आगरा में सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास की नजरबंदी पर सियासी घमासान: पुलिस पहरे पर समाजवादी पार्टी ने खड़े किए कड़े सवाल

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उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए पिछले दिनों के प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास इन दिनों पुलिस की कड़ी नजरबंदी और पहरे के साए में हैं। आलम यह है कि वे घर पर रहते हैं तो बाहर पुलिस का कड़ा पहरा तैनात रहता है, और यदि वे बाहर कहीं जाते हैं तो पुलिस की टीम साए की तरह उनके साथ चलती है। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेताओं ने तीखा विरोध जताया है और पुलिस-प्रशासन से कड़े सवाल किए हैं।

पार्टी का कहना है कि जब 9 अक्टूबर को पार्टी की ओर से कोई भी धरना-प्रदर्शन निर्धारित या प्रस्तावित नहीं था, तो आखिर किस आधार पर महानगर अध्यक्ष के चारों ओर पुलिस का घेरा लगाया गया है।

सपा ने प्रशासन से मांगे चार तीखे सवाल

समाजवादी पार्टी ने पुलिस और जिला प्रशासन की इस कार्रवाई की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी की ओर से प्रशासन से मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है:

शब्बीर अब्बास को इस तरह नजरबंदी में रखने का वास्तविक और लिखित कानूनी आधार क्या है?

यह प्रशासनिक कार्रवाई आखिरकार किस उच्च अधिकारी के आदेश पर अमल में लाई गई है?

​जब नौ अक्टूबर को कोई भी धरना-प्रदर्शन तय नहीं था, तो ऐसी स्थिति में पुलिस का कड़ा पहरा और घेरा लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

क्या इस पूरी कार्रवाई के दौरान कानून द्वारा निर्धारित सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया है?

​’लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने का हक’

​समाजवादी पार्टी का यह स्पष्ट कहना है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और शांति कायम करना बेशक पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन हर एक प्रशासनिक कार्रवाई का एक स्पष्ट और पारदर्शी कानूनी आधार होना अनिवार्य है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में मनमाने तरीके से काम नहीं किया जा सकता, बल्कि स्थापित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। लोकतंत्र में विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

​फिलहाल, समाजवादी पार्टी ने शब्बीर अब्बास की इस प्रकार की अघोषित नजरबंदी पर पुलिस-प्रशासन की चुप्पी को लेकर नाराजगी जताई है और मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करे तथा नजरबंदी का ठोस कानूनी आधार सार्वजनिक करे।

Dr. Bhanu Pratap Singh