को कब्जे में ले लिया। आरोप है कि मशीन छोड़ने के बदले दरोगा जी ने सवा लाख रुपये की डिमांड रख दी।
सेठ से ब्याज पर उधार लिए थे पैसे
विजय सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि पुलिसिया कार्रवाई के डर से उन्होंने कस्बे के एक सेठ से ब्याज पर पैसे उधार लिए और दरोगा को दे दिए। आठ महीने बीत जाने के बाद भी जब न जेसीबी छूटी और न दरोगा का दिल पसीजा, तो थक-हारकर पीड़ित ने आलाधिकारियों की चौखट पर दस्तक दी। बता दें कि आरोपी दरोगा का फिलहाल तबादला कमला नगर थाने में हो चुका है।
एसीपी शमसाबाद को सौंपी गई जांच
इस भ्रष्टाचार की गूंज पुलिस कमिश्नरेट तक पहुंचने के बाद हड़कंप मचा है। एसीपी शमसाबाद अमीषा सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायत गंभीर है और इसकी जांच की जा रही है। तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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