केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयान पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का तीखा प्रहार; बोले— “यह चुनाव चोरी का स्थायी बंदोबस्त और लोकतंत्र का अपहरण है”

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​नई दिल्ली। केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों के सत्यापन और भुगतान की व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार की योजना अब सरकारी योजनाओं का लाभ आधार के बजाय वोटर ID (EPIC) से तय करने की है। उन्होंने इसे एक गहरी साजिश करार देते हुए कहा कि यदि इसे रोका नहीं गया, तो देश एक ऐसे ‘अपहृत लोकतंत्र’ में बदल जाएगा जहां जनता सरकार नहीं चुनेगी, बल्कि सरकार अपनी जनता खुद चुनेगी।

​राहुल गांधी के तीखे हमले: “यह चुनाव चोरी का स्थायी बंदोबस्त”

​राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से उठाए गए इस मुद्दे पर कहा कि ‘SIR’ के नाम पर बड़े पैमाने पर नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर नाम उन लोगों के काटे जा रहे हैं जो भाजपा के खिलाफ आक्रोश रखते हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वोटर लिस्ट एक निष्पक्ष संस्था के हाथ में होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर संदेह है।

​नेता प्रतिपक्ष ने चेताया, “कल जिसने भी ठाना कि भाजपा को हटाना है, चुन-चुन कर सबका नाम काटा जाएगा। नाम कटा तो वोट गया, वोट गया तो हक गया। आज बात पंचायती राज योजनाओं की है, कल राशन, पेंशन, मनरेगा, आवास, छात्रवृत्ति और आरक्षण पर भी आ सकती है। यह चुनाव जीतने की राजनीति नहीं, बल्कि चुनाव चोरी का इंतजाम और सत्ता में हमेशा बने रहने का स्थायी बंदोबस्त है। वोट देना आपका अधिकार है, शर्त नहीं। किसी गरीब की पेंशन उसके वोटर कार्ड की गुलाम नहीं हो सकती।”

​क्या था केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का बयान?

​बीते दिनों केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने ‘जन योजना अभियान 2026-27’ पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को उनके आधार नंबर की जगह उनके बायोमेट्रिक्स और वोटर आईडी (EPIC) नंबरों का उपयोग करके भुगतान किया जाएगा।

​ललन सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा था, “अब आधार लाभार्थियों को भुगतान करने का मुख्य आधार नहीं रहेगा। आधार कार्ड बनाने वाली संस्थाएं हर गली में उपलब्ध हैं, जो कुछ ही मिनटों में नया आधार कार्ड तैयार कर देती हैं।” हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि पंचायती राज मंत्रालय की कई ऐसी योजनाएं हैं जिनमें सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पैसे नहीं भेजे जाते, लेकिन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय समेत कई अन्य क्षेत्रों में आधार अनिवार्य बना हुआ है।

किन योजनाओं में है आधार की अनिवार्यता?

​वर्तमान में पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय पशुधन मिशन उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत लाभ पाने के लिए पात्र लाभार्थियों को आधार नंबर का प्रमाण देना या आधार ऑथेंटिकेशन कराना अनिवार्य है। इसके अलावा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम (मनरेगा), पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) तथा वृद्धावस्था, विधवा और विकलांगता पेंशन योजनाओं में भी डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के तहत भुगतान के लिए आधार से जुड़े बैंक खातों का ही उपयोग किया जाता है। अब इस पूरी प्रणाली में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।

Dr. Bhanu Pratap Singh