आगरा में नामकरण की खुशियों से ठीक पहले मातम: एक ही कंबल में सो रहे भाई-बहन को सांप ने डसा, बहन की मौत और भाई अस्पताल में भर्ती

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आगरा। जनपद के कागारौल क्षेत्र के मुरकिया गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घर की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। ठंड से बचने के लिए एक ही चारपाई पर कंबल ओढ़कर सो रहे भाई-बहन को कंबल में छिपे जहरीले सांप ने डस लिया। सांप के काटने का अहसास केवल भाई पंकज को हुआ, लेकिन उसकी बहन कामिनी को भनक तक नहीं लगी कि जहर उसके शरीर में भी फैल चुका है। अस्पताल में इलाज के दौरान बहन की मौत हो गई, जबकि भाई जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

​दस दिन पहले गूंजी थी नवजात की किलकारी

यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब परिवार में नवजात बच्चे के नामकरण संस्कार की तैयारियां जोरों पर थीं। मृतका के ताऊ व पंकज के पिता राकेश के अनुसार, करीब 10 दिन पहले ही पंकज के घर बेटे का जन्म हुआ था। गुरुवार को बच्चे का नामकरण संस्कार होना था, जिसके लिए रिश्तेदार भी घर पहुंचने लगे थे। घर में उत्सव जैसा माहौल था, लेकिन बुधवार की रात घटी इस अप्रत्याशित घटना ने सारी खुशियों को चीख-पुकार में बदल दिया।

एक ही चारपाई पर सोए थे भाई-बहन

बुधवार की रात कमरे में कामिनी और पंकज एक ही चारपाई पर सो रहे थे। ठंड बढ़ने पर दोनों ने एक ही कंबल ओढ़ लिया। किसी को अंदाजा नहीं था कि उसी कंबल में कोई जहरीला जीव छिपा है। बताया जा रहा है कि सांप ने सबसे पहले कामिनी को डसा और उसके बाद पंकज के पैर से लिपटकर उसे भी काट लिया। पंकज ने पैर पर सांप के लिपटने और काटने का अहसास होने पर शोर मचा दिया।

भाई की जान बचाने की गुहार लगाती रही कामिनी

पंकज की आवाज सुनकर कामिनी की नींद खुली। उसने भाई के पैर के पास काले रंग का सांप देखा तो वह बुरी तरह सहम गई। हालांकि, उसे उस वक्त यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि सांप उसे भी काट चुका है। वह घबराहट में भाई की जान बचाने के लिए परिवारवालों से गुहार लगाती रही और लगातार कहती रही कि भइया को तुरंत अस्पताल ले जाओ। परिजन आनन-फानन में पंकज को लेकर अस्पताल भागे, उस समय उन्हें कामिनी के बारे में कुछ पता नहीं था।

अचानक बिगड़ी कामिनी की तबीयत

पंकज का जब अस्पताल में इलाज चल रहा था, तभी घर से फोन आया कि कामिनी की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई है। उसे लगातार उल्टियां होने लगीं, सीने में जलन और चक्कर आने की शिकायत हुई। इसके बाद परिजनों को शक हुआ कि सांप ने कामिनी को भी डसा है। जब वे उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक जहर उसके शरीर में फैल चुका था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

​अंतिम संस्कार और परिवार का संघर्ष

परिजन कामिनी के शव को घर लाए और कुछ लोगों के कहने पर झाड़-फूंक व सपेरों की मदद भी ली, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। बुधवार रात करीब आठ बजे उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं, पंकज का इलाज शमसाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जहां पूरा परिवार उसकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा है। एक तरफ बेटी की मौत का गहरा गम है, तो दूसरी तरफ नवजात बच्चे की परवरिश और घायल बेटे की जिंदगी की चिंता ने परिवार को तोड़कर रख दिया है।

Dr. Bhanu Pratap Singh