​पब्लिक सेक्टर बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे पर सियासत गरमाई: वित्त मंत्रालय के पलटवार के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दागे 12 तीखे सवाल

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लखनऊ: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किए जाने और वित्त मंत्रालय के इस पर बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में जोरदार घमासान शुरू हो गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा सरकारी बैंकों के सुधारों और वित्तीय सफलता के दावों पर पलटवार करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार तरीके से ‘बारह साल, बारह सवाल’ पूछते हुए बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

वित्त मंत्रालय के दावे पर अखिलेश के 12 तीखे सवाल

​इससे पहले वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) की ओर से कहा गया था कि सरकार के निरंतर हस्तक्षेप और बैंकिंग सुधारों के चलते सरकारी बैंकों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। इस दावे को खारिज करते हुए अखिलेश यादव ने एक के बाद एक 12 सवाल दागे और जनता से जुड़े वित्तीय मुद्दों को उठाया।

​अखिलेश यादव द्वारा पूछे गए मुख्य सवाल इस प्रकार हैं:

​निजीकरण पर सवाल: यदि बैंक मजबूत हुए हैं, तो फिर उनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है?

खाते से पैसे कटने की समस्या: बैंक मजबूत हुए हैं तो गरीब जनता के बैंक खातों से बिना वजह पैसे क्यों काटे जा रहे हैं?

​केवाईसी (KYC) की जटिलताएं: बार-बार केवाईसी के नाम पर जनता को परेशान करने और उनके लेन-देन पर रोक क्यों लगाई जा रही है?

​भगोड़े उद्योगपति: बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंकों से खरबों का लोन लेकर देश से भागने वाले डिफॉल्टर्स को पकड़कर भारत लाकर सजा क्यों नहीं दी जा रही?

​ग्रामीण इलाकों में बदतर व्यवस्था: यदि वित्तीय स्थिति सुधरी है, तो ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाएं और एटीएम बंद करके जनता को कैश के लिए क्यों भटकाया जा रहा है?

ऋण वितरण की जटिल प्रक्रिया: किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलियों और बिना भारी-भरकम गारंटर के आसानी से लोन क्यों नहीं मिल रहा है?

साइबर ठगी और त्वरित कार्रवाई: साइबर ठगी का शिकार हुए आम आदमी का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं मिलता, उसे थानों और बैंकों के चक्कर क्यों कटवाए जाते हैं?

​होम और एजुकेशन लोन का ब्याज: होम लोन और शिक्षा लोन पर ब्याज दरें इतनी अधिक क्यों हैं कि आम आदमी की कमर टूट रही है?

​डिजिटल ट्रांजैक्शन फेल होना: डिजिटल भुगतान विफल होने पर जनता का पैसा कई-कई दिनों तक होल्ड पर क्यों रखा जाता है?

​सिबिल (CIBIL) स्कोर का शिकंजा: सिबिल स्कोर में छोटी सी तकनीकी चूक पर युवाओं को डिफाल्टर घोषित कर उनका भविष्य क्यों खराब किया जा रहा है?

बुजुर्गों की सुरक्षा: वृद्ध और अनपढ़ लोगों को यूपीआई (UPI) और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए प्रत्येक बैंक शाखा में विशेष सहायता काउंटर क्यों नहीं बनाए जा रहे?

कर्मचारियों की समस्याएं और स्टाफ की कमी: बैंक कर्मियों की जायज मांगें क्यों नहीं मानी जा रही हैं? बैंकों में नई भर्तियां क्यों बंद हैं और मौजूदा कर्मचारियों पर इतना कार्यभार क्यों है कि ग्राहक सेवा (Customer Service) प्रभावित हो रही है?

​सपा प्रमुख के इन तीखे सवालों ने एक बार फिर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, बैंकिंग सुधारों और आम आदमी को मिलने वाली सुविधाओं की पारदर्शिता पर बड़ी बहस छेड़ दी है। इस राजनीतिक और आर्थिक बयानबाजी के बाद अब वित्तीय गलियारों में भी इन मुद्दों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh