आगरा। जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कहौं सो थोरी॥
श्रीरामचरितमानस में प्रभु श्रीराम और माता सीता की मनोहारी जोड़ी का वर्णन करने वाली चौपाइयों के भावों के अनुरूप श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 में धनुष यज्ञ लीला का भव्य मंचन किया गया। श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर आयोजित लीला में देश-विदेश के राजाओं के मिथिला नगरी आगमन से लेकर प्रभु श्रीराम द्वारा भगवान शिव के धनुष भंग करने, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और अयोध्या में विवाह का आमंत्रण भेजने तक के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। धनुष टूटते ही परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा और मिथिला में आनंदोत्सव का वातावरण छा गया।
धनुष यज्ञ लीला का आरंभ मिथिला नगरी में राजा जनक द्वारा आयोजित सीता स्वयंवर से हुआ। माता सीता के विवाह के लिए देश-विदेश के राजा-महाराजा जनकपुरी पहुंचे। स्वयंवर की शर्त थी कि जो वीर भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा। एक से बढ़कर एक बलशाली राजा और योद्धाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभी असफल रहे।
राजा जनक की चिंता बढ़ने लगी। स्वयंवर में उपस्थित राजाओं की असफलता के बीच गुरु विश्वामित्र के साथ आए प्रभु श्रीराम शांत और विनम्र भाव से बैठे रहे। गुरु की आज्ञा मिलने पर प्रभु श्रीराम धनुष के समीप पहुंचे। उन्होंने सहजता से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। इसी दौरान भगवान शिव का धनुष भंग हो गया। धनुष टूटने की गगनभेदी ध्वनि के साथ ही स्वयंवर स्थल उल्लास से भर उठा। देवताओं ने पुष्पवर्षा की और माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें पति रूप में स्वीकार किया।
भगवान शिव का धनुष टूटने का समाचार सुनकर भगवान परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। धनुष भंग करने वाले के प्रति उन्होंने रोष व्यक्त किया। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखे संवाद हुए। लक्ष्मण ने अपने तर्कों और निर्भीक वाणी से परशुराम के क्रोध का उत्तर दिया, जबकि प्रभु श्रीराम ने विनम्रता और धैर्य का परिचय देते हुए स्थिति को संभाला।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद के दौरान मंच पर वीररस और हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला। अंततः प्रभु श्रीराम के दिव्य स्वरूप और विनम्रता को पहचानकर परशुराम का क्रोध शांत हुआ।
धनुष भंग और माता सीता द्वारा प्रभु श्रीराम को वरमाला पहनाने के बाद मिथिला नगरी में विवाहोत्सव की तैयारियां आरंभ हो गईं। राजा जनक ने अयोध्या में महाराज दशरथ के पास विवाह का शुभ समाचार और आमंत्रण भेजने की व्यवस्था की। संदेश पहुंचने के बाद अयोध्या में भी हर्ष का वातावरण छा गया और बारात लेकर मिथिला पहुंचने की तैयारियों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
रामबारात पहली बार आठ किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचेगी शमशाबाद: हरिहर पुरी
श्री मनःकामेश्वर मठ के प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के अंतर्गत 15 अक्टूबर गुरुवार को श्रीराम बारात का भव्य आयोजन होगा। इस वर्ष रामबारात की विशेषता यह है कि वह पहली बार लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंचेगी। शमशाबाद क्षेत्र को जनकपुरी का स्वरूप दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग की परंपरा का सजीव अनुभव प्राप्त होगा। राम बारात की शोभा 51 से अधिक झांकियां शामिल होकर और बढ़ाएंगी।
हरिहर पुरी ने बताया कि 16 अक्टूबर को शिव वाटिका, जनकपुर में तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन किया जाएगा।
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