मुंबई में गूंजे भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुर: पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की शानदार प्रस्तुति पर झूम उठे विद्यार्थी

PRESS RELEASE

मुंबई: जब भारतीय शास्त्रीय संगीत के पारंपरिक सुर युवा पीढ़ी के जोश और उत्साह से मिलते हैं, तो वह सांस्कृतिक विरासत केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सीधे दिलों में उतर जाती है। मुंबई में आयोजित ‘भारतीय संगीत परंपरा’ की संगीतमय शाम ने कुछ ऐसा ही मनमोहक अनुभव कराया, जहाँ प्रख्यात शास्त्रीय गायिका और पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की सुरीली गायकी ने विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की गौरवशाली परंपरा से गहराई से रूबरू कराया। उनकी प्रस्तुति के दौरान गूंजती तालियों और बच्चों की आत्मीयता ने इस आयोजन को बेहद खास बना दिया।

​संस्कृति मंत्रालय और ‘मधु मूर्छना’ का साझा प्रयास

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की प्रस्तुति तथा ‘मधु मूर्छना’ और शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल के सहयोग से देश के चार प्रमुख शहरों में शास्त्रीय संगीत कॉन्सर्ट श्रृंखला ‘भारतीय संगीत परंपरा’ का आयोजन किया जा रहा है। इसी श्रृंखला के तहत 14 अक्टूबर को मुंबई में इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कृपाशंकर सिंह और अनिल मुरारका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

​विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही मुख्य आकर्षण

इस संगीतमय शाम का सबसे खूबसूरत पहलू विद्यार्थियों की सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। डॉ. सोमा घोष के गायन के दौरान बच्चों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ लय और ताल में उनका साथ दिया। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद विद्यार्थियों में डॉ. घोष से ऑटोग्राफ लेने की होड़ सी मच गई। यह पल कलाकार और युवा श्रोताओं के बीच एक मजबूत वैचारिक और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया।

​विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों के सहयोग से संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि कम उम्र से ही बच्चों को भारतीय कला और संस्कृति से जोड़ना उनकी सांस्कृतिक समझ को समृद्ध करने की दिशा में एक बेहद सार्थक कदम है।

सह-कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां और आगामी कार्यक्रम
​डॉ. सोमा घोष के साथ-साथ श्रद्धा पृथ्वीराज, जाने-माने संगीतकार विवेक प्रकाश और अन्य कुशल कलाकारों ने भी अपनी मनमोहक कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों की जुगबंदी और स्वतंत्र प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को जन-जन तक पहुँचाना और नई पीढ़ी में इसके प्रति रुचि जगाना है। मुंबई में मिले अपूर्व उत्साह के बाद अब इस श्रृंखला के आगामी कार्यक्रम कोलकाता, वाराणसी और दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे। मुंबई की यह संगीत संध्या इस बात की गवाही दे रही है कि जब परंपरा को संगीत के जरिए नई पीढ़ी से जोड़ा जाता है, तो सुर केवल कानों तक नहीं पहुँचते, बल्कि दिलों में बस जाते हैं।

-अनिल बेदाग

Dr. Bhanu Pratap Singh