आगरा में धनतेरस के साथ 6 दिवसीय दीपोत्सव का शंखनाद; बाजारों में उमड़ी भारी भीड़, शाम को होगा यम दीपदान

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​आगरा। दीपों की झिलमिलाती जगमगाहट, रंग-बिरंगी रोशनी से सजे बाज़ार, घरों में मंगल पूजा की तैयारियाँ और उल्लास से दमकते चेहरे… ताजनगरी आगरा में दीपावली के महापर्व का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस के पावन अवसर के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का आधिकारिक शंखनाद हो गया है। सुबह से ही शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों में खरीदारी के लिए ग्राहकों का सैलाब उमड़ने लगा है। सर्राफा बाजार से लेकर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी झालरों और पूजन सामग्री की दुकानों तक रौनक छाई हुई है।

​इस बार 5 नहीं, 6 दिनों का होगा दीपोत्सव

पंचांग की तिथियों के विशेष धार्मिक संयोग के कारण इस वर्ष पारंपरिक पांच दिवसीय दीपोत्सव का पर्व कुल छह दिनों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू हुआ यह महाउत्सव 11 नवंबर को भाई दूज के साथ संपन्न होगा। इस दौरान धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि और पारिवारिक प्रेम से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

धनतेरस पर आरोग्य और समृद्धि की कामना

​कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला धनतेरस दीपोत्सव का पहला और अति महत्वपूर्ण पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। आयुर्वेद के जनक माने जाने वाले भगवान धन्वंतरि की पूजा से आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन धन के देवता कुबेर, समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का विधि-विधान से पूजन किया जाता है।

​सोने-चांदी, बर्तन और नई झाड़ू की खरीदारी

धनतेरस पर नया सामान खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, पीतल, तांबे व चांदी के बर्तन, साबुत धनिया, मिट्टी के दीपक और नई झाड़ू खरीदने की सुदीर्घ परंपरा है। झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक और दरिद्रता निवारण का साधन माना जाता है। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन लोहे की धारदार वस्तुओं, कांच, प्लास्टिक और काले रंग के सामान की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।

​अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए शाम को ‘यम दीपदान’

धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के निमित्त मिट्टी का दीपक जलाया जाता है, जिसे ‘यम दीपदान’ कहा जाता है। सरसों के तेल का यह दीपक प्रज्वलित कर परिवार के सदस्यों की दीर्घायु, सुख-शांति और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

​धनतेरस 2026: पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त

​ पंडित रामबाबू आचार्य के अनुसार, 6 नवंबर को त्रयोदशी तिथि सुबह 10:30 बजे से प्रभावी हो चुकी है। पूजा और शुभ खरीदारी के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

​धनतेरस पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 6:01 बजे से रात 7:58 बजे तक।

​प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:08 बजे तक।

यम दीपदान का समय: शाम 5:31 बजे से शाम 6:49 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त (खरीदारी हेतु): सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक।

​लाभ व अमृत चौघड़िया (खरीदारी हेतु): दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:20 बजे तक।

​6 दिवसीय दीपोत्सव की तिथिवार तालिका

6 नवंबर (शुक्रवार) – धनतेरस: भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी व कुबेर पूजन, शुभ खरीदारी एवं यम दीपदान।

7 नवंबर (शनिवार) – छोटी दीपावली व नरक चतुर्दशी: भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की स्मृति में दीपमाला प्रज्वलन।

8 नवंबर (रविवार) – मुख्य दीपावली व महालक्ष्मी पूजन: सर्वप्रमुख दिन; महालक्ष्मी व भगवान गणेश का महापूजन।

​9 नवंबर (सोमवार) – सोमवती अमावस्या: स्नान, दान, ध्यान और जप-तप का विशेष संयोग।

10 नवंबर (मंगलवार) – गोवर्धन पूजा व अन्नकूट: गोवर्धन पर्वत पूजन, छप्पन भोग व मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद वितरण।

​11 नवंबर (बुधवार) – भाई दूज: भाई-बहन के पवित्र प्रेम का पर्व; तिलक लगाकर लंबी आयु की कामना के साथ उत्सव का समापन।

Dr. Bhanu Pratap Singh