आगरा में साइबर ठगी का दोहरा वार: इंस्पेक्टर के खाते से उड़े 4 लाख, तो सरकारी नौकरी के नाम पर परिवार से ठगे 13.25 लाख

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​उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा से साइबर ठगी के दो ऐसे सनसनीखेज मामले सामने आए हैं, जिन्होंने एक बार फिर बैंक खातों की सुरक्षा और नौकरी के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है। ठगों ने शहर में दो अलग-अलग घटनाओं को अंजाम देते हुए लोगों को कुल 17.25 लाख रुपये की चपत लगा दी है। पहले मामले में आगरा में तैनात एक सीआईडी इंस्पेक्टर के बैंक खाते से सात अलग-अलग बार में 4 लाख रुपये पार कर दिए गए, और सबसे हैरानी की बात यह रही कि उनके मोबाइल पर एक भी ट्रांजेक्शन का मैसेज या अलर्ट नहीं आया। वहीं, दूसरे मामले में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक परिवार से 13.25 लाख रुपये की भारी रकम ठग ली गई। दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

पहला मामला: सीआईडी इंस्पेक्टर के खाते से उड़े 4 लाख

साइबर ठगी की पहली घटना प्रयागराज की पीपलगांव शाखा में संचालित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक खाते से जुड़ी है। मूल रूप से प्रयागराज के खेलगांव पब्लिक स्कूल, बजहा क्षेत्र के रहने वाले लखन लाल मिश्र वर्तमान में आगरा में सीआईडी इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। उनका बैंक खाता पीएनबी की उसी पीपलगांव शाखा में है।

​लखन लाल मिश्र के अनुसार, बीते 20 सितंबर को उनके खाते से महज कुछ ही समय के अंतराल पर सात बार में कुल 4 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि खाते से इतनी बड़ी रकम कटने के बावजूद उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कोई भी निकासी संदेश या ओटीपी अलर्ट नहीं पहुंचा, जिस कारण उन्हें तत्काल इसकी भनक नहीं लग सकी। जब उन्होंने बाद में अपना खाता ऑनलाइन चेक किया, तो खाते से बड़ी रकम गायब मिली। इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि रकम कैसे और किन खातों में ट्रांसफर हुई है।

​दूसरा मामला: डीजीपी का पीआरओ बनकर हड़पे 13.25 लाख

साइबर ठगी का दूसरा मामला शहर के न्यू जनता कॉलोनी, मुस्तफा क्वार्टर इलाके का है। यहां रहने वाले अरविंद कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को उत्तर प्रदेश पुलिस में एएसआई (ASI) क्लर्क के पद पर नौकरी दिलवाने का झांसा देकर शातिर ठगों ने उनसे 13.25 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित के मुताबिक, उनकी पत्नी सुनीता सक्सेना एक शिक्षिका हैं और रोहता क्षेत्र में बीएलओ (BLO) का कार्य संभालती हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात वीरू शर्मा नाम के एक व्यक्ति से हुई थी, जिसने खुद को बड़ा समाजसेवी बताते हुए लखनऊ के उच्च अधिकारियों तक अपनी गहरी पहुंच का दावा किया था।

आरोप है कि कुछ समय बाद वीरू शर्मा ने फोन पर संपर्क कर कहा कि अरविंद सक्सेना के बेटे ने एएसआई क्लर्क की परीक्षा दी है और वह उसका चयन आसानी से करवा सकता है। अपना प्रभाव जमाने के लिए उसने राज शर्मा नामक एक अन्य व्यक्ति से फोन पर बात भी कराई, जिसे उसने ‘डिप्टी जनरल ऑफ पुलिस’ (DGP) का पीआरओ (PRO) बताया।

पीड़ित परिवार ने जब उस पर भरोसा कर लिया, तो आरोपियों ने अलग-अलग किस्तों में कुल 13.25 लाख रुपये वसूल लिए। परिवार को पूरी तरह अपने जाल में फंसाए रखने के लिए ठगों ने व्हाट्सएप पर परीक्षा परिणाम की एक फर्जी पीडीएफ (PDF) भी भेज दी, जिसे देखकर परिवार को लगा कि उनके बेटे का चयन पक्का हो गया है। हालांकि, जब अरविंद सक्सेना ने पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर परिणाम की असलियत खंगाली, तो उसमें उनके बेटे का नाम दूर-दूर तक नहीं था। सच्चाई सामने आते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्हें ठगी का अहसास हुआ। इस मामले में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें सावधानी

इन दोनों वारदातों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी नए-नए पैंतरे अपनाकर आम नागरिकों को चूना लगा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का सुझाव है कि कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर सरकारी नौकरी के नाम पर धन का लेन-देन न करें और किसी भी परीक्षा परिणाम की पुष्टि हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही करें। इसके अलावा, बैंक खातों में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि से बचने के लिए सतर्क रहें और समय-समय पर अपने खातों की मॉनिटरिंग करते रहें।

Dr. Bhanu Pratap Singh