नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर लगातार जारी विवाद के बीच, कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग पर बेहद आक्रामक और तीखा हमला बोला है। उन्होंने खुलकर यह बात कही है कि जो कोई भी देश की चुनाव प्रणाली और उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करता है, वह सीधे तौर पर देश के साथ गद्दारी कर रहा है।
प्रियंका गांधी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में गड़बड़ी करना और भारी संख्या में यानी 13 करोड़ वोटरों के नाम सूचियों से हटा देना सीधे तौर पर देश के लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ किया गया एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त या आयोग के जिम्मेदारों को इस बात की पूरी तरह से जानकारी है कि यह सब कुछ उनकी नाक के नीचे घटित हो रहा है। उनके सहयोगियों और साथियों ने समय-समय पर इस ओर उनका ध्यान भी आकर्षित किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इन आपत्तियों को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया और जानबूझकर एक ऐसी चुनाव प्रक्रिया को होने दिया जो निष्पक्ष नहीं कही जा सकती।
उन्होंने मांग उठाई कि उन पर किसी अन्य आम अपराधी की भांति ही आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए और साथ ही उन पर देशद्रोह का मामला भी चलना चाहिए।
प्रियंका गांधी की ओर से ये तीखे बयान ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की तरफ से एसआईआर से जुड़े फैसलों पर कथित तौर पर कई मर्तबा कड़ी आपत्तियां जताई गई थीं।
प्रियंका गांधी ने इस दौरान दोहराया कि जो भी व्यक्ति या संस्था चुनाव की पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ या छेड़छाड़ करती है, वह देश के साथ द्रोह कर रही है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि यदि चुनाव आयुक्त की सीधी जानकारी में कोई भी गैरकानूनी कार्य हुआ है, तो आखिर उन्हें किसी भी प्रकार की विशेष कानूनी सुरक्षा क्यों प्रदान की जानी चाहिए? उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए एक बार फिर जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में कथित तौर पर की गई हेरफेर और लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम को सूचियों से बाहर किए जाने का पूरा मामला सीधे तौर पर हमारे लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ किया गया एक बहुत बड़ा आपराधिक कृत्य है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि 13 करोड़ नाम हटाए जाने का यह बड़ा आंकड़ा एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर सामने आई मीडिया रिपोर्टों और विभिन्न राजनीतिक दलों के दावों के संदर्भ में है। इसे किसी भी रूप में कोई अंतिम न्यायिक या सरकारी आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता है।
दरअसल, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) ने अपनी उस रिपोर्ट के भीतर देश के कुल 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अंतर्गत प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का उल्लेख किया है, जिसके बाद से देश की राजनीति में भूचाल आया हुआ है।
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